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    फूलों से सजी एंबुलेंस, डीजे और खुशियों का कारवां... बेगूसराय में बेटी के जन्म का अनोखा जश्न वायरल

    Updated: Wed, 15 Jul 2026 09:50 AM (IST)

    बेगूसराय के रुदौली गांव में एक परिवार ने बेटी के जन्म को डीजे और फूलों से सजी एंबुलेंस के साथ उत्सव के रूप में मनाया। यह अनोखा जश्न बेटियों के सम्मान ...और पढ़ें

    मां की गोद में नवजात रचना और फूलों से सजी एंबुलेंस। जागरण

    मां की गोद में नवजात रचना और फूलों से सजी एंबुलेंस। जागरण

    HighLights

    1. बेगूसराय में बेटी के जन्म पर परिवार ने मनाया अनोखा जश्न।

    2. फूलों से सजी एंबुलेंस और डीजे के साथ घर लाई गई नवजात।

    3. बेटियों के सम्मान और समान अधिकार का दिया सशक्त संदेश।

    पंचायत सूत्र, रुदौली (बछवाड़ा)। बेटियों के प्रति समाज की बदलती सोच का एक प्रेरणादायक उदाहरण मंगलवार को बछवाड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से सामने आया।

    रुदौली गांव के एक परिवार ने बेटी के जन्म को उत्सव का रूप देकर न सिर्फ अपनी खुशियां पूरे गांव के साथ साझा कीं, बल्कि बेटियों के सम्मान, समान अधिकार और उनके महत्व का सशक्त संदेश भी दिया।

    आमतौर पर एंबुलेंस को देखकर लोगों के मन में किसी बीमार या गंभीर मरीज की छवि उभरती है, लेकिन मंगलवार को बछवाड़ा सीएचसी से निकली एक एंबुलेंस ने सबको चौंका दिया।

    डीजे की धुन और फूलों से सजी एंबुलेंस 

    एंबुलेंस रंग-बिरंगे फूलों से सजी हुई थी और उसके आगे-पीछे डीजे की धुन पर झूमते परिजन चल रहे थे। यह नजारा देखकर राहगीरों को पहले लगा कि किसी बारात या बड़े समारोह का जुलूस निकल रहा है।

    बाद में लोगों को पता चला कि यह जश्न किसी शादी का नहीं, बल्कि एक बेटी के जन्म की खुशी में मनाया जा रहा है। यह जानकारी मिलते ही लोगों ने परिवार की सोच की खुले दिल से सराहना की और नवजात को आशीर्वाद दिया।

    रुदौली वार्ड संख्या-11 निवासी राम उदय सहनी के परिवार में दो बेटों के बाद बेटी का जन्म हुआ। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद परिवार के सदस्यों ने मां और नवजात का स्वागत यादगार बनाने का फैसला किया।

    इसके तहत अस्पताल की एंबुलेंस को फूलों से सजाया गया और डीजे की धुन के बीच मां-बेटी को पूरे सम्मान के साथ घर लाया गया। पूरे रास्ते परिवार के लोग खुशियां मनाते रहे और आसपास के लोग इस जश्न को देखने के लिए रुकते रहे।

    पूरे परिवार की पहली बेटी बनी रचना

    परिवार के सदस्य रामप्रवेश सहनी ने बताया कि उनके दोनों भाइयों के परिवार में यह पहली बेटी का जन्म हुआ है। लंबे समय बाद परिवार में आई इस खुशखबरी को सभी ने मिलकर खास बनाने का निर्णय लिया।

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    उन्होंने कहा कि बेटी का जन्म किसी उत्सव से कम नहीं है और समाज को भी बेटियों के जन्म पर इसी तरह खुशियां मनानी चाहिए।

    गांव पहुंचने पर मां और नवजात का पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ स्वागत किया गया। महिलाओं ने मंगलगीत गाए, आरती उतारी और परिवार के बुजुर्गों ने नवजात को आशीर्वाद दिया। नवजात का नाम 'रचना' रखा गया है।

    बेटों के समान मिलेगा हर अधिकार

    परिवार का कहना है कि रचना को शिक्षा, स्वास्थ्य, अवसर और संपत्ति सहित हर क्षेत्र में बेटों के समान अधिकार और सुविधाएं दी जाएंगी।

    परिवार के सदस्यों ने कहा कि बेटी और बेटे में कोई अंतर नहीं है। बेटियां भी परिवार और समाज का नाम रोशन कर सकती हैं, इसलिए उनके जन्म पर भी उतनी ही खुशी मनाई जानी चाहिए जितनी बेटे के जन्म पर मनाई जाती है।

    गांव में बनी चर्चा का विषय

    फूलों से सजी एंबुलेंस और डीजे के साथ बेटी के स्वागत का यह अनोखा अंदाज पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना रहा। ग्रामीणों ने परिवार की इस पहल को सामाजिक बदलाव की दिशा में सकारात्मक कदम बताया।

    लोगों का कहना था कि यदि हर परिवार बेटी के जन्म को इसी तरह सम्मान और गर्व के साथ स्वीकार करे, तो समाज में बेटियों के प्रति भेदभाव की सोच स्वतः समाप्त हो जाएगी।

    परिवार की इस पहल ने क्षेत्र में 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' के संदेश को व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत कर एक नई मिसाल कायम की।