भागलपुर में मंडराया बाढ़ का खतरा: अलर्ट जोन से 42 सेंटीमीटर ऊपर बह रही गंगा, निचले इलाकों में भरा पानी
भागलपुर में गंगा का जलस्तर चेतावनी स्तर से 42 सेंटीमीटर ऊपर बह रहा है, जिससे निचले इलाकों में पानी भर ...और पढ़ें
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भागलपुर में उफनाई गंगा। फोटो जागरण
HighLights
गंगा चेतावनी स्तर से 42 सेंटीमीटर ऊपर बह रही।
निचले इलाकों में पानी भरने से बाढ़ का खतरा।
फसलों को नुकसान, विस्थापन की चिंता बढ़ी।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। गंगा अब सिर्फ खेतों को नहीं डुबो रही, बल्कि शहर और गांवों के मुहाने तक पहुंच चुकी है। रविवार सुबह छह बजे भागलपुर में गंगा का जलस्तर 33.10 मीटर पहुंच गया। नदी का पानी बढ़ने से जमुनिया धार पूरी तरह जलमग्न हो गई है। सखीचंद घाट, बूढ़ानाथ और बड़ी खंजरपुर तक पानी पहुंच गया है।
शहर से सटे लगभग सभी घाट लबालब हो गए हैं और कई जगह पानी मोहल्लों के करीब पहुंच गया है। स्थिति यह है कि कल जहां खाली जमीन दिखाई दे रही थी, वहां दोपहर बाद पानी फैल गया। इससे तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों के बीच अब बाढ़ की चिंता और गहरी हो गई है।
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जल संसाधन विभाग अंतर्गत बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, भागलपुर के कार्यपालक अभियंता आदित्य प्रकाश ने बताया कि रविवार सुबह छह बजे गंगा का जलस्तर 33.10 मीटर दर्ज किया गया है। नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और स्थिति पर विभाग की लगातार नजर है।
खतरे के निशान से सिर्फ 58 सेंटीमीटर नीचे
भागलपुर में गंगा का चेतावनी स्तर 32.68 मीटर और खतरे का निशान 33.68 मीटर है। रविवार सुबह 33.10 मीटर जलस्तर पहुंचने के बाद गंगा चेतावनी स्तर से 42 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। अब खतरे के निशान से महज 58 सेंटीमीटर नीचे है।
गंगा का उच्चतम बाढ़ स्तर (एचएफएल) 34.86 मीटर है। यानी मौजूदा जलस्तर एचएफएल से 1.76 मीटर नीचे है। जिस तेजी से पानी बढ़ रहा है, उसने तटवर्ती क्षेत्रों के लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
शहर में भी जलस्तर बढ़ने का असर
गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर शहर से सटे इलाकों में साफ दिखाई देने लगा है। जमुनिया धार जलमग्न हो गई है। सखीचंद घाट, बूढ़ानाथ और बड़ी खंजरपुर तक पानी पहुंचने से आसपास के लोगों की परेशानी बढ़ गई है। घाटों पर पानी का दबाव लगातार बढ़ रहा है।
शहर के गंगा किनारे रहने वाले लोगों का कहना है कि नदी का पानी जिस तेजी से बढ़ रहा है, उससे आने वाले एक-दो दिन बेहद महत्वपूर्ण हैं। यदि जलस्तर में इसी तरह वृद्धि जारी रही तो निचले मोहल्लों में पानी प्रवेश करने की आशंका बढ़ जाएगी।

गंगा के बढ़ते पानी की रफ्तार का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कई निचले स्थानों पर जहां जमीन दिखाई दे रही थी, वहां पानी फैल गया। खेतों में लगी मक्का, सब्जी और अन्य फसलें प्रभावित हो रही हैं। किसानों को अब फसल बचाने से ज्यादा चिंता परिवार और पशुओं को सुरक्षित रखने की सताने लगी है।
पानी फैलने से पशुओं के लिए चारा जुटाना भी मुश्किल होता जा रहा है। ग्रामीण ऊंचे स्थानों की तलाश करने लगे हैं। कई परिवार जरूरी सामान, अनाज और पशुचारा सुरक्षित जगह पर पहुंचाने में जुट गए हैं।
रजंदीपुर से ममलखा तक निचले इलाकों में पानी
सबौर प्रखंड के रजंदीपुर, इंग्लिश, ममलखा, फरका समेत कई गांवों के निचले इलाकों में गंगा का पानी प्रवेश करने लगा है। फरका के खेल मैदान में भी पानी पहुंच गया।
ग्रामीणों ने पानी के बहाव को रोकने के लिए बांध पर मिट्टी डालकर तत्काल रोकथाम का प्रयास किया। मुखिया राजेंद्र प्रसाद मंडल ने सीओ और जल संसाधन विभाग के जूनियर इंजीनियर को इसकी जानकारी दी है।
तटवर्ती ग्रामीणों का कहना है कि गंगा की धार इसी तरह बढ़ती रही तो खेतों के बाद अब गांवों की बारी है। हर साल बाढ़ का सामना करने वाले परिवारों में फिर से विस्थापन का डर पैदा हो गया है।
अजगैवीनाथ धाम से कहलगांव तक
गंगा का बढ़ता जलस्तर सिर्फ भागलपुर तक सीमित नहीं है। अजगैवीनाथ धाम और कहलगांव में भी नदी का दबाव बढ़ा हुआ है। कहलगांव की सहायक नदियां कुआ, भयाना, गेरुआ और घोघा भी उफान पर हैं। पक्कीसराय, त्रिमोहन, एकचारी, धनौरा, रामपुर खड़हरा, ओगरी, तौफिल, अंठावन, बीरबन्ना, पकड़तल्ला और आमापुर चौर में भी पानी तेजी से फैल रहा है। इससे मिर्च, मक्का समेत अन्य फसलों को नुकसान की आशंका है।
ऊपरी क्षेत्रों की बढ़ोतरी से भागलपुर पर दबाव
गंगा के ऊपरी क्षेत्रों में बढ़ते जलस्तर का असर डाउनस्ट्रीम में दिखाई दे रहा है। पटना क्षेत्र में भी गंगा के बढ़े जलस्तर के बाद मुंगेर, भागलपुर और कहलगांव की ओर पानी का दबाव बढ़ा है। ऐसे में भागलपुर में जलस्तर की स्थिति पर अगले कुछ दिनों तक विशेष नजर रखने की जरूरत है।
