बांका में पंचायत चुनाव की सरगर्मी तेज, आरक्षण रोस्टर पर टिकीं निगाहें; कब होंगे इलेक्शन?
बांका में पंचायत चुनाव की सरगर्मियां तेज हो गई हैं, जहां संभावित उम्मीदवार और वर्तमान जनप्रतिनिधि आरक्षण रोस्टर जारी होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे ...और पढ़ें

बांका में पंचायत चुनाव की सरगर्मी तेज, आरक्षण रोस्टर पर टिकीं निगाहें

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
संवाद सूत्र, बांका। पंचायत चुनाव का समय नजदीक आते ही ग्रामीण इलाकों में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई हैं। चौक-चौराहों से लेकर गांवों की चौपाल और सोशल मीडिया तक चुनावी चर्चाओं का माहौल गर्म है। संभावित आरक्षण सूची और सीटों के रोस्टर को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
हालांकि, जिला प्रशासन और राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से अभी तक आधिकारिक आरक्षण सूची जारी नहीं की गई है। ऐसे में संभावित प्रत्याशियों और वर्तमान जनप्रतिनिधियों की निगाहें आयोग के अगले फैसले पर टिकी हैं।
दरअसल, मौजूदा पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल दिसंबर में समाप्त हो रहा है। ऐसे में सितंबर के अंतिम सप्ताह से अक्टूबर के पहले सप्ताह के बीच त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराए जाने की संभावना जताई जा रही है।
चुनावी तैयारियों के बीच संभावित उम्मीदवारों ने जनसंपर्क अभियान भी तेज कर दिया है। गांव-गांव बैठकों का दौर शुरू हो गया है और समर्थकों के साथ रणनीति बनाई जा रही है।
ग्रामीण राजनीति अब केवल चौपाल तक सीमित नहीं रह गई है। फेसबुक, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भी चुनाव प्रचार का अहम माध्यम बन गए हैं। संभावित उम्मीदवार विकास के दावे और जनहित के वादों के साथ अपने संदेश मतदाताओं तक पहुंचाने में जुटे हैं।
संभावित उम्मीदवारों की दो सीटों पर नजर
आरक्षण रोस्टर के जारी नहीं होने से संभावित उम्मीदवार अभी दो सीटों पर नजर बनाए हुए हैं। रजौन के मुकेश सिंह, खुद को जिला परिषद सदस्य का दावेदार बता रहे हैं। पिछली बार वे रजौन उत्तरी से मैदान में थे, लेकिन इस बार आरक्षण रोस्टर में बदलाव की संभावनाओं को देखते हुए खुद को रजौन मध्य से भी दावेदारी बता रहे हैं।
इसी तरह करमा पंचायत से सुमन सिंह सामान्य सीट होने पर मुखिया की दावेदारी कर रहे हैं। इसके अलावा, कई मुखिया और पंचायत समिति सदस्य भी आरक्षण रोस्टर में बदलाव के कारण या तो क्षेत्र बदलने की तैयारी में हैं या फिर परिवार के किसी दूसरे सदस्य को चुनावी मैदान में उतारने की फिराक में हैं।
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प्रखंड कार्यालय का भी लगा रहे चक्कर
आरक्षण रोस्टर में बदलाव को लेकर तरह-तरह के चर्चे चल रहे हैं। ऐसे में वार्ड सदस्य, पंच, मुखिया, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य पद के संभावित उम्मीदवार इन दिनों प्रखंड मुख्यालय से लेकर जिला मुख्यालय तक का लगातार चक्कर लगा रहे हैं।
सभी यह जानना चाहते हैं कि इस बार उनकी पंचायत या वार्ड किस वर्ग के लिए आरक्षित होगा। जिले की 182 पंचायतों के लिए नए आरक्षण रोस्टर की संभावना ने कई वर्तमान जनप्रतिनिधियों की चिंता बढ़ा दी है।
इस बार आरक्षण निर्धारण के लिए वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाया गया है। इसी आधार पर आरक्षण रोस्टर और अन्य चुनावी प्रपत्र तैयार किए जा रहे हैं।
आरक्षण रोस्टर को लेकर अब तक विभाग से कोई निर्देश नहीं मिला है। अभी तक केवल मतदाता सूची के प्रारूप-1 का प्रकाशन किया गया है। - रवि प्रकाश गौतम, जिला पंचायती राज पदाधिकारी।