मंदार महोत्सव : 5000 आदिवासियों का हुआ शुद्धिकरण, गुरु माता ने हिंदू धर्म नहीं छोड़ने का दिलाया संकल्प, बोलीं- राम-कृष्ण हैं हमारे आराध्य, सनातन धर्म ही सास्वत
बांका के मंदार पर्वत पर आयोजित अखिल भारतीय सनातन संताल समाज के महाकुंभ में तीन दिनों में 5000 से अधिक लोगों की सनातन धर्म में घर वापसी हुई है। गुरुमात ...और पढ़ें

मंदार पर्वत पर आयोजित अखिल भारतीय सनातन संताल समाज में मौजूद आदिवासी समुदाय के लोग और गुरु।
HighLights
मंदार महाकुंभ में 5000 से अधिक लोगों की घर वापसी।
गुरुमाता रेखा हेंब्रम ने राम-कृष्ण को आराध्य बताया।
पापहरणी सरोवर संताल समाज के लिए मोक्ष का केंद्र।
संवाद सहयोगी, बौंसी (बांका)। मंदार पर्वत पर आयोजित अखिल भारतीय सनातन संताल समाज के प्रथम महाकुंभ में सनातन धर्म में घर वापसी का सिलसिला लगातार जारी है। तीन दिनों के भीतर पांच हजार से अधिक लोगों की सनातन धर्म में वापसी कराई गई है। मंगलवार को भी एक हजार से अधिक लोगों को पापहरणी सरोवर में स्नान कराकर शुद्धिकरण कराया गया। इस दौरान मंदार स्थित पापहरणी सरोवर संताल समाज के लिए मोक्ष का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है।
अखिल भारतीय सनातन संताल समाज की गुरुमाता रेखा हेंब्रम ने कहा कि मंदार संताल समाज का आराध्य स्थल है। भगवान राम और भगवान कृष्ण उनके गुरु हैं। महाकुंभ के माध्यम से समाज को सनातन धर्म की रक्षा का संकल्प दिलाया गया है। साथ ही धर्मांतरण, अंधविश्वास और प्रलोभन से दूर रहने की शपथ भी दिलाई गई।
धर्मजागरण समन्वय के जिला पूर्णकालिक प्रमुख जीवनलाल कुमार ने बताया कि अब तक पांच हजार से अधिक लोगों की सनातन धर्म में घर वापसी हो चुकी है। झारखंड के गुमला से आए सोहेल मुर्मू ने कहा कि शिक्षा की कमी के कारण आदिवासी समाज में प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराया जाता है। वे स्वयं पांच वर्षों तक ईसाई रहे, लेकिन अब सनातन धर्म में लौटे हैं। धर्मरक्षक मनीष कुमार ने बताया कि बुधवार को महाकुंभ के अंतिम दिन हजारों और लोगों की घर वापसी कराई जाएगी।
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