300 साल बाद 12 शुभ योगों में मनाई जाएगी महाशिवरात्रि, इन राशियों को मिलेगा विशेष लाभ
इस वर्ष महाशिवरात्रि 15 फरवरी (Mahashivratri 2026 Date) को मनाई जाएगी, जो 300 वर्षों बाद 12 दुर्लभ शुभ योगों के साथ आ रही है। ज्योतिषाचार्य पंडित नवल ...और पढ़ें

300 साल बाद 12 शुभ योगों में मनाई जाएगी महाशिवरात्रि

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संवाद सूत्र, गढ़पुरा (बेगूसराय)। महाशिवरात्रि (Mahashivratri 2026) इस वर्ष आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष और दुर्लभ महत्व रखती है। करीब 300 वर्षों के बाद ऐसा अद्भुत संयोग बन रहा है, जब एक साथ 12 शुभ और दुर्लभ योगों का निर्माण हो रहा है।
कोरैय के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित नवल किशोर झा के अनुसार, महाशिवरात्रि इस वर्ष 15 फरवरी को मनाई जाएगी। यही वह पावन तिथि है, जब भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य विवाह हुआ था।
पंडित झा ने बताया कि इस महाशिवरात्रि पर प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य, शोभन, सर्वार्थसिद्ध, साध्य, शिव, शुक्ल, चंद्रमंगल, त्रिग्रही, राज और ध्रुव योग का एक साथ निर्माण हो रहा है। इन शुभ योगों का विशेष फल मेष, मिथुन और सिंह राशि के जातकों को प्राप्त होगा।
मेष राशि वालों के लिए आर्थिक उन्नति, पदोन्नति और नेतृत्व क्षमता में वृद्धि के संकेत हैं। मिथुन राशि के जातकों को व्यापार और करियर में नई ऊंचाइयों को छूने का अवसर मिलेगा, जबकि सिंह राशि के लिए धन आगमन और अचल संपत्ति में वृद्धि के प्रबल योग बन रहे हैं।
15 फरवरी को ही मनाई जाएगी महाशिवरात्रि:
फाल्गुन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी की शाम 04:23 बजे से प्रारंभ होकर 16 फरवरी की शाम 05:09 बजे तक रहेगी। निशा व्यापिनी तिथि के कारण महाशिवरात्रि 15 फरवरी को ही मनाई जाएगी। इस दिन प्रातः से रात्रि तक विभिन्न शुभ योग बनते रहेंगे, जिससे दिन भर शिव आराधना का विशेष महत्व रहेगा।
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बाबा हरिगिरि धाम में लगेगा मेला:
मिथिलांचल की पावन भूमि पर स्थित बाबा हरिगिरि धाम में महाशिवरात्रि के अवसर पर दो दिवसीय मेले का आयोजन होगा। गढ़पुरा के राम जानकी ठाकुरबाड़ी से निकलने वाली शिव बारात गाजे-बाजे और राम दल के साथ हरि गिरि धाम पहुंचेगी। हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति से पूरा क्षेत्र ‘बोल बम’ और ‘हर हर महादेव’ के जयघोष से गूंज उठेगा।
प्रहर वार अभिषेक का विशेष महत्व:
शास्त्रों के अनुसार, महाशिवरात्रि पर चारों प्रहर में विधि-विधान से अभिषेक करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। दूध, दही, घी और शहद से किए गए अभिषेक एवं मंत्र जाप से भक्तों पर भगवान शिव की अपार कृपा बनी रहती है। इस दुर्लभ योग में की गई शिव आराधना जीवन में सुख, शांति और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है।