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सावन के बाद भादो में भी इंद्रदेव की बेरुखी, बांका में सूखी पड़ीं गंगटी और बदुआ नदियां; 11 हजार हेक्टेयर धान पर संकट

Updated: Tue, 01 Sep 2026 10:03 AM (IST)

Banka Drought Concern: सावन के बाद भादो में भी बारिश न होने से बांका के किसान चिंतित हैं। गंगटी और ...और पढ़ें

Banka Drought Concern: शंभुगंज में भादो मास में भी सूखी पड़ी गंगटी नदी का पाट और पुल के नीचे पानी के बहाव को देखते चिंतित किसान

Banka Drought Concern: शंभुगंज में भादो मास में भी सूखी पड़ी गंगटी नदी का पाट और पुल के नीचे पानी के बहाव को देखते चिंतित किसान

HighLights

  1. सावन-भादो में बारिश न होने से किसान चिंतित।

  2. गंगटी और बदुआ नदियां सूखने से सिंचाई संकट।

  3. बांका में 11 हजार हेक्टेयर धान की फसल खतरे में।

संवाद सहयोगी, शंभुगंज (बांका)। Banka Drought Concern:सावन का महीना छिटपुट फुहारों के बीच बीतने के बाद अब भादो मास में भी मौसम की बेरुखी से अन्नदाताओं की चिंताएं गहरा गई हैं। कृषि और लोक परंपरा में सावन-भादो को मूसलाधार बारिश का मुख्य समय माना जाता है, लेकिन इस बार इन दोनों ही महीनों में अपेक्षित मानसूनी बारिश नहीं होने से खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं।

धान की फसल के विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले सिंह नक्षत्र के सूखा बीत जाने से बांका और आसपास के किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा रही हैं। आमतौर पर भादो के महीने में इलाके की प्रमुख नदियां—गंगटी और बदुआ—उफान पर रहती थीं। किंतु इस बार इन नदियों में पानी नहीं के बराबर है। नहरों, आहरों और स्थानीय पईनों की स्थिति भी अत्यंत दयनीय बनी हुई है।

  • भादो में भी सूखी गंगटी और बदुआ की धाराएं: एक दशक में पहली बार दिखा ऐसा मंजर, सिंह नक्षत्र सूखा बीतने से बांका के किसान बेहाल
  • सावन के बाद भादो मास में भी बारिश की भारी कमी; बांका के शंभुगंज में जीवनदायिनी गंगटी और बदुआ नदियां सूखीं

  • धान की फसल के लिए सबसे महत्वपूर्ण सिंह नक्षत्र सूखा बीता; खेतों से नमी गायब, सिंचाई संकट से किसान परेशान

  • गंगटी नदी के सूखे होने से बांका के कैथा, सगुनी के साथ भागलपुर के बड़हड़ा व देशावर की हजारों एकड़ भूमि पर असर

  • प्रखंड में 11 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है शत-प्रतिशत धान की रोपनी; बीएओ संकेत तिवारी बोले— बारिश न होने से बढ़ी चिंता

  • गंगटी और बदुआ से सिंचित होती है हजारों एकड़ उपजाऊ जमीन

    गंगटी और बदुआ नदियां बांका और सीमावर्ती भागलपुर जिले के किसानों के लिए जीवनदायिनी मानी जाती हैं। गंगटी नदी के पानी से शंभुगंज के बिरनौधा, कैथा, सगुनी सहित भागलपुर जिले के बड़हड़ा, देशावर समेत दर्जनों गांवों की हजारों एकड़ कृषि भूमि सिंचित होती रही है। वर्तमान में स्थिति यह है कि दोनों नदियों पर बने पुलों के मात्र एक मुहाने (स्पैन) से ही नाममात्र का पानी रिस रहा है, जबकि बाकी का नदी तल पूरी तरह सूखा और वीरान नजर आ रहा है।

    एक दशक में पहली बार दिखा भादो में नदी सूखने का मंजर

    स्थानीय बुजुर्ग किसानों का कहना है कि भादो के महीने में नदियों और नालों का इस कदर सूख जाना पिछले एक दशक में पहली बार देखने को मिल रहा है। बारिश के अभाव में खेतों से नमी तेजी से गायब हो रही है। यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई या सिंचाई के वैकल्पिक साधन नहीं मिले, तो धान के पौधों का विकास पूरी तरह ठप हो जाएगा। किसान अब केवल आसमान की ओर टकटकी लगाए बादलों के बरसने की उम्मीद कर रहे हैं।

    11 हजार हेक्टेयर में रोपनी पूरी, अब बारिश का इंतजार: बीएओ

    प्रखंड कृषि पदाधिकारी (BAO) संकेत तिवारी ने बताया कि कम बारिश के कारण किसानों को खेतों में नमी बनाए रखने में भारी कठिनाई हो रही है। उन्होंने जानकारी दी कि इस खरीफ मौसम में शंभुगंज प्रखंड अंतर्गत कुल 11 हजार हेक्टेयर भूमि में धान की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। किसानों के अथक प्रयास से शत-प्रतिशत रकबे में धान की रोपनी का कार्य तो संपन्न हो चुका है, लेकिन फसल को तैयार करने के लिए अब पर्याप्त पानी और वर्षा की सख्त आवश्यकता है।