भागलपुर में बरसेगा 'हरा सोना': 50-60 रुपये वाले नारियल से बदलेगी किसानों की किस्मत, 5 साल में कमाई ही कमाई!
भागलपुर नारियल उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने की ओर अग्रसर है, जहां उद्यान विभाग किसानों को बड़े पैमाने पर नारियल की खेती के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।

50-60 रुपये वाले नारियल से बदलेगी किसानों की किस्मत, 5 साल में कमाई ही कमाई! (AI Generated Image)
HighLights
भागलपुर में बड़े पैमाने पर नारियल की खेती को बढ़ावा।
किसानों को नारियल के पौधों पर 75% तक अनुदान।
स्थानीय उत्पादन से किसानों की आय बढ़ेगी, निर्भरता घटेगी।
नवनीत मिश्र, भागलपुर। नारियल उत्पादन के क्षेत्र में भागलपुर अब दूसरे राज्यों पर निर्भर नहीं रहेगा। जिले में बड़े पैमाने पर नारियल की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। बदलते मौसम और खान-पान में आए बदलाव के साथ नारियल की मांग लगातार बढ़ रही है। इसी को देखते हुए उद्यान विभाग किसानों को नारियल की खेती के लिए पिछले तीन साल से प्रोत्साहित कर रहा है।
पिछले तीन वर्षों में जिले में करीब नौ हजार नारियल के पौधे लगाए जा चुके हैं। इस वर्ष भी छह हजार से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में भागलपुर में नारियल की मांग पूरी करने के लिए पश्चिम बंगाल, असम और आंध्रप्रदेश से आपूर्ति होती है। शहर में प्रतिदिन करीब एक ट्रक नारियल की खपत हो रही है।
दूसरे राज्यों से आने के कारण नारियल की कीमत भी बढ़ जाती है। बाजार में एक नारियल 50 से 60 रुपये तक में बिकता है। स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ने से किसानों को अतिरिक्त आमदनी होगी और उपभोक्ताओं को भी स्थानीय स्तर पर नारियल उपलब्ध हो सकेगा।
उद्यान विभाग के अनुसार, नारियल की खेती किसानों के लिए लाभकारी फसल साबित हो सकती है। नारियल के फल के अलावा इसके विभिन्न हिस्सों का भी उपयोग होता है।
नारियल पानी की बढ़ती मांग के कारण इसके व्यवसायिक उत्पादन की संभावनाएं भी बेहतर हैं। विभाग किसानों को पौध उपलब्ध कराने के साथ तकनीकी जानकारी भी दे रहा है।
75 प्रतिशत अनुदान पर मिल रहा पौधा
नारियल विकास बोर्ड, पटना की ओर से किसानों को गुणवत्तापूर्ण नारियल के पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं। नारियल के पौधे पर 75 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। राज्य स्कीम के तहत भी नारियल पौधा वितरण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसके लिए नारियल विकास बोर्ड से राशि स्वीकृत कराई गई है।
योजना के तहत एक हेक्टेयर में करीब 178 पौधे लगाए जाएंगे। किसानों को न्यूनतम 0.14 हेक्टेयर से अधिकतम दो हेक्टेयर तक पौधे उपलब्ध कराने का प्रावधान है। सहायक निदेशक उद्यान की ओर से किसानों को पौधे उपलब्ध कराने की प्रक्रिया की जा रही है।
तीन साल में बढ़ी पौधों की संख्या
उद्यान विभाग के अधिकारियों के अनुसार पिछले तीन वर्षों में जिले में करीब नौ हजार नारियल के पौधे लगाए गए हैं। इस वर्ष छह हजार से अधिक पौधे लगाने की तैयारी है। आने वाले वर्षों में नारियल की खेती का रकबा बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौध उपलब्ध कराने के साथ उन्हें खेती की तकनीक की जानकारी भी दी जाएगी, ताकि पौधों की बेहतर वृद्धि हो और भविष्य में जिले में नारियल का उत्पादन बढ़ सके।
कैरिया में बड़े पैमाने पर लगे पौधे
कहलगांव के कैरिया में बड़ पैमाने पर नारियल के पौधे लगाए गए हैं। किसान विभू दुबे ने बताया कि अभी दो साल का पौधा हुआ है। पांच से छह साल में फलन होने लगेगा।
इससे पहले नारियल के पत्ते से झाड़ू तैयार होने लगेगा। किसानों को फायदा ही फायदा है। तालाब के किनारे नारियल लगाने से मछली पालन में भी फायदा होगा। गर्मी में भी मछलियां सुरक्षित रहेंगी।
नारियल की खेती लाभकारी
बिहार कृषि महाविद्यालय सबौर की प्राचार्य डॉ. रुबी रानी ने बताया कि नारियल का पेड़ छोटे अड्डा की जगह बड़े अड्डा और बांध पर लगाया जाता है। यह पांच-छह वर्ष में फलन देने लगता है। नारीयल के पेड़ से छांव नहीं हाेता है, क्योंकि यह बहुत ऊपर होता है।
इससे खेत में होने वाली कोई फसल पर प्रतिकुल प्रभाव नहीं पड़ता है। एक हेक्टेयर में 30 से 35 पेड़ के फलन से पति, पत्नी और बच्चे का भोजन कपड़ा सहित भरन पोषण आसानी से किया जा सकता है।
