26 साल की कानूनी लड़ाई के बाद गरजा बुलडोजर, भागलपुर में सिविल सर्जन कंपाउंड की 25 दुकानें ध्वस्त
Bhagalpur Civil Surgeon Compound Encroachment: भागलपुर के सिविल सर्जन कंपाउंड में 26 साल की कानूनी लड़ाई के बाद न्यायालय के ...और पढ़ें

Bhagalpur Civil Surgeon Compound Encroachment: कोर्ट के आदेश पर सिविल सर्जन कंपाउंड में चला बुलडोजर, 25 दुकानें व क्लिनिक ध्वस्त
HighLights
भागलपुर सिविल सर्जन कंपाउंड में अवैध निर्माण पर कार्रवाई।
26 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद फैसला।
25 दुकानें और क्लिनिक ध्वस्त, जमीन खाली कराई गई।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। Bhagalpur Civil Surgeon Compound Encroachment: न्यायालय के सख्त आदेश के अनुपालन में रविवार को भागलपुर स्थित सिविल सर्जन कंपाउंड में अवैध रूप से संचालित दुकानों और निजी क्लिनिकों के खिलाफ प्रशासन का बड़ा बुलडोजर एक्शन देखने को मिला। भारी पुलिस बल की तैनाती और प्रतिनियुक्त मजिस्ट्रेट की निगरानी में करीब 25 दुकानों और क्लिनिकों को तीन जेसीबी मशीनों से ध्वस्त कर दिया गया। इस कार्रवाई के साथ ही वादी को जमीन पर दखल देहानी कराई गई।
प्रशासनिक टीम ने अवर सांख्यिकी पदाधिकारी राजेश कुमार को बतौर दंडाधिकारी (मजिस्ट्रेट) प्रतिनियुक्त किया था। पुलिस की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच रविवार सुबह से ही कॉम्प्लेक्स को गिराने की प्रक्रिया शुरू की गई। पूरे ढांचे को समतल करने में दो से तीन दिन का समय लग सकता है। इसके लिए मौके पर तीन जेसीबी मशीनें लगातार काम कर रही हैं, जबकि मलबे को हटाने के लिए तीन से चार ट्रैक्टर लगाए गए हैं।
छह महीने पहले हंगामे के कारण रोकनी पड़ी थी कार्रवाई
उल्लेखनीय है कि लगभग छह-सात माह पूर्व भी न्यायालय के आदेश पर जब प्रशासनिक टीम दखल देहानी कराने पहुंची थी, तब दुकानदारों और क्लिनिक संचालकों ने कड़ा विरोध जताते हुए जमकर हंगामा किया था। उस दौरान टीम के साथ हाथापाई की नौबत आ गई थी। हंगामे और बढ़ते विवाद को देखते हुए तत्कालीन सदर एसडीएम विकास कुमार ने मौके पर पहुंचकर अभियान को तात्कालिक रूप से रोक दिया था।
उस समय दुकानदारों का आरोप था कि उन्हें बिना पूर्व नोटिस दिए अचानक कार्रवाई की गई, जिससे उन्हें जरूरी सामान निकालने तक का अवसर नहीं मिला। हालांकि, सात अगस्त को कोर्ट के आए नए आदेश के आलोक में इस बार रविवार की कार्रवाई से पूर्व सभी दुकानदारों को विधिवत नोटिस तामील कराया गया था। नोटिस मिलने के बाद दुकानदारों ने पहले ही अपना सामान निकाल लिया था, जिसके बाद शांतिपूर्ण ढंग से ध्वस्तीकरण किया गया।
1998 से चल रही थी कानूनी जंग, 27 डिसमिल जमीन का विवाद
सिविल सर्जन कंपाउंड स्थित 27 डिसमिल (करीब नौ कट्ठा) जमीन पर मालिकाना हक का यह विवाद दशकों पुराना है। वादी वैद्यनाथ गुप्ता के अधिवक्ता के अनुसार, 1978 से 1985 के बीच चले भूमि सर्वे के दौरान बिहार सरकार ने इस निजी भूमि को सरकारी खाते में दर्ज कर लिया था। इसके खिलाफ वादी वैद्यनाथ गुप्ता ने वर्ष 1998 में न्यायालय में टाइटल सूट दायर किया था।
कोर्ट के आदेश पर भारी पुलिस बल और मजिस्ट्रेट की निगरानी में सिविल सर्जन कंपाउंड में हुई दखल देहानी की बड़ी कार्रवाई
तीन जेसीबी मशीनों की मदद से कॉम्प्लेक्स की 25 दुकानों और निजी क्लिनिकों को पूरी तरह किया गया ध्वस्त
वादी वैद्यनाथ गुप्ता के पक्ष में आया अदालती फैसला, सरकार की पहली अपील खारिज होने के बाद मिला मालिकाना हक
छह-सात महीने पूर्व हंगामे के कारण रुकी थी कार्रवाई; इस बार पहले से नोटिस देकर खाली कराया गया परिसर
लंबी कानूनी लड़ाई के बाद वर्ष 2011 में अदालत ने वैद्यनाथ गुप्ता के पक्ष में फैसला सुनाया। इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने प्रथम अपील दायर की, लेकिन न्यायालय ने सरकार की दलीलों को सिरे से खारिज करते हुए वादी के पक्ष के निर्णय को बरकरार रखा। सरकार की अपील खारिज होने के बाद अदालत ने वादी को जमीन पर वास्तविक दखल देहानी कराने का अंतिम आदेश जारी किया, जिस पर रविवार को प्रशासनिक अमले ने अमल किया।
