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    जिस थाने को क्रांतिकारियों ने 1942 में फूंका था, वही 111 साल बाद बदहाल; टपकती छत के नीचे काम कर रही बिहार पुलिस

    Updated: Mon, 27 Jul 2026 05:04 PM (IST)

    औरंगाबाद का 111 साल पुराना गोह थाना भवन बदहाल स्थिति में है, जिसकी छत टपकने से महत्वपूर्ण दस्तावेज भीग रहे हैं और पुलिसकर्मियों को परेशानी हो रही है। ...और पढ़ें

    जर्जर छत से टपकता पानी

    जर्जर छत से टपकता पानी

    HighLights

    1. 111 साल पुराना गोह थाना भवन जर्जर, छत टपकती है।

    2. 1942 में क्रांतिकारियों ने इस थाने को आग लगाई थी।

    3. स्थानीय लोग नए आधुनिक थाना भवन की मांग कर रहे हैं।

    गौतम कुमार, गोह (औरंगाबाद)। ब्रिटिश शासनकाल में वर्ष 1915 में बना गोह थाना भवन 111 साल बाद भी बदहाल स्थिति में है। आजादी के आंदोलन की कई महत्वपूर्ण घटनाओं का गवाह रहा यह ऐतिहासिक थाना भवन अब खुद अपने जीर्णोद्धार की बाट जोह रहा है।

    भवन की छत जर्जर होने के कारण बरसात में पानी टपकता है। इससे थाना में रखे महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेजों के भीगने और खराब होने का खतरा बना रहता है।

    जर्जर छत से टपकता है पानी, दस्तावेजों की सुरक्षा बनी चिंता

    थाना भवन की खराब स्थिति के कारण पुलिसकर्मियों को भी काम करने में काफी परेशानी होती है। बरसात के दिनों में छत से पानी टपकने के कारण महत्वपूर्ण कागजात और सरकारी दस्तावेजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है।

    थानाध्यक्ष के अनुसार, जनता की सुनवाई के दौरान भी भवन की जर्जर स्थिति को लेकर डर बना रहता है।

    स्थानीय लोगों ने ऐतिहासिक भवन के संरक्षण के साथ नए थाना भवन के निर्माण की मांग की है।

    जब्त वाहनों के लिए जगह नहीं

    थाना परिसर में जब्त वाहनों को रखने के लिए भी पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं है। जगह के अभाव में थाना के मुख्य द्वार के समीप गया-दाउदनगर एनएच-120 के किनारे बड़े वाहनों को खड़ा करना पड़ता है।

    इससे सड़क पर जाम की स्थिति बनी रहती है। साथ ही सड़क किनारे वाहनों के खड़े रहने से आए दिन दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है।

    चौकीदारों का भवन गिरा, बरामदे में रहने को मजबूर

    थाना परिसर में चौकीदारों के रहने के लिए बनाया गया भवन भी जर्जर होकर गिर चुका है। भवन के गिर जाने के बाद चौकीदारों को थाना के बरामदे में रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

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    पुलिसकर्मियों का कहना है कि थाना भवन की स्थिति को देखते हुए यहां काम करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिसकर्मियों और आम जनता की सुविधा के लिए जल्द आधुनिक थाना भवन का निर्माण कराया जाना चाहिए।

    1942 में क्रांतिकारियों ने फूंक दिया था थाना भवन

    गोह थाना भवन का इतिहास भी काफी महत्वपूर्ण रहा है। वर्ष 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान गोह के क्रांतिकारियों ने इसी थाना भवन को आग के हवाले कर दिया था।

    इस घटना में गोह प्रखंड मुख्यालय निवासी सीताराम तिवारी, रामदेव सिंह, पुरुषोत्तम लाल अग्रवाल और अनूप दूबे को छह माह से अधिक समय तक कारावास की सजा काटनी पड़ी थी।

    वर्ष 1947 में देश की आजादी के बाद सीताराम तिवारी और रामदेव सिंह को स्वतंत्रता सेनानी घोषित किया गया।

    कभी बड़े भू-भाग में फैला था गोह थाना, बाद में बने तीन नए थाने

    जेपी सेनानी सह गोह निवासी अरविंद पाण्डेय ने बताया कि उनके फुफेरे भाई सीताराम तिवारी ने उन्हें थाना फूंकने की घटना की जानकारी दी थी।

    उन्होंने बताया कि भौगोलिक दृष्टिकोण से गोह थाना का क्षेत्र कभी काफी बड़ा हुआ करता था। बाद में इसके भू-भाग को अलग कर देवकुंड, उपहारा और बंदेया थाना स्थापित किए गए।

    इस तरह गोह थाना क्षेत्र का प्रशासनिक विस्तार समय के साथ कम होता गया, लेकिन ऐतिहासिक महत्व आज भी बरकरार है।

    111 साल पुराने भवन को संरक्षित करने की उठी मांग

    स्थानीय समाजसेवी प्रेमचंद तिवारी, डॉ. अशोक कुमार, विंदेश्वरी शर्मा और वंशी प्रसाद गुप्ता ने कहा कि 111 वर्ष पुराने इस ऐतिहासिक भवन की स्थिति काफी जर्जर हो चुकी है।

    सरकार को इसके ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि भवन को संरक्षित करने के साथ-साथ पुलिसकर्मियों और आम लोगों की सुविधा के लिए आधुनिक थाना भवन का निर्माण कराया जाए।

    इससे इतिहास की स्मृतियां भी सुरक्षित रहेंगी और पुलिसकर्मियों को बेहतर कार्य वातावरण भी मिल सकेगा।