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    बिहार में दारोगाओं की लग रही क्लास, SP के ऑर्डर पर लिख रहे डायरी; 60 इंस्पेक्टरों की सैलरी बंद

    Updated: Wed, 13 May 2026 10:00 PM (IST)

    बांका एसपी उपेंद्रनाथ वर्मा ने लंबित मामलों के निष्पादन में लापरवाही बरतने वाले दारोगाओं पर सख्त कार्रवाई की है। करीब साठ आईओ का वेतन रोका गया है और अ ...और पढ़ें

    बिहार में दारोगाओं की लग रही क्लास, SP के ऑर्डर पर लिख रहे डायरी

    बिहार में दारोगाओं की लग रही क्लास, SP के ऑर्डर पर लिख रहे डायरी

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    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    बिजेन्द्र कुमार राजबंधु, बांका। लंबित कांडों के निष्पादन में लापरवाही बरतने वाले दारोगाओं पर अब एसपी उपेन्द्रनाथ वर्मा ने सख्त रुख अपना लिया है।

    मामलों की जांच में शिथिलता और समय पर केस डायरी जमा नहीं करने वाले करीब पांच दर्जन आईओ का अबतक वेतन रोकने के साथ उन्हें शोकॉज भी किया गया है। इसके बाद भी आदत में सुधार नहीं होने पर पुलिस इंसपेक्टरों की निगरानी में डायरी लिखवाया जा रहा है।

    जानकारी के अनुसार, अब लंबित कांडों की डायरी समय पर लिखवाने और अनुसंधान में तेजी लाने के लिए जिला मुख्यालय स्थित पुलिस केंद्र में विशेष व्यवस्था की गई है। यहां प्रतिदिन शिथिल दारोगाओं को बुलाकर डायरी लेखन कराया जा रहा है।

    हर सर्किल से दो-दो पुलिस इंस्पेक्टरों को गुरुजी की भूमिका में लगाया गया है। ये अनुसंधानकर्ताओं को केस डायरी तैयार करने में मार्गदर्शन दे रहे हैं।

    सूत्रों की मानें तो नई सरकार गठन के बाद पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। एसपी ने साफ निर्देश दिया है कि लंबित मामलों के निष्पादन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    समय पर डायरी जमा नहीं होने से न्यायालय में अभियोजन कमजोर पड़ जाता है और कई बार अभियुक्तों को राहत मिल जाती है। इसी को देखते हुए अब पुलिस विभाग ने लंबित मामलों को तेजी से निपटाने की रणनीति बनाई है।

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    अपराधियों को सजा दिलाने को लेकर एसपी सख्त

    जिला के 24 थानों में प्रतिदिन दर्जनों नए मामले दर्ज हो रहे हैं। फिलहाल जिला में 1500 से अधिक कांड लंबित बताए जा रहे हैं। लंबित मामलों की संख्या कम करने के लिए पुलिस प्रशासन लगातार अभियान चला रहा है। पिछले महीने ही करीब 800 से अधिक मामलों का निष्पादन किया गया है।

    एसपी उपेन्द्रनाथ वर्मा ने बताया कि अनुसंधान में तेजी लाने, समय पर डायरी जमा कराने और अपराधियों को सजा दिलाने के उद्देश्य से यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि सभी अनुसंधानकर्ताओं को जिम्मेदारी के साथ कार्य करने का निर्देश दिया गया है। समय सीमा के अंदर डायरी जमा नहीं करने वालों पर आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।

    समय पर डायरी नहीं देने से ये होगा नुकसान

    • अदालत को जांच की प्रगति की सही जानकारी नहीं मिल पाती।
    • अभियुक्त को जमानत मिलने में आसानी हो जाती है।
    • साक्ष्य और गवाह कमजोर पड़ सकते हैं।
    • कोर्ट पुलिस की कार्यशैली पर शोकॉज या फटकार लगा सकता है।
    • लंबे समय तक डायरी लंबित रहने पर केस कमजोर होता है।
    • पीड़ित पक्ष को न्याय मिलने में देरी होती है।

    समय पर केस डायरी न्यायालय में जमा नहीं होने से अभियोजन पक्ष कमजोर पड़ जाता है। कई मामलों में आरोपितों को इसका लाभ मिल जाता है। लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन और अपराधियों को सजा दिलाने के उद्देश्य से सभी अनुसंधानकर्ताओं को समय सीमा के भीतर डायरी जमा करने का निर्देश दिया गया है। इसके लिए पुलिस इंसपेक्टरों की निगरानी में डायरी लिखाया जा रहा है। - उपेन्द्रनाथ वर्मा, एसपी, बांका