बेगूसराय सदर अस्पताल में बच्चे की मौत पर बवाल, परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप; जांच में मिली क्लीन चिट
बेगूसराय सदर अस्पताल में बच्चे की मौत पर विवाद गहरा गया है। परिजनों ने स्ट्रेचर और एंबुलेंस न मिलने से लापरवाही का आरोप लगाया। हालांकि, स्वास्थ्य विभा ...और पढ़ें

बेगूसराय सदर अस्पताल में बच्चे की मौत पर बवाल
HighLights
बच्चे की मौत पर परिजनों ने अस्पताल पर लापरवाही का आरोप लगाया।
जांच टीम ने अस्पताल प्रशासन को लापरवाही के आरोपों से बरी किया।
रिपोर्ट के अनुसार, बच्चा अस्पताल पहुंचने से पहले ही मृत था।
जागरण संवाददाता, बेगूसराय। सदर अस्पताल में एक बच्चे की मौत को लेकर इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित वीडियो के बाद विवाद खड़ा हो गया है। वीडियो में चांदपुरा थाना क्षेत्र के कैथ निवासी संतोष कुमार ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है।
उन्होंने कहा कि उनके पुत्र लक्ष्य को न तो स्ट्रेचर मिला और न ही समय पर एंबुलेंस, इसके कारण उसकी मौत हो गई। हालांकि स्वास्थ्य विभाग की जांच में इन आरोपों को निराधार बताया गया है।
जानकारी के अनुसार, मंगलवार को संतोष कुमार अपने पुत्र को उल्टी की शिकायत के बाद पहले एक निजी क्लिनिक ले गए थे। हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने उसे सदर अस्पताल रेफर कर दिया।
अस्पताल पहुंचने पर नहीं मिला स्ट्रेचर
स्वजन का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने पर न तो स्ट्रेचर उपलब्ध कराया गया और न ही चिकित्सकीय कर्मियों ने तत्परता दिखाई। आरोप है कि अस्पताल प्रशासन की कथित लापरवाही और संसाधनों की कमी के कारण बच्चे की जान चली गई। साथ ही, मौत के बाद शव को घर ले जाने के लिए 102 एंबुलेंस सेवा भी समय पर उपलब्ध नहीं हो सकी।
दो सदस्यीय जांच टीम गठित, सौंपी रिपोर्ट
मामले की गंभीरता को देखते हुए सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार ने तत्काल दो सदस्यीय जांच टीम का गठन किया। जांच दल में जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. गोपाल मिश्रा एवं जिला गैर संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. संजय सिंह को शामिल किया गया।
टीम ने सभी पक्षों से जानकारी जुटाने के बाद अपनी रिपोर्ट सिविल सर्जन को सौंप दी। इधर, सदर अस्पताल के प्रशासी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अखिलेश कुमार सिंह ने बताया कि संतोष कुमार मंगलवार रात करीब 8:56 बजे अपने पुत्र को निजी क्लिनिक से सदर अस्पताल लेकर आए थे। उस समय आपातकालीन सेवा में तैनात डा. निशांत सागर ने बच्चे की जांच की, जिसमें वह मृत पाया गया।
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स्वजन के आग्रह पर ईसीजी जांच भी की गई, जिसमें भी मृत्यु की पुष्टि हुई। उन्होंने बताया कि बच्चे की मौत अस्पताल पहुंचने से पहले ही हो चुकी थी।
एंबुलेंस आने में हुआ विलंब
शव वाहन को लेकर उठे सवालों पर अस्पताल उपाधीक्षक ने कहा कि 102 एंबुलेंस आने में कुछ विलंब जरूर हुआ, लेकिन थोड़ी ही देर में शव वाहन उपलब्ध करा दिया गया। इस दौरान स्वजन अपनी इच्छा से निजी एंबुलेंस की व्यवस्था कर रहे थे, लेकिन बाद में सरकारी शव वाहन से ही शव को घर भेजा गया।
सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार ने भी स्पष्ट किया कि जांच रिपोर्ट में अस्पताल कर्मियों की लापरवाही की पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि बच्चे की मृत्यु अस्पताल पहुंचने से पूर्व ही हो चुकी थी और इलाज में किसी प्रकार की कोताही नहीं बरती गई।