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    बेगूसराय: बेटे की बरात निकलने से पहले पिता की करंट लगने से मौत, खुशियां मातम में बदलीं

    Updated: Mon, 29 Jun 2026 04:48 PM (IST)

    बखरी के जीतपुर गांव में बेटे की बरात निकलने से ठीक पहले पिता सिकंदर महतो की करंट लगने से मौत हो गई। शादी की खुशियां मातम में बदल गईं, हालांकि लड़की पक ...और पढ़ें

    बेटे की बरात निकलने से पहले पिता की करंट लगने से मौत, खुशियां मातम में बदलीं (AI Generated Image)

    बेटे की बरात निकलने से पहले पिता की करंट लगने से मौत, खुशियां मातम में बदलीं (AI Generated Image)

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    संवाद सहयोगी, बखरी (बेगूसराय)। बखरी थाना क्षेत्र के जीतपुर गांव में बेटे की बरात निकाल रहे पिता की करंट लगने से मौत हो गई। घटना रविवार की रात्रि लगभग नौ बजे की है। मृतक गांव के स्व. रामरक्षी महतो के 50 वर्षीय पुत्र सिकंदर महतो हैं।

    प्राप्त समाचार के अनुसार, सिकंदर के छोटे पुत्र विकास कुमार की शादी थी। रविवार की रात्रि उसकी बरात चेरिया बरियारपुर के अर्जुन टोल जानेवाली थी। ग्रामीण बताते हैं कि भोज भात के बाद घटना के समय बरात निकलने वाली थी। दूल्हा और अधिकांश बरात वाहनों में बैठ चुके थे।

    इसी दौरान किसी काम से सिकंदर घर के अंदर गए जहां वो विद्युत प्रवाहित तार की चपेट में आ गए। इससे घर में कोहराम मच गया। घर वालों ने तत्क्षण घटना की सूचना थाना को देते हुए घायल को आनन-फानन में बेगूसराय ले गए, परंतु रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।

    इस हृदयविदारक घटना से बराती भी स्तब्ध और मर्माहत थे। घटना के बाद कुछ लोग शादी और बारात को लेकर असमंजस थे, लेकिन लड़की पक्ष की परेशानी और नुकसान के साथ उनके सामाजिक प्रभाव को ध्यान में रखते हुए दो चार आदमी के साथ दूल्हे को शादी के लिए रवाना कर दिया गया।

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    इधर, पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर शव स्वजन को सौंप दिया है। घटना से घर में शादी की खुशियां मातम में बदल गईं। सुबह शव के घर पहुंचते ही उसे देखने वालों की भीड़ जमा हो गई। हर तरफ चीख-पुकार का माहौल था।

    लोगों के साथ गांव और शादी में शरीक होने आए रिश्ते नातेदार में घटना से काफी गमगीन थे। लोग प्रकृति के इस खेल से काफी मर्माहत थे।

    ग्रामीणों ने बताया कि सिकंदर राजमिस्त्री का काम करते थे। उन्हें कोई पुत्री नहीं थी। दो पुत्र ही हैं और दोनों टेंट हाउस का काम करते हैं।

    ग्रामीणों के अनुसार, बेटे की शादी को लेकर सिकंदर काफी खुश थे। पर उन्हें क्या पता था कि प्रकृति कुछ और ही सोच रही है। स्वजन और गांव वालों को यह गम खाए जा रहा है कि जिस बेटे की शादी में वे मगन थे, वही बेटा प्रकृति की मार के आगे उनकी अर्थी को कंधा भी नहीं दे पाएगा।