रक्षाबंधन 2026: जेल में भाइयों को देख बहनों की आंखों में छलके आंसू, सलाखों के पीछे भी अटूट दिखा प्यार
औरंगाबाद मंडल कारा में रक्षाबंधन पर बहनों ने अपने बंदी भाइयों को राखी बांधी, जिससे दोनों की आंखों में आंसू ...और पढ़ें

जेल में भाइयों को देख बहनों की आंखों में छलके आंसू, सलाखों के पीछे भी अटूट दिखा प्यार
HighLights
औरंगाबाद जेल में बहनों ने भाइयों को बांधी राखी।
रक्षाबंधन पर भाई-बहन की आंखों में छलक आए आंसू।
जेल प्रशासन ने 350 से अधिक बंदियों के लिए की व्यवस्था।
जागरण संवाददाता, औरंगाबाद। मंडल कारा में रक्षाबंधन के मौके पर शुक्रवार को अपने बंदी भाई को राखी बांधने पहुंची बहनों की आंखों में आंसू छलक गई। जैसे ही बहनों के सामने भाई पहुंचे दोनों के आंखों में आंसू छलक पड़े। जेल में बंद भाइयों की कलाई पर राखी बांधने के लिए बड़ी संख्या में बहनें मंडल कारा पहुंचीं थी।
बहनों ने भाइयों के माथे पर तिलक लगाया, राखी बांधी, मिठाई खिलाई और आरती उतारी। भाइयों ने भी अपने पास मौजूद नगदी बहनों को देकर स्नेह जताया। भाई और बहन के रिश्ते को मजबूत किया। करीब 350 से अधिक बंदियों की बहनों ने अपने भाइयों को राखी बांध रक्षाबंधन का पर्व मनाया।
बहनों ने भाइयों के शीघ्र जेल से बाहर आने और उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना की। जेल से बाहर निकली सविता कुमारी और रीमा कुमारी ने बताया कि उनका एकमात्र भाई जेल में बंद है। रक्षाबंधन साल में एक बार आता है। ऐसे में उन्हें यह एहसास नहीं होने देना चाहती थीं कि जेल में रहने के कारण बहन राखी बांधने नहीं आई।
इसी भाव के साथ दोनों बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधने पहुंचीं। हालांकि, दोनों अपने घर का नाम नहीं बता सकी।
इसी क्रम में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की ओर से बीके सविता देवी और बीके सुमन बहन ने मंडल कारा पहुंचकर बंदियों को राखी बांधी। उन्होंने तिलक एवं आरती कराई और टोली प्रसाद खिलाकर बंदियों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में भाई दिनेश कुमार, सुनील कुमार एवं महेश कुमार भी मौजूद रहे।
जेल अधीक्षक डॉ. दीपक कुमार ने कहा कि रक्षाबंधन को लेकर जेल प्रशासन के द्वारा बंदियों को राखी बांधने के लिए बेहतर व्यवस्था की गई थी। कहा कि रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम का पर्व नहीं, बल्कि विश्वास, सुरक्षा, अपनत्व और मानवीय संवेदना का प्रतीक है। ऐसे आयोजन बंदियों को परिवार और समाज से भावनात्मक रूप से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इससे उनके भीतर सकारात्मक सोच और सुधार की भावना विकसित होती है। सहायक जेल अधीक्षक संजीव कुमार, उच्च कक्षपाल मनोज दुबे, कक्षपाल मो. सोनू आलम, रोशन कुमार समेत अन्य कर्मियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
