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BAU में आम की 250 दुर्लभ प्रजातियां, प्रभाशंकर से महमूद बहार तक..., GI टैग वाले जर्दालु भी, आम समागम में आएंगे महामहिम

Published: Thu, 25 Jun 2026 07:52 AM (IST)

भागलपुर के बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU), सबौर में 27-28 जून को राष्ट्रीय आम समागम आयोजित होगा, जिसमें आम की 250 ...और पढ़ें

Mango Festival in Bihar: भागलपुर में सजेगा आमों का संसार, सबौर में 27 जून से राष्ट्रीय आम समागम; राज्यपाल भी होंगे शामिल

Mango Festival in Bihar: भागलपुर में सजेगा आमों का संसार, सबौर में 27 जून से राष्ट्रीय आम समागम; राज्यपाल भी होंगे शामिल

HighLights

  1. BAU सबौर में 27-28 जून को राष्ट्रीय आम समागम।

  2. 250 दुर्लभ आम प्रजातियां, अनुसंधान पर मंथन होगा।

  3. GI टैग जर्दालु आम, प्रभाशंकर, महमूद बहार प्रदर्शित।

जागरण संवाददाता, भागलपुर। आम सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि भारत के स्वाद, रंग और संस्कृति का जीवंत हिस्सा है। इसकी मिठास इतिहास के पन्नों, लोकजीवन और हमारी परंपराओं में रची-बसी है। यही कारण है कि आम को फलों का राजा कहा जाता है। राजदरबारों से लेकर किसानों की चौपाल तक सबको एक सूत्र में बांधने वाले इस फल की विरासत अब आधुनिक कृषि अनुसंधान से जुड़ने जा रही है।

सबौर में 27 और 28 जून को राष्ट्रीय आम समागम

इसी सिलसिले में भागलपुर के बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU), सबौर में आगामी 27 और 28 जून को दो दिवसीय 'राष्ट्रीय आम समागम' का भव्य आयोजन होने जा रहा है। इस समागम में आम की विविधता, संरक्षण, नए अनुसंधान और आधुनिक तकनीकों पर देशभर के वैज्ञानिक मंथन करेंगे। इस खास मौके पर बिहार के राज्यपाल भी शामिल होंगे, जो आम की गुणवत्ता, उत्पादन और इसकी भावी संभावनाओं को परखेंगे।

250 किस्मों के साथ देश का सबसे पुराना जर्मप्लाज्म केंद्र

सबौर का आम अनुसंधान इतिहास बेहद गौरवशाली रहा है। वर्ष 1941 में 'फल अनुसंधान उपकेंद्र' के रूप में यहां आम की विभिन्न किस्मों के संरक्षण की नींव रखी गई थी। आज यह विश्वविद्यालय परिसर देश के सबसे पुराने आम जर्मप्लाज्म संरक्षण केंद्रों में से एक है। वर्तमान में यहाँ आम के लगभग 250 जीनोटाइप और दुर्लभ किस्मों को सुरक्षित और संरक्षित रखा जा रहा है।

सबौर ने देश को दी 'प्रभाशंकर' और 'महमूद बहार' की सौगात

कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में सबौर ने देश को पहली संकर (Hybrid) आम किस्मों के रूप में 'प्रभाशंकर' और 'महमूद बहार' की अनमोल सौगात दी है। इसके अलावा, वैज्ञानिकों द्वारा हाल के वर्षों में विकसित की गई 'सबौर आम-1' और 'सबौर आम-2' जैसी उन्नत किस्में अपने बेहतरीन स्वाद, गुणवत्ता और लंबी शेल्फ लाइफ (ज्यादा दिन तक खराब न होने की क्षमता) के कारण किसानों के बीच काफी लोकप्रिय हो रही हैं।

जर्दालु आम: भागलपुर की धरती का स्वर्णिम गौरव

भागलपुर की धरती पर उपजा 'जर्दालु आम' इस गौरवगाथा का सबसे चमकता हुआ अध्याय है। अपनी अनोखी सुगंध, सुनहरे रंग और बिना रेशे वाले गूदे के कारण जर्दालु देश-विदेश में अपनी खास धाक रखता है। वर्ष 2018 में जर्दालु आम को भौगोलिक संकेतक यानी जीआई टैग (GI Tag) मिला था, जिसने इसकी विशिष्टता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान और राष्ट्रीय मान्यता दी।

सिर्फ स्वाद नहीं, अंचल की सांस्कृतिक पहचान है आम

गंगा के उपजाऊ मैदानों में तैयार होने वाला जर्दालु सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि इस पूरे अंग क्षेत्र की अस्मिता और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बन चुका है। इस राष्ट्रीय आम समागम का मुख्य उद्देश्य केवल स्वाद का उत्सव मनाना नहीं है, बल्कि आम की इस समृद्ध विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और प्रयोगशाला के अनुसंधान को सीधे किसानों के खेतों तक उतारना है।

भागलपुर की विरासत आम है। इस आम समागम का मुख्य उद्देश्य आम की विभिन्न प्रजातियों का प्रदर्शन करना, अनुसंधान को बढ़ावा देना और इसके दीर्घकालिक विकास के लिए एक ठोस रणनीति तैयार करना है।

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डॉ. डी.आर. सिंह, कुलपति, बीएयू सबौर

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