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तराजू वाले हाथों में थमाई कलम तो गुरु के नाम कर दिया गांव, अब बांका की खुशबू को मिलेगा राष्ट्रपति से पुरस्कार

Published: Mon, 24 Aug 2026 03:30 PM (IST)

बांका की शिक्षिका खुशबू कुमारी को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार मिलेगा, जिसके साथ उनके गांव राधानगर की शिक्षा क्रांति की कहानी भी चर्चा में है।

खुशबू कुमारी। (फाइल फोटो)

खुशबू कुमारी। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. बांका की खुशबू कुमारी को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार मिलेगा।

  2. शिक्षक राधारमण सिन्हा ने राधानगर गांव को बदला।

  3. गांव अब शिक्षा, प्रोफेसर, इंजीनियरों का गढ़ बन गया।

राहुल कुमार, बांका। राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चुनीं गई बांका की शिक्षिका खुशबू कुमारी अभी खूब चर्चा में हैं। शिक्षक दिवस के दिन वह राष्ट्रपति भवन पहुंच कर पुरस्कार प्राप्त करेंगी।

खुशबू कटोरिया प्रखंड के राधानगर गांव की रहने वाली है। दरअसल, इस गांव की कहानी खुशबू की सफलता से भी बड़ी है।

गांव में अधिकांश वैश्य परिवार के लोग पीढ़ियों से रहते हैं। चार दशक पूर्व तक गांव के अधिकांश लोग अपने परंपरागत व्यापार से परिवार चलाते थे। गांव का पढ़ाई से कोई वास्ता नहीं था।

तराजू वाले हाथों में थमाई कलम

ऐसा कहें कि आठवें दशक तक गांव में मुश्किल से कोई मैट्रिक पास था। इस बीच गांव के सरकारी विद्यालय में एक शिक्षक राधारमण सिन्हा आए। वे चांदन पांडेयडीह के रहने वाले थे। उन्होंने तराजू वाले हाथों में कलम थमा दी।

उनकी मेहनत से गांव में ज्ञान की ऐसी रौशनी जली कि घर-घर में लक्ष्मी के साथ सरस्वती का वास हो गया। नई पीढ़ी के लोगों ने अब तराजू से तौबा कर लिया है।

वे पूरी तरह कलम के पुजारी बन गए हैं। इससे दो-तीन दशक में ही पूरे गांव की तस्वीर बदल गई। मैट्रिक पास करने को तरसे गांव में एक दर्जन से अधिक शिक्षक हो गए हैं।

Khushbu Kumari

विकास कुमार बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं तो डॉ. सुमन कुमार टीएनबी कॉलेज में प्रोफेसर हैं। एक प्रोफेसर एसएम कॉलेज में भी है।

यूपीएससी की इंजीनियरिंग परीक्षा में एक लड़का सफल हुआ है। गांव में दर्जन भर बैंकर्स और इंजीनियर हैं। कुंदन कुमार सेक्सन ऑफिसर हैं तो विकास कुमार लोको पायलट हैं।

ललन कुमार व चंद्रशेखर मंडल गांव के ही विद्यालय में शिक्षक बन गए हैं। जूली, दीपक, चंदन सहित कई युवाओं को लगातार सफलता मिली है। कई लोग पुलिस में भी हैं।

राधा रमण के नाम पर गांव का नाम

ज्ञान की ऐसी रौशनी फैलने पर गांव वालों से अपने गुरुजी राधा रमण सिन्हा को 1978 में राष्ट्रपति पुरस्कार मिलने पर गांव का नामकरण ही उनके नाम पर राधानगर कर दिया।

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मुझे अपने गांव के मध्य विद्यालय में पहली से आठवीं तक पढ़ने का सौभाग्य मिला है। निश्चित रूप से मेरा गांव शिक्षकों के सम्मान का गांव है। अब उस गांव की एक बेटी को भी राष्ट्रपति का शिक्षक सम्मान मिलने जा रहा है। इसे प्राप्त करना हर शिक्षक का सपना होता है। लेकिन, बड़ी बात यह कि उनके स्कूल के शिक्षक को भी यह सम्मान मिल चुका है।

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खुशबू कुमारी, राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए घोषित

पहले उनके गांव का नाम नेहंगा जोर था। राधा बाबू को राष्ट्रपति सम्मान मिलने पर गांव के घर-घर में राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह से पुरस्कार लेते उनकी तस्वीर मढ़वा कर पूजा होने लगी। इसी साल ग्रामीणों ने बैठक कर गांव का नाम राधानगर कर दिया। राधा बाबू संभवत: देश के इकलौते शिक्षक होंगे, जिनके शिक्षक रहते उस विद्यालय का नामकरण उनके नाम से हो गया।

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डॉ. सुमन कुमार, ग्रामीण सह प्रोफेसर टीएनबी कॉलेज भागलपुर

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