यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 21, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Lok Sabha Election 2024: वर्ष 2014 में कई दलों के प्रत्याशियों से अधिक नोटा में पड़ा वोट, ये 5 प्रत्याशी रह गए थे पीछे
Bihar Political News Hindi सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद चुनाव आयोग ने साल 2014 के लोकसभा चुनाव से वोटर्स को नोटा का विकल्प दिया है जिसके माध्यम ...और पढ़ें

HighLights
- 2019 के चुनाव में नोटा के वोट से पीछे रहे थे पांच प्रत्याशी
- 16वीं से 17 वीं लोकसभा चुनाव में बढ़ी नोटा वोटरों की संख्या
- प्रत्याशियों से नाराजगी उनकी जीत की बिगाड़ सकती है खेल
मनीष कुमार, औरंगाबाद। Bihar Politics: सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद चुनाव आयोग ने वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव से मतदाताओं को नोटा का विकल्प दिया है जिसके माध्यम से कोई भी मतदाता किसी प्रत्याशी को वोट नहीं देकर नोटा का बटन दबाते हैं। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में औरंगाबाद लोकसभा क्षेत्र के 17,454 मतदाताओं ने नोटा बटन दबाया था।
भाजपा, कांग्रेस, जदयू और बसपा को मिले वोट के बाद नोटा में पड़े वोट अधिक था। प्राप्त मत का प्रतिशत देखें तो भाजपा को 20.5, कांग्रेस को 15.75, जदयू को 8.86, बसपा को 1.81 और नोटा में 1.14 प्रतिशत वोट मिला था। सपा को 0.22 और शोसित समाज दल को 0.3 प्रतिशत मत मिला था।
नोटा को मिले वोट से कम वोट समाजवादी पार्टी, बहुजन मुक्ति पार्टी, आम आदमी पार्टी, सोशित समाज दल के प्रत्याशी के अलावा पांच निर्दलीय प्रत्याशियों को मिला था। इस चुनाव के बाद वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में इस संसदीय क्षेत्र के मतदाताओं की नाराजगी बढ़ी और 22,424 मतदाताओं ने नोटा का प्रयोग किया यानी 2.4 प्रतिशत वोट नोटा में पड़े।
नोटा को मिले मत से अधिक चार दलों जिसमें भाजपा, महागठबंधन समर्थित हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्यूलर), बसपा और कांग्रेस को मिला था जबकि स्वराज पार्टी लोकतांत्रिक, पिपुल्स पार्टी आफ इंडिया डेमोक्रेटिक, अखिल हिंद फार्वड ब्लाक क्रांतिकारी के अलावा दो निर्दलीय प्रत्याशी को नोटा में पड़े वोट से कम मत मिले थे। भाजपा को 45.72, हम को 38.18, बसपा को 3.61 प्रतिशत मत प्राप्त हुए थे।
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दोनों लोकसभा चुनाव में नोटा का बटन दबाने वाले शहर के क्षत्रीय नगर निवासी रामप्रसाद सिंह ने कहा कि चुनाव आयोग ने विभिन्न राजनीतिक दलों और उनके प्रत्याशियों को वोट नहीं देने के फैसले के बाद नोटा का विकल्प दिया है। इससे मतदाता अपने मत का प्रयोग करते हैं। नोटा में बटन दबाने वाले मतदाताओं की संख्या वर्ष 2014 के चुनाव के बाद वर्ष 2019 में बढ़ा है। प्रत्याशियों के प्रति वोटरों की नाराजगी उनकी जीत का समीकरण का खेल बिगाड़ सकता है।