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जब CM सम्राट चौधरी से हम लोगों को मिलने ही नहीं देना था, तो यहां काहे लेके आए हैं? भागलपुर में भड़के बाढ़ पीड़ित

Published: Sun, 06 Sep 2026 02:28 PM (IST)

CM SMRAT CHOUDHARI Raghopur Embankment Survey: भागलपुर के राघोपुर में गंगा-कोसी के कटाव से पीड़ित ग्रामीण मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से ...और पढ़ें

CM SMRAT CHOUDHARI Raghopur Embankment Survey: खरीक में सीएम के निरीक्षण के दौरान भड़के ग्रामीण, मिलने से रोकने पर काटा बवाल; पूछा- 'काहे लेके आए हैं?'

CM SMRAT CHOUDHARI Raghopur Embankment Survey: खरीक में सीएम के निरीक्षण के दौरान भड़के ग्रामीण, मिलने से रोकने पर काटा बवाल; पूछा- 'काहे लेके आए हैं?'

HighLights

  1. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी राघोपुर तटबंध कटाव स्थल का निरीक्षण करने पहुंचे।

  2. सुरक्षा घेरे के कारण ग्रामीणों को मुख्यमंत्री से मिलने नहीं दिया गया।

  3. आक्रोशित ग्रामीणों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाए, माहौल गरमाया।

संवाद सूत्र, खरीक (भागलपुर)। CM SMRAT CHOUDHARI Raghopur Embankment Survey: गंगा और कोसी के उफान के बीच भागलपुर जिले के खरीक प्रखंड अंतर्गत राघोपुर जमींदारी तटबंध पर कटाव की विभीषिका झेल रहे ग्रामीणों का सब्र रविवार को जवाब दे गया। जमींदारी तटबंध के ध्वस्त हो रहे हिस्सों और कटावरोधी कार्यों का भौतिक निरीक्षण करने पहुंचे मुख्यमंत्री से जब स्थानीय ग्रामीणों को मिलने नहीं दिया गया, तो मौके पर भारी आक्रोश फैल गया।

जैसे ही क्षेत्र में ब‍िहार मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आगमन की सूचना मिली, तटबंध किनारे बसे सैकड़ों महिला-पुरुष व बुजुर्ग अपनी आपबीती सुनाने, घरों के कटने का दर्द बयां करने और पुनर्वास की मांग लेकर मौके पर पहुंच गए थे। हालांकि, चाक-चौबंद सुरक्षा घेरे और प्रशासनिक पाबंदियों के कारण किसी भी ग्रामीण को मुख्यमंत्री के समीप जाने की अनुमति नहीं दी गई।

जहाज पर चढ़ने की कोशिश, नारेबाजी के बीच गरमाया माहौल

निरीक्षण स्थल पर उस वक्त अजीबोगरीब स्थिति उत्पन्न हो गई, जब एक ओर कटाव पीड़ित ग्रामीण अपनी व्यथा सुनाने के लिए नदी किनारे लगे जहाज (स्टीमर/बोट) की ओर बढ़ने लगे और ऊपर चढ़ने का प्रयास करते हुए गुहार लगाने लगे, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक दल व सुरक्षा घेरे के समीप मौजूद कुछ उत्साही समर्थक मुख्यमंत्री के समर्थन में नारेबाजी करने लगे।

  • खरीक प्रखंड के राघोपुर जमींदारी तटबंध कटाव स्थल का मुआयना करने पहुंचे थे मुख्यमंत्री, सुरक्षा घेरे के चलते ग्रामीणों को रोका

  • कटाव का दर्द बयां करने जुटे ग्रामीणों को जब मिलने नहीं दिया गया, तो भड़का गुस्सा; समर्थकों की नारेबाजी के बीच गरमाया माहौल

  • जहाज के पास पहुंचकर अपनी बात रखने की कोशिश करते रहे लोग, सुरक्षाकर्मियों ने ग्रामीणों को रखा काफी दूर

  • विस्थापित होते परिवारों का फूटा आक्रोश— 'जब जनता से ही नहीं मिलना था, तो मुख्यमंत्री को यहां काहे लेके आए हैं?'

चीखते-पुकारते पीड़ितों के सामने नारेबाजी शुरू होने से माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। आक्रोशित लोग सवाल उठाने लगे कि जब पूरा गांव कटकर नदी में समाने की कगार पर है, तब नारे लगाने का क्या औचित्य है। सुरक्षाकर्मियों को ग्रामीणों को जहाज से दूर रखने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।

'जब मिलना ही नहीं था, तो काहे लेके आए?'

नदी के आक्रामक कटाव से बेघर हो रहे ग्रामीणों का कहना था कि राघोपुर जमींदारी बांध दिन-रात तेजी से कट रहा है। नदी की धारा बस्तियों की ओर मुड़ चुकी है और कई आशियाने गंगा-कोसी के गर्भ में विलीन हो चुके हैं। दर्जनों परिवार अपने घरों को तोड़कर और टीन-शेड समेटकर सुरक्षित बांधों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं।

अधिकारियों द्वारा रोके जाने पर बिफरे ग्रामीणों ने कड़े शब्दों में प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल दागा। लोगों ने कहा, “जब त्राहिमाम कर रही आम जनता और कटाव पीड़ितों का दर्द ही नहीं सुनना था, तो फिर मुख्यमंत्री को यहां काहे लेके आए हैं? क्या केवल खानापूर्ति के लिए दौरा कराया जा रहा है?”

ग्रामीणों का स्पष्ट तर्क था कि तटबंध पर काम की जमीनी हकीकत और कटाव की असल भयावहता एसी गाड़ियों में चलने वाले अधिकारियों की फाइलों और रिपोर्टों से कहीं ज्यादा उन पीड़ितों की जुबानी समझी जा सकती है, जिनकी जमीन और छत पानी में समा रही है। अपनी बात सूबे के मुखिया तक सीधे न पहुंचा पाने का मलाल लिए ग्रामीण देर तक तटबंध किनारे आक्रोश जताते नजर आए।