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    पपीते की खेती से बेगूसराय के अमरदीप ने बदली अपनी किस्मत, जमकर कर रहे कमाई

    Updated: Sat, 25 Apr 2026 01:45 PM (GMT+05:30)

    बेगूसराय के अमरदीप चौधरी ने पारंपरिक खेती छोड़कर पपीते की उन्नत खेती अपनाई है। इससे उन्हें चार गुना तक मुनाफा हो रहा है और वे क्षेत्र के अन्य किसानों ...और पढ़ें

    बेगूसराय के किसान अमरदीप चौधरी। (जागरण)

    बेगूसराय के किसान अमरदीप चौधरी। (जागरण)

    HighLights

    1. अमरदीप चौधरी ने पपीते की उन्नत खेती अपनाई।

    2. पारंपरिक खेती से चार गुना अधिक मुनाफा कमाया।

    3. अन्य किसानों को आधुनिक तकनीक अपनाने को प्रेरित किया।

    संवाद सूत्र, बछवाड़ा (बेगूसराय)। बछवाड़ा प्रखंड के चिरंजीवीपुर पंचायत के वार्ड संख्या तीन निवासी प्रगतिशील किसान अमरदीप चौधरी आज पपीते की उन्नत खेती के जरिए आर्थिक समृद्धि की नई कहानी लिख रहे हैं।

    उन्होंने पारंपरिक खेती से हटकर आधुनिक और नकदी फसल की ओर कदम बढ़ाया, जिसका लाभ अब उन्हें भरपूर मिल रहा है। उनकी सफलता ने न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है।

    अमरदीप बताते हैं कि पहले वे गेहूं और मक्के जैसी पारंपरिक फसलों की खेती करते थे। इन फसलों में लागत अधिक और मुनाफा अपेक्षाकृत कम होता था, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति में विशेष सुधार नहीं हो पा रहा था।

    ऐसे में उन्होंने बदलते समय और बाजार की मांग को समझते हुए कुछ नया करने का निर्णय लिया। मोबाइल फोन पर इंटरनेट मीडिया के माध्यम से उन्होंने पपीते की खेती की तकनीक, देखभाल और बाजार संभावनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की।

    10 कट्ठा जमीन में लगाते हैं पपीते के पौधे

    शुरुआत में उन्हें कई तरह की तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। वैज्ञानिक पद्धति से मार्च माह में 10 कट्ठा जमीन में पपीते के पौधे लगाए।

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    महज तीन महीने के भीतर ही पौधों में फल आने लगे, जो इस फसल की खासियत है। वर्तमान में उनके खेत में लगे पेड़ों पर अच्छी गुणवत्ता के पपीते तैयार हो रहे हैं, जिससे उन्हें निरंतर आमदनी मिल रही है।

    अमरदीप हर दो दिन पर अपने खेत से दो से तीन क्विंटल पपीता तोड़कर दलसिंहसराय फल मंडी में बेचते हैं। वहां उन्हें प्रति क्विंटल तीन से चार हजार रुपये तक का भाव मिल जाता है। इस प्रकार कम समय में ही उनकी आय में कई गुना वृद्धि हुई है।

    चार गुना तक मुनाफा संभव

    उनका कहना है कि पपीते की खेती में लागत के मुकाबले चार गुना तक मुनाफा संभव है, जो पारंपरिक खेती की तुलना में कहीं अधिक लाभदायक है।

    अब वे अपनी खेती का दायरा बढ़ाकर एक बीघा जमीन में पपीते की खेती करने की योजना बना रहे हैं। हालांकि, उन्हें गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जो इस विस्तार में बाधा बन रही है।

    स्थानीय किसानों का कहना है कि अमरदीप की सफलता ने उन्हें भी नई दिशा दी है। वे अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ फल और सब्जी की नकदी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं।

    अमरदीप भी अन्य किसानों से अपील कर रहे हैं कि वे आधुनिक तकनीक अपनाकर खेती को लाभकारी बनाएं। यदि किसानों को सही मार्गदर्शन, बीज और बाजार की सुविधाएं समय पर मिलें, तो वे न केवल अपनी आय दोगुनी कर सकते हैं, बल्कि खेती को एक सशक्त और समृद्ध व्यवसाय के रूप में स्थापित कर सकते हैं।

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