Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    मौसम विभाग का रेड अलर्ट भी बेअसर: औरंगाबाद में नदियां सूखी और खेत प्यासे, धान की रोपनी ठप

    Updated: Mon, 20 Jul 2026 03:09 PM (GMT+05:30)

    औरंगाबाद में मौसम विभाग के रेड अलर्ट के बावजूद नदियाँ सूखी हैं और खेत प्यासे हैं, जिससे धान की रोपनी ठप पड़ी है। अवैध अतिक्रमण और खनन के कारण नदियों क ...और पढ़ें

    औरंगाबाद में नदियां सूखी और खेत प्यासे

    औरंगाबाद में नदियां सूखी और खेत प्यासे

    HighLights

    1. मौसम विभाग के रेड अलर्ट के बावजूद औरंगाबाद में सूखा।

    2. नदियाँ सूखी, खेत प्यासे, धान की रोपनी रुकी।

    3. भूजल स्तर गिरा, जल संकट गहराया, किसान चिंतित।

    ओम प्रकाश शर्मा, अंबा (औरंगाबाद)। मौसम विभाग द्वारा औरंगाबाद जिले को तीन दिनों के लिए रेड जोन में रखे जाने और भारी से अत्यधिक भारी वर्षा की चेतावनी के बावजूद जिले की प्रमुख नदियों और खेतों की तस्वीर अब भी बदली नहीं है। 

    19 जुलाई को कहीं हल्की तो कहीं कुछ घंटों की तेज बारिश जरूर हुई, लेकिन इसका असर नदियों के जलस्तर या खेतों में दिखाई नहीं दिया। वर्षा ऋतु का लगभग एक माह बीत जाने के बाद भी धान की रोपनी शुरू नहीं होने से किसानों की चिंता लगातार बढ़ रही है।

    किसानों की उम्मीदें आसमान की ओर टिकी 

    मौसम विभाग की चेतावनी के बाद जिला प्रशासन ने आपदा प्रबंधन को लेकर प्रखंड और अंचल स्तर तक सतर्कता बढ़ा दी है। प्रशासन संभावित बाढ़ जैसी स्थिति से निपटने की तैयारी में जुटा है, लेकिन दूसरी ओर ग्रामीण इलाकों में पर्याप्त वर्षा नहीं होने से खेत अब भी पानी की प्रतीक्षा कर रहे हैं। कभी आषाढ़ के महीने में पानी से लबालब रहने वाले खेत इस बार सूने पड़े हैं और किसानों की उम्मीदें आसमान की ओर टिकी हैं।

    बतरे और बटाने नदी का सूना आंचल

    कुटुंबा प्रखंड से गुजरने वाली बतरे और बटाने नदियां वर्षा ऋतु के बावजूद लगभग जलहीन बनी हुई हैं। जिन नदियों में इस मौसम में तेज बहाव और चारों ओर प्राकृतिक उल्लास दिखाई देता था, वहां अब सूखी धारा और वीरानी का दृश्य है। 

    खबरें और भी

    स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले दो दशकों में इन नदियों का स्वरूप लगातार सिकुड़ता गया है और अब वर्षा के मौसम में भी इनमें पर्याप्त जल नहीं पहुंच रहा है।

    अवैध कब्जा, खनन और प्रदूषण से बढ़ा संकट

    नदियों के अस्तित्व पर अवैध अतिक्रमण, गंदे नालों के बहाव और बालू के अवैध खनन का भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। पर्यावरण प्रेमियों का मानना है कि प्राकृतिक जलधाराओं के संरक्षण की अनदेखी का परिणाम अब सामने आने लगा है। कभी सालभर जल प्रवाहित रहने वाली नदियां अब बरसात में भी सूखी नजर आ रही हैं, जो भविष्य के लिए गंभीर संकेत है।

    भूजल स्तर गिरने से गहराया जल संकट

    नदियों में पानी नहीं रहने का असर भूजल स्तर पर भी पड़ रहा है। कई गांवों में गर्मी के दिनों में पेयजल संकट गहराने लगा है और लोगों को पानी के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नदियों का संरक्षण नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में जल संकट और गंभीर हो सकता है।

    नदी जोड़ परियोजना पर फिर तेज हुई चर्चा

    बढ़ते जल संकट और कृषि पर पड़ रहे असर को देखते हुए क्षेत्र के लोग नदी जोड़ परियोजना को समय की जरूरत बता रहे हैं। उनका मानना है कि विभिन्न नदी तंत्रों को आपस में जोड़कर जल का संतुलित वितरण सुनिश्चित किया जाए तो जल संकट से राहत मिलने के साथ कृषि उत्पादन को भी नई गति मिल सकती है। स्थानीय लोगों ने सरकार से नदियों के संरक्षण और दीर्घकालिक जल प्रबंधन की दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग की है।