Bhagalpur Flood : खतरे के निशान से 48 सेमी ऊपर पहुंची गंगा, उच्चतम स्तर से मात्र 70 सेमी दूर; गांवों में घुसा पानी
भागलपुर में गंगा नदी खतरे के निशान से 48 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है, जिससे गांवों और बस्तियों में पानी ...और पढ़ें

Bhagalpur Flood
HighLights
गंगा भागलपुर में खतरे के निशान से 48 सेमी ऊपर।
उच्चतम बाढ़ स्तर से मात्र 70 सेमी नीचे बह रही नदी।
गांवों में पानी घुसने से लोग सुरक्षित स्थानों पर पलायन कर रहे।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। Bhagalpur Flood : सिल्क सिटी भागलपुर और आसपास के इलाकों में गंगा नदी ने अब रौद्र रूप धारण कर लिया है। लाल निशान को पार करने के बाद नदी तबाही की भयावह इबारत लिखने लगी है। बाढ़ का पानी अब केवल बहियार, दियारा और खेतों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बस्तियों की सीमाओं को तोड़ते हुए गांवों की चौखट लांघकर सीधे घरों के भीतर प्रवेश कर चुका है।
संपर्क सड़कें डूब चुकी हैं और आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि प्रभावित परिवारों को अपना घर-द्वार छोड़कर बाल-बच्चों व मवेशियों के साथ ऊंचे बांधों, पक्के भवनों और सुरक्षित ठिकानों की ओर पलायन करने पर विवश होना पड़ रहा है।
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, शुक्रवार की रात से शनिवार की सुबह तक गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ते हुए 34.16 मीटर पर पहुंच गया है। यह जलस्तर खतरे के निशान (33.68 मीटर) से 48 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज किया गया है। सबसे डराने वाली बात यह है कि गंगा अब अपने सर्वकालिक उच्चतम बाढ़ स्तर (एचएफएल) 34.86 मीटर से महज 70 सेंटीमीटर ही नीचे रह गई है।
भागलपुर में खतरे के निशान (33.68 मीटर) से 48 सेंटीमीटर ऊपर बह रही गंगा, शनिवार सुबह 34.16 मीटर पहुंचा जलस्तर
उच्चतम बाढ़ स्तर (HFL) 34.86 मीटर से अब महज 70 सेमी नीचे बची नदी, 1 सेमी प्रति घंटे की दर से हो रही बढ़ोतरी
तटवर्ती इलाकों में खेत-खलिहान जलमग्न होने के बाद घरों में घुसा पानी; परिवार और मवेशियों को लेकर सुरक्षित स्थानों पर शरण
मुंगेर से लेकर सुल्तानगंज (अजगैवीनाथ धाम) तक नदी का भारी दबाव, दर्जनों गांवों में बाढ़ की विभीषिका से दहशत
चौखट लांघकर घरों में घुसा गंगा का पानी, सिर पर गृहस्थी लादकर ऊंचे ठिकानों की ओर भागे लोग; HFL से सिर्फ 70 सेमी नीचे बह रही नदी
हालांकि, पिछले 24 घंटों की तुलना में पानी के बढ़ने की गति में आंशिक कमी आई है। पहले जहां जलस्तर प्रति घंटे 2 सेंटीमीटर की रफ्तार से बढ़ रहा था, वहीं अब यह 1 सेंटीमीटर प्रति घंटे की दर से बढ़ रहा है। लेकिन लगातार हो रही वृद्धि से तटवर्ती इलाकों में खतरे की घंटी लगातार बज रही है।
चौखट से रोकने की कोशिशें नाकाम, सामान समेटने की मजबूरी]
तटवर्ती इलाकों में मंजर बेहद हृदयविदारक है। कुछ घंटे पहले तक जो ग्रामीण बोरियां और मिट्टी डालकर पानी को घर के दरवाजे पर रोकने का प्रयास कर रहे थे, अब वे हाथ खड़े कर चुके हैं। कमरों और आंगनों में कमर तक पानी भर जाने के कारण लोग अपनी जरूरी गृहस्थी, अनाज और बिस्तर समेटकर छतों अथवा दूर-दराज के ऊंचे स्थानों की ओर दौड़ रहे हैं।
बाढ़ प्रभावित परिवारों के सामने खुद की जान बचाने के साथ-साथ अपने मवेशियों को सुरक्षित निकालना और उनके चारे का बंदोबस्त करना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
मुंगेर से अजगैवीनाथ धाम तक भारी दबाव, तटवर्ती पंचायतों में त्राहिमाम
भागलपुर जिले के लिए संकट केवल स्थानीय पानी का नहीं है, बल्कि नदी के ऊपरी हिस्से (अपस्ट्रीम) से आ रहा भारी जलप्रवाह लगातार दबाव बना रहा है। पड़ोसी जिले मुंगेर में भी गंगा खतरे के निशान के ऊपर बह रही है, जिससे वहां के निचले इलाकों और दर्जनों गांवों में बाढ़ का पानी फैल चुका है।
यही उफान आगे बढ़ते हुए सुल्तानगंज स्थित ऐतिहासिक अजगैवीनाथ धाम और आसपास की तटवर्ती पंचायतों को अपनी चपेट में ले चुका है। सुल्तानगंज के कई गंगा तटीय गांवों में दोबारा बाढ़ की गंभीर स्थिति पैदा हो गई है। दर्जनों पक्के व कच्चे मकान जलमग्न हो गए हैं। प्रशासन की टीमें स्थिति की निगरानी कर रही हैं, लेकिन जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि ने ग्रामीणों की रातों की नींद छीन ली है।
