विक्रमशिला पुल टूटने के बाद NH-80 पर ट्रकों की आवाजाही बहाल, बाबूपुर-महादेवपुर गंगा घाट पर मालवाहक जहाज तैयार
विक्रमशिला सेतु क्षतिग्रस्त होने के बाद एनएच-80 पर आवागमन ठप हो गया था, लेकिन अब बाबूपुर गंगा घाट पर मालवाहक कार्गो जहाज पहुंचने से यातायात फिर से शुर ...और पढ़ें

“बाबूपुर-महादेवपुर जलमार्ग से लौटे ट्रक और कारोबार की रफ्तार”
HighLights
विक्रमशिला सेतु क्षतिग्रस्त होने से एनएच-80 पर आवागमन बाधित।
बाबूपुर घाट पर कार्गो जहाज से यातायात बहाली की उम्मीद।
महादेवपुर घाट पर भूमि अधिग्रहण अभी भी चुनौती।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। विक्रमशिला सेतु पर आवागमन ठप होने के बाद मानो गंगा पार का जीवन थम-सा गया था। कहलगांव से सबौर तक फैली एनएच-80 की सड़क पर पसरा सन्नाटा अब टूटने की ओर है। सबौर प्रखंड के बाबूपुर गंगा घाट पर गुरुवार को मालवाहक कार्गो जहाज लगते ही इलाके में नई उम्मीद की लहर दौड़ गई। वर्षों से सड़क और पुल पर निर्भर यातायात व्यवस्था अब जलमार्ग के सहारे फिर गति पकड़ने जा रही है।
घाट पर हलचल और मशीनों की गड़गड़ाहट
घाट पर मशीनों की गड़गड़ाहट और गतिविधियों की बढ़ती रफ्तार ने यह संकेत दे दिया है कि वीरान पड़ी सड़कें जल्द ही ट्रकों की आवाजाही और लोगों की चहल-पहल से गुलजार होंगी। स्थानीय लोग कह रहे हैं कि जैसे ही कार्गो संचालन शुरू होगा, एनएच-80 की आर्थिक धड़कन भी तेज़ हो जाएगी।
एप्रोच पथ निर्माण युद्धस्तर पर
कार्गो संचालन को सुचारु बनाने के लिए बाबूपुर घाट पर एप्रोच पथ निर्माण का कार्य युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है। गुरुवार शाम तक हाइड्रोलिक क्रालर एक्सकेवेटर मशीन भी घाट पर पहुंच गई। मशीनों की मदद से घाट से जहाज तक ट्रकों की आवाजाही के लिए मजबूत अस्थाई सड़क तैयार की जाएगी, ताकि भारी वाहन आसानी से जहाज पर चढ़ और उतर सकें।
कन्हैया लाजिस्टिक कंपनी के संचालक कन्हैया कुमार ने बताया कि बाबूपुर घाट की ओर सरकारी भूमि के साथ कुछ निजी जमीन का भी अधिग्रहण कर लिया गया है, जिससे यहां कार्य में कोई बड़ी बाधा नहीं है। उन्होंने कहा कि शुक्रवार तक अधिकांश तकनीकी और आधारभूत तैयारियां पूरी कर ली जाएंगी।
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महादेवपुर घाट पर जमीन बनी चुनौती
हालांकि गंगा के उस पार नवगछिया के महादेवपुर घाट पर अब भी जमीन अधिग्रहण को लेकर परेशानी बनी हुई है। कंपनी को वहां जहाज से उतरने वाले ट्रकों के मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता है। जमीन उपलब्ध नहीं होने से एप्रोच मार्ग तैयार करने में विलंब हो रहा है।
कंपनी और स्थानीय प्रशासन इस समस्या के समाधान में जुटे हैं। कंपनी का कहना है कि जैसे ही महादेवपुर घाट की बाधा दूर होगी, कार्गो संचालन पूरी तरह नियमित कर दिया जाएगा। प्रारंभिक योजना के अनुसार बाबूपुर घाट से चार मालवाहक जहाजों का परिचालन किया जाना है।
सूनी सड़क पर लौटेगी जिंदगी
तीन मई को देर रात विक्रमशिला सेतु क्षतिग्रस्त होने के बाद भागलपुर से नवगछिया, कटिहार, पूर्णिया आदि की ओर जाने वाली मुख्य सड़क पर भारी वाहनों की आवाजाही लगभग बंद हो गई थी। ट्रकों का परिचालन ठप पड़ते ही सड़क किनारे बसे छोटे कारोबारियों की आजीविका पर गहरा असर पड़ा।
ढाबे, चाय-नाश्ते की दुकानें, फल-सब्जी के ठेले, पंचर बनाने वाले और वाहन चालकों पर निर्भर छोटे व्यवसाय लगभग बंद हो गए। दिनभर व्यस्त रहने वाली सड़कें वीरान नजर आने लगीं। अब जलमार्ग से ट्रकों और मालवाहक वाहनों के पार होने की व्यवस्था शुरू होते ही इन व्यवसायियों के चेहरे पर उम्मीद लौट आई है।
कार्गो सेवा शुरू, तैयारियां लगभग पूरी
स्थानीय लोगों का मानना है कि कार्गो सेवा शुरू होते ही एनएच-80 की आर्थिक धड़कन फिर तेज हो जाएगी। जिला प्रशासन द्वारा कार्गो सेवा का किराया निर्धारित कर दिया गया है। दो से तीन दिनों के भीतर नियमित संचालन शुरू होने की संभावना है। चार मालवाहक जहाजों के माध्यम से वाहनों को बाबूपुर घाट से महादेवपुर घाट तक पहुंचाने की तैयारी लगभग पूरी कर ली गई है।
कन्हैया कुमार ने बताया कि जलमार्ग शुरू होने से ना केवल ट्रकों का संचालन सुगम होगा, बल्कि छोटे व्यवसायियों और स्थानीय लोगों के रोजमर्रा के कामकाज में भी तेजी आएगी। घाटों पर मशीनों की गड़गड़ाहट और ट्रकों की आवाजाही अब उम्मीद का प्रतीक बन गई है।
जलमार्ग से बदलती अर्थव्यवस्था
विशेषज्ञों का कहना है कि बाबूपुर- महादेवपुर जलमार्ग से पारंपरिक सड़क मार्ग पर निर्भरता कम होगी। भारी वाहन अब जलमार्ग के माध्यम से गंगा पार कर सकेंगे, जिससे एनएच-80 पर दबाव कम होगा। इसके साथ ही ट्रकों और मालवाहक वाहनों का परिचालन तेज़ होने से क्षेत्र की अर्थव्यवस्था भी सुधरेगी।