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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 10, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Banka News: महंगे खाद से किसान परेशान, कालाबाजारी जारी

Published: Sun, 10 Aug 2025 11:54 AM (IST)

धान की रोपनी के बाद किसानों को खाद की जरूरत है लेकिन उन्हें ऊंची कीमतें चुकानी पड़ रही हैं। एक ...और पढ़ें

धान की रोपनी के बाद किसानों को खाद की जरूरत है, उन्हें ऊंची कीमतें चुकानी पड़ रही हैं। फाइल फोटो
धान की रोपनी के बाद किसानों को खाद की जरूरत है, उन्हें ऊंची कीमतें चुकानी पड़ रही हैं। फाइल फोटो

HighLights

  1. ऊंची कीमत पर खाद खरीदने को मजबूर किसान |
  2. दुकान सील होने पर भी कालाबाजारी जारी |
  3. असली है या नकली, खाद पर संदेह |

जागरण संवाददाता, पंजवारा (बांका)। धान की रोपनी के बाद खेतों में खाद की जरूरत पड़ने पर किसान ऊंची कीमत चुकाने को मजबूर हैं। दुकान सील होने और केस दर्ज होने के बावजूद बाकी विक्रेता बेअसर हैं। इससे किसान सवाल उठा रहे हैं कि ऊंचे दामों पर मिल रहा खाद असली है या नकली? यह सवाल इन दिनों उठ रहा है।

मालूम हो कि इसी सप्ताह विभागीय अधिकारियों ने पंजवारा बाजार स्थित एक खाद, बीज और कीटनाशक विक्रेता के प्रतिष्ठान पर छापेमारी की थी। इस दौरान यहां असली, नकली, अवैध स्टॉक आदि को लेकर चर्चाओं का बाजार अब भी गर्म है।

बावजूद इसके यहां के किसानों की परेशानी कम नहीं हुई है। धान की रोपनी के बाद अब किसान खेतों में खाद छिड़कने को आतुर हैं। सरकार किसानों को सस्ते दर पर खाद उपलब्ध कराने का दावा करती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। यहां किसानों को 266 रुपये में मिलने वाला यूरिया 370 रुपये प्रति बोरी खरीदना पड़ रहा है। डीएपी खुलेआम 1600 रुपये प्रति बोरी बिक रहा है।

छापेमारी के बाद संबंधित दुकानदार पर केस भी दर्ज किया गया है। दुकान को सील कर दिया गया है। बावजूद, अन्य उर्वरक विक्रेताओं पर इसका असर बेअसर है। किसान कालाबाजारी और मुनाफाखोरी की चक्की में पिस रहे हैं।

इसके बाद भी, ऊंचे दाम चुकाने के बाद भी किसानों को यकीन नहीं हो रहा है कि उर्वरक असली है या नकली। जाने-अनजाने में किसान अब भी ठगी का शिकार हो रहे हैं। इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी लोग अपना दर्द बयां कर रहे हैं।

इस संबंध में पूछने पर सहायक निदेशक (रसायन) बांका के कृष्णकांत ने बताया कि पंजवारा बाजार में कालाबाजारी और अन्य तरह की शिकायतों में और भी नाम हैं। उनका भी पता लगाया जा रहा है। छापेमारी की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।