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3 साल की उम्र में गई दोनों आंखों की रोशनी, हौसला नहीं टूटा; बेगूसराय में सहायक प्रोफेसर बने शाहजहां, अब IAS बनने का लक्ष्य

Published: Sat, 22 Aug 2026 05:50 PM (IST)

शाहजहां खान ने 3 साल की उम्र में आंखों की रोशनी खोने के बावजूद, दृढ़ इच्छाशक्ति से वीरपुर, बेगूसराय में ...और पढ़ें

सहायक प्रोफेसर शाहजहां खान

सहायक प्रोफेसर शाहजहां खान

HighLights

  1. 3 साल की उम्र में खोई आंखों की रोशनी।

  2. वीरपुर कॉलेज में इतिहास के सहायक प्रोफेसर।

  3. अब भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाने का लक्ष्य।

धर्मेंद्र कुमार, वीरपुर (बेगूसराय)। दृढ़ इच्छाशक्ति और मेहनत के सामने दिव्यांगता भी सफलता की राह नहीं रोक सकती। वीरपुर प्रखंड के खरमौली स्थित राजकीय डिग्री कॉलेज के दृष्टिबाधित सहायक प्रोफेसर शाहजहां खान इसकी मिसाल हैं।

महज तीन वर्ष की उम्र में दोनों आंखों की रोशनी गंवाने के बावजूद उन्होंने शिक्षा को अपना सहारा बनाया और आज इतिहास पढ़ा रहे हैं।

विशेष विद्यालय से शुरू हुआ शिक्षा का सफर

शेखपुरा जिले के किरतौल गांव निवासी शाहजहां खान ने पटना के कदमकुआं स्थित दृष्टिबाधित बच्चों के विशेष विद्यालय से प्रारंभिक शिक्षा हासिल की।

इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए लखनऊ का रुख किया। किसान परिवार से आने वाले शाहजहां ने परिस्थितियों के आगे हार मानने के बजाय अपने लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाए।

इतिहास की कक्षा में छात्रों को मिलती है प्रेरणा

राजकीय डिग्री कॉलेज वीरपुर में योगदान देने के बाद शाहजहां खान विद्यार्थियों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। छात्र मिथिलेश, शमा परवीन, श्वेता कुमारी और उषा कुमारी के अनुसार, उनकी कक्षा में इतिहास सिर्फ तिथियों और घटनाओं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि संघर्ष और सफलता की सीख भी देता है।

तकनीक बनी आंखों का सहारा, मोबाइल से करते हैं पढ़ाई

दृष्टिबाधित होने के बावजूद शाहजहां खान आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल में दक्ष हैं। मोबाइल में स्क्रीन रीडर और टॉकबैक जैसी सुविधाओं के जरिए वह संदेश पढ़ते-सुनते और टाइप करते हैं।

पुस्तकों को पीडीएफ और ई-बुक में बदलकर स्क्रीन रीडर की मदद से पढ़ते हैं और विद्यार्थियों के लिए ऑडियो अध्ययन सामग्री भी तैयार करते हैं।

किसान परिवार के बेटे ने हासिल की बड़ी उपलब्धि

शाहजहां खान के पिता सरफराज खान खेती-बाड़ी करते हैं। साधारण किसान परिवार से निकलकर सहायक प्रोफेसर बनने वाले शाहजहां अपने पंचायत क्षेत्र से उच्च शिक्षा हासिल करने वाले पहले व्यक्ति हैं। उनकी उपलब्धि से परिवार और ग्रामीणों में गर्व का माहौल है।

दिव्यांग बच्चों को लेकर अभिभावकों से खास अपील

शाहजहां खान अभिभावकों से दिव्यांग बच्चों को बोझ या अभिशाप न समझने की अपील करते हैं। उनका कहना है कि दिव्यांग बच्चों को भी सामान्य बच्चों की तरह शिक्षा और आगे बढ़ने का समान अवसर मिलना चाहिए। सही सहयोग मिलने पर वे भी अपने सपनों को पूरा कर सकते हैं।

सहायक प्रोफेसर के बाद अब IAS बनने का लक्ष्य

शाहजहां खान सहायक प्रोफेसर बनना अपनी अंतिम मंजिल नहीं मानते। उनका अगला लक्ष्य भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाना है।

इसके लिए वह तैयारी कर रहे हैं। उनका मानना है कि कोई भी परिस्थिति अंतिम नहीं होती और निरंतर प्रयास से कठिन से कठिन चुनौती को पार किया जा सकता है।