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    बांका में सरकारी शीशम की लकड़ियों की बर्बादी: लाखों का नुकसान, जिम्मेदार कौन?

    Updated: Tue, 09 Jun 2026 02:21 PM (IST)

    बांका के धोरैया प्रखंड परिसर में वर्षों से पड़ी सरकारी शीशम की लाखों रुपये की लकड़ियां मूल्यांकन और नीलामी के अभाव में सड़ रही हैं। बारिश और दीमक लगने ...और पढ़ें

    बांका में सरकारी शीशम की लकड़ियों की बर्बादी: लाखों का नुकसान, जिम्मेदार कौन?

    बांका में सरकारी शीशम की लकड़ियों की बर्बादी: लाखों का नुकसान, जिम्मेदार कौन?

    HighLights

    1. धोरैया में सरकारी शीशम की लकड़ियां मूल्यांकन के अभाव में सड़ रही हैं।

    2. लाखों रुपये मूल्य की कीमती सरकारी संपत्ति बर्बाद हो रही है।

    3. बारिश और दीमक से लकड़ियों को भारी नुकसान हो रहा है।

    संवाद सूत्र, धोरैया (बांका)। प्रखंड मुख्यालय परिसर में वर्षों से पड़ी सरकारी शीशम की कीमती लकड़ियां विभागीय उदासीनता के कारण बर्बाद हो रही हैं। सूखे और जर्जर हो चुके पेड़ों की कटाई के बाद लकड़ियों को यत्र-तत्र छोड़ दिया गया है।

    बारिश में भीगने और लंबे समय तक खुले में पड़े रहने से इनमें दीमक लग गई है, जिससे लाखों रुपये मूल्य की सरकारी संपत्ति धीरे-धीरे नष्ट हो रही है।

    जानकारी के अनुसार, प्रखंड परिसर में स्थित कई विशाल शीशम के पेड़ सूख चुके थे। आंधी-तूफान के दौरान इनके गिरने से जनहानि की आशंका को देखते हुए दैनिक जागरण में खबर प्रकाशित होने के बाद जिला प्रशासन ने संज्ञान लिया था।

    इसके बाद पिछले पांच वर्षों में दो दर्जन से अधिक पेड़ों की कटाई कराई गई। हालांकि कटे हुए पेड़ों की लकड़ियों का अब तक न तो समुचित संरक्षण किया गया और न ही उनकी नीलामी हो सकी।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि कटाई के बाद कई मोटे और मूल्यवान लकड़ी के टुकड़े भी अब परिसर में दिखाई नहीं देते, जिससे चोरी की आशंका भी जताई जा रही है।

    दो वर्ष पूर्व प्रखंड कार्यालय के निरीक्षण के दौरान तत्कालीन जिलाधिकारी अंशुल कुमार ने लकड़ियों को खराब होते देख नीलामी कराने का निर्देश दिया था, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हो सकी।

    अंचलाधिकारी श्रीनिवास कुमार सिंह ने बताया कि लकड़ियों के मूल्यांकन के लिए वन विभाग बौंसी को पत्र भेजा गया है। मूल्यांकन रिपोर्ट प्राप्त नहीं होने के कारण नीलामी प्रक्रिया शुरू नहीं हो पा रही है।

    इधर, परिसर में पड़ी लकड़ियां लगातार बारिश और दीमक की मार झेल रही हैं, जिससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ती जा रही है।