Bihar Machli Palan: बिहार के बांका जिले में मत्स्य बीज उत्पादन को मिलेगी गति, जल्द निकलेगा टेंडर
बांका जिला मछली उत्पादन में आत्मनिर्भर है, लेकिन मत्स्य बीज के लिए बाहरी राज्यों पर निर्भरता है। इस समस्या के समाधान हेतु मत्स्य विभाग ने चांदन और रजौ ...और पढ़ें

बिहार के बांका जिले में मत्स्य बीज उत्पादन को मिलेगी गति, जल्द निकलेगा टेंडर (AI Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
संवाद सूत्र, बांका। जिला मछली उत्पादन में आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन मत्स्य बीज के लिए अब भी किसानों को दूसरे राज्यों, खासकर कोलकाता पर निर्भर रहना पड़ता है। इस समस्या के समाधान के लिए मत्स्य विभाग ने चांदन के बधुआ और रजौन थाना के पास स्थित दो सरकारी मत्स्य बीज प्रक्षेत्रों को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड पर विकसित करने का निर्णय लिया है।
दोनों प्रक्षेत्र करीब पांच-पांच एकड़ में फैले हैं, लेकिन वर्षों से निष्क्रिय पड़े हैं। यहां न तो मछली पालन हो रहा है और न ही बीज उत्पादन।
संसाधनों और आधुनिक सुविधाओं के अभाव को देखते हुए विभाग अब निजी कंपनियों या फार्मा प्रोड्यूसर कंपनी को इनके संचालन की जिम्मेदारी सौंपेगा। निजी निवेश से यहां आधुनिक हैचरी, नर्सरी तालाब और अन्य जरूरी ढांचा विकसित किया जाएगा।
इस पहल से स्थानीय मछली पालकों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज आसानी से और कम लागत में उपलब्ध हो सकेंगे। साथ ही परिवहन के दौरान होने वाले नुकसान में भी कमी आएगी।
इसके अलावा प्रक्षेत्रों के आधुनिकीकरण से युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। विभाग जल्द ही इसके लिए निविदा प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है और चयनित एजेंसी को निश्चित अवधि के लिए लीज पर प्रक्षेत्र सौंपा जाएगा।
आधे दर्जन के करीब हैं हैचरी
जिला में मत्स्य विभाग की ओर से बीज उत्पादन के लिए अनुदान दिया जा रहा है। करीब आधे दर्जन किसानों ने निजी स्तर पर हैचरी स्थापित की है, लेकिन उत्पादन अभी सीमित है। जिले में रोहू, कतला, पंगेशियस समेत अन्य मछलियों का बड़े पैमाने पर पालन हो रहा है। विभाग अब तिलापिया पालन को भी बढ़ावा दे रहा है।
हर साल 17 हजार टन मछली उत्पादन
बांका जिला मछली उत्पादन में आत्मनिर्भर हो चुका है। यहां प्रतिवर्ष करीब 17 हजार टन मछली का उत्पादन होता है। इसमें रोहू, कतला और पंगेशियस प्रमुख हैं। रजौन प्रखंड में सबसे अधिक नए तालाब बनाए जा रहे हैं। जिले में 845 सरकारी और पांच हजार से अधिक निजी तालाब हैं, जिससे मछली पालन युवाओं के लिए स्वरोजगार का मजबूत माध्यम बनता जा रहा है।
खबरें और भी
जिला के दो बीज प्रक्षेत्र को पीपीपी मोड पर विकसित करने की योजना है। इसके लिए पहल शुरू कर दी गई है। इसके लिए जल्द ही टेंडर निकाला जाएगा। टेंडर में ज्यादा बोली लगाने वाले को दोनों बीज प्रक्षेत्र दिया जाएगा। - मनोज कुमार, जिला मत्स्य पदाधिकारी, बांका