घर लौटे अब्बा तो सामने आई सच्चाई; दफनाए गए थे रामकृष्ण मोहली, बिहार में हैरान करने वाला मामला
बांका में एक परिवार ने अपने लापता सदस्य को मृत मानकर दफना दिया, लेकिन कुछ ही घंटों बाद वह व्यक्ति सकुशल घर लौट आया। इसके बाद प्रशासन को कब्र से शव निक ...और पढ़ें

बांका में हैरान करने वाला मामला: कब्र में दफनाने के बाद घर लौट आया ‘मृत’ व्यक्ति, फिर हुई खुदाई
HighLights
लापता समीर अंसारी को मृत मानकर दफनाया गया।
दफनाने के कुछ घंटे बाद समीर घर लौटे।
कब्र से शव निकालकर असली पहचान की गई।
संवाद सूत्र, धोरैया (बांका)। बांका जिले के धोरैया और रजौन क्षेत्र में बुधवार को एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। परिवार ने जिस व्यक्ति को अपना लापता सदस्य समझकर मृत मान लिया और कब्रिस्तान में दफना दिया, वह कुछ ही घंटों बाद सकुशल घर लौट आया। इसके बाद प्रशासन को कब्र से शव निकलवाकर वास्तविक स्वजन को सौंपना पड़ा।
घटना की चर्चा पूरे क्षेत्र में होती रही। लोगों के बीच यह मामला कौतूहल और आश्चर्य का विषय बना रहा। एक ओर परिवार अपने सदस्य को मृत मानकर शोक में डूबा था, वहीं दूसरी ओर उसके अचानक घर लौट आने से सभी स्तब्ध रह गए।
पुनसिया बाजार में मिला था अज्ञात शव
मामले की शुरुआत सोमवार को हुई थी। जानकारी के अनुसार पुनसिया बाजार स्थित एक किराना दुकान के समीप एक अज्ञात वृद्ध का शव मिला था। स्थानीय लोगों की सूचना पर रजौन थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पहचान का प्रयास शुरू किया।
काफी कोशिशों के बावजूद मृतक की पहचान नहीं हो सकी। इसके बाद पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पोस्टमार्टम के बाद शव की तस्वीर और विवरण विभिन्न मोबाइल ग्रुपों तथा अन्य माध्यमों से साझा किए गए, ताकि मृतक की पहचान हो सके।
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तस्वीर देखकर बेटे ने की पहचान
पुलिस द्वारा साझा की गई तस्वीर देखने के बाद धोरैया थाना क्षेत्र के भगवानपुर गांव निवासी मोजाहिद अंसारी को लगा कि यह शव उनके पिता समीर अंसारी का है। समीर अंसारी पिछले कई महीनों से घर से लापता बताए जा रहे थे।
तस्वीर देखने के बाद परिवार को विश्वास हो गया कि बरामद शव उनके लापता पिता का ही है। इसके बाद परिवार में शोक की लहर दौड़ गई। स्वजन बांका पहुंचे और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद शव को अपने साथ ले गए। मंगलवार को शव को कुरमा कब्रिस्तान में धार्मिक रीति-रिवाज के अनुसार दफना दिया गया। परिवार और ग्रामीणों ने अंतिम विदाई भी दी।
कुछ घंटे बाद घर लौट आए समीर अंसारी
कहानी में सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब दफनाने के कुछ ही घंटे बाद समीर अंसारी स्वयं अपने घर लौट आए। उन्हें सामने देखकर परिवार के लोग स्तब्ध रह गए। पहले तो किसी को विश्वास ही नहीं हुआ कि जिन्हें मृत मानकर दफना दिया गया था, वे वास्तव में जीवित हैं।
परिवार के सदस्य खुशी और हैरानी दोनों भावनाओं से भर गए। कुछ ही देर में पूरे गांव में यह खबर फैल गई और लोगों की भीड़ घर के बाहर जुटने लगी। हर कोई इस अप्रत्याशित घटना की चर्चा करने लगा।
इसके बाद परिजनों को एहसास हुआ कि जिस शव को उन्होंने समीर अंसारी समझकर दफनाया था, वह किसी अन्य व्यक्ति का था।
पुलिस को दी गई सूचना
घटना की जानकारी मिलते ही परिवार ने तत्काल पुलिस को सूचना दी। परिजनों ने बताया कि दफनाया गया शव उनके पिता का नहीं है, क्योंकि समीर अंसारी सकुशल घर लौट आए हैं।
सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मामले की दोबारा जांच शुरू की। इस दौरान शव की पहचान को लेकर नए सिरे से पड़ताल की गई। पुलिस ने अन्य जिलों में भी संपर्क किया और मृतक की वास्तविक पहचान सुनिश्चित करने का प्रयास किया।
भागलपुर के व्यक्ति के रूप में हुई पहचान
जांच के दौरान पता चला कि अज्ञात शव भागलपुर जिले के सन्हौला थाना क्षेत्र के गोविंदपुर महियामा गांव निवासी रामकृष्ण मोहली (60) का था। पहचान होने के बाद उनके स्वजन को इसकी सूचना दी गई।
मृतक के परिजनों ने पुलिस को बताया कि रामकृष्ण मोहली सोमवार को अपने एक रिश्तेदार के यहां रतनपुर जाने के लिए घर से निकले थे। इसी दौरान उनकी मृत्यु हो गई और पहचान नहीं होने के कारण शव अज्ञात के रूप में दर्ज कर लिया गया। पहचान होने के बाद रामकृष्ण मोहली के स्वजन बुधवार को बांका पहुंचे और शव को अपने सुपुर्द लेने की प्रक्रिया पूरी की।
कब्र से निकाला गया शव
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया अपनाई। रजौन थाना पुलिस ने धोरैया पुलिस के सहयोग से कुरमा कब्रिस्तान में दफन शव को कब्र से निकलवाया।
प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय लोगों की मौजूदगी में पूरी प्रक्रिया संपन्न कराई गई। इसके बाद शव को विधिवत रूप से रामकृष्ण मोहली के स्वजन को सौंप दिया गया, ताकि उनका अंतिम संस्कार परिवार की परंपरा के अनुसार किया जा सके।
पहचान में जल्दबाजी बनी भ्रम की वजह
स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से लापता रहने के कारण समीर अंसारी के परिवार ने तस्वीर देखकर जल्दबाजी में शव की पहचान कर ली। चेहरे की समानता के कारण यह भ्रम और गहरा हो गया।
पुलिस अधिकारियों का भी मानना है कि अज्ञात शवों की पहचान करते समय पर्याप्त सावधानी बरतना आवश्यक है। कई बार तस्वीरों के आधार पर की गई पहचान भ्रम की स्थिति पैदा कर सकती है।
फिलहाल समीर अंसारी के सकुशल लौट आने से उनका परिवार राहत महसूस कर रहा है, जबकि मृतक रामकृष्ण मोहली के स्वजन अपने परिजन के अंतिम संस्कार की तैयारी में जुट गए हैं। यह पूरा घटनाक्रम क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग इसे किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं मान रहे हैं।