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ग्राउंड रिपोर्ट : दू-मंजिला घर छोड़के आब पन्नी तरे रहबो...! गंगा निगलने को बेताब, तो आंखों में आंसू लिए खाली हुए आशियाने

Published: Fri, 04 Sep 2026 08:15 AM (IST)

Bhagalpur Flood Threat: भागलपुर के राघोपुर पंचायत के छोटी अलालपुर गांव पर गंगा के कटाव से जमींदारी बांध टूटने का ...और पढ़ें

Bhagalpur Flood Threat: गंगा के कटाव से राघोपुर में हाहाकार, आशियाना छोड़ 14 नंबर सड़क पर पहुंचे ग्रामीण; बांध पर टिकीं निगाहें

Bhagalpur Flood Threat: गंगा के कटाव से राघोपुर में हाहाकार, आशियाना छोड़ 14 नंबर सड़क पर पहुंचे ग्रामीण; बांध पर टिकीं निगाहें

HighLights

  1. गंगा के कटाव से राघोपुर के अलालपुर गांव पर बाढ़ का खतरा।

  2. जमींदारी बांध कटने से ग्रामीण ऊंचे स्थानों पर पलायन को मजबूर।

  3. 2008 की बाढ़ से भी व्यापक पलायन, 1460 घर खतरे में।

जागरण संवाददाता, राघोपुर/बिहपुर (भागलपुर)। Bhagalpur Flood Threat: जमींदारी बांध से सटा राघोपुर पंचायत का छोटी अलालपुर गांव। महज कुछ सौ मीटर के फासले पर कलकल बहने वाली शांत गंगा ने इस वक्त ऐसा रौद्र रूप धारण कर रखा है कि बांध का एक बड़ा हिस्सा पहले ही जलसमाधि ले चुका है।

यदि पानी के प्रचंड थपेड़ों से बांध का बचा हुआ हिस्सा टूटा, तो समूचा गांव देखते ही देखते जलमग्न हो जाएगा। इसी खौफ के साये में बुधवार की स्याह रात कटी और गुरुवार की अलसाई सुबह भी उसी दहशत के बीच खुली। गांव के भीतर अभी बाढ़ का पानी घुसा नहीं है, लेकिन अनहोनी की आहट से सहमे लोग अपना जीवनभर का सामान समेटकर ऊंचे स्थान यानी 14 नंबर सड़क की ओर पलायन करने लगे हैं। हर पथराई आंख में सिर्फ एक ही यक्ष प्रश्न तैर रहा है— क्या इस बार गंगा उनके आशियाने को बचने देगी?

Bhagalpur Flood Threat Raghopur Village Faces Ganga Erosion (1)

  • जमींदारी बांध का बड़ा हिस्सा कटने से राघोपुर पंचायत के छोटी अलालपुर गांव पर मंडराया जलप्रलय का खतरा

  • पानी घुसने से पहले ही घर खाली करने की मजबूरी; 14 नंबर सड़क पर प्लास्टिक की पन्नी तानकर रहने पहुंचे ग्रामीण

  • वार्ड 10 से 14 तक के करीब 1460 घरों में ताले, 2008 की प्रलयंकारी बाढ़ में भी नहीं हुआ था ऐसा व्यापक पलायन

  • पुरुष सदस्य दिन-रात बांध बचाने की जंग में जुटे, महिलाएं नम आंखों से कुलदेवी से लगा रहीं आशियाना बचाने की गुहार

गुरुवार सुबह के नौ बजे धूप खिली है और उमस से लोग बेहाल हैं। कटाव वाले तटबंध पर सन्नाटा पसरा है। रातभर जान हथेली पर रखकर फ्लड फाइटिंग में जुटे ग्रामीण धीरे-धीरे फिर से बांध का मुआयना करने पहुंच रहे हैं।

Bhagalpur Flood Threat Raghopur Village Faces Ganga Erosion (2)

गांव के मुहाने पर प्लास्टिक के कामचलाऊ तंबू के नीचे बिछी खटिया पर एक बुजुर्ग महिला बैठी हैं। झुर्रियों से भरा बदन, गले में घेंघा, बाएं हाथ में थाली और कांपती उंगलियों से चावल-सब्जी मिलाती हुईं... लेकिन नजरें बिना पलक झपकाए सिर्फ सामने टूटते बांध पर टिकी हैं। पास बंधी दो बकरियां भी टकटकी लगाए थाली को देख रही हैं—मानो यह मंजर कह रहा हो कि तबाही के मुहाने पर भी पेट की भूख किसी परिस्थिति से समझौता नहीं करती। स्थानीय अंगिका बोली में वह फफक पड़ती हैं— "बांध कटै वाला छै... गांव खाली होय रहल छै... कुछ सामान बचलौ छै, हम्मे जोगी रहल छिये... बच्चा सिनी अैते त हमरो लै जैते!"

Bhagalpur Flood Threat Raghopur Village Faces Ganga Erosion (3)

80 साल में पहली बार पन्नी के नीचे रहने की बेबसी

गांव के भीतर कीचड़ भरे संकरे रास्ते पर आगे बढ़ने पर चारों तरफ पसरा सन्नाटा और मकानों पर लटके ताले भयावहता की गवाही देते हैं। रास्ते में 80 वर्षीय बुजुर्ग संयुक्ता देवी अपनी तीन बेटियों के साथ सुरक्षित स्थान की ओर बढ़ती नजर आती हैं। घर छोड़ने का सवाल सुनते ही उनका सब्र टूट जाता है और आंखों से आंसुओं की धार बह निकलती है।

कांपती जुबान से वह कहती हैं— "जिनगी भरक कमाई स घर बनौने छलियै। आब गंगा ओकरा डुबाबै खातिर बांध तोड़ै लेल उतावली छै। हमर उमर अस्सी बरख हो गेलै। आज धरि कहियो बाढ़ के कारण घर छोड़के नै गेलियै। दू-मंजिला घर छोड़के आब पन्नी तरे रहबो... की करबो!"

पति के निधन के बाद तीनों विवाहित बेटियां इस संकट में अपनी मां को ढांढस बंधाने पहुंची हैं। भारी मन से कुलदेवी और गंगा मइया के भरोसे अपना दोमंजिला पक्का मकान छोड़ते हुए वह सिसक पड़ती हैं— "शादी के बाद यही गांव में अयलो रहियै, अभी जाय पड़ै छै!"

Bhagalpur Flood Threat Raghopur Village Faces Ganga Erosion (4)

2008 में भी नहीं छूटा था गांव, 1460 घरों के सामने अस्तित्व का संकट

राघोपुर पंचायत के वार्ड 10 से 14 तक में रहने वाले हजारों ग्रामीणों के सामने अपने जीवनकाल में पहली बार गांव से उजड़ने की नौबत आई है। पंचायत में कच्चे-पक्के मिलाकर करीब 1460 मकान हैं। वार्ड 10 के सदस्य विकास कुमार बताते हैं कि वर्ष 2008 की ऐतिहासिक बाढ़ में जब घरों में कमर तक पानी भर गया था, तब भी किसी ने गांव छोड़कर पलायन नहीं किया था। लेकिन इस बार गंगा की सीधी और गहरी धारा का कटाव इतना आक्रामक है कि 90 फीसदी से ज्यादा परिवार अपने जरूरी सामान और मवेशियों के साथ पलायन कर चुके हैं। परिवार के पुरुष सदस्य बांध बचाने के संघर्ष में डटे हैं, जबकि महिलाएं और बच्चे सुरक्षित ठिकानों पर शरण ले रहे हैं।

Bhagalpur Flood Threat Raghopur Village Faces Ganga Erosion (5)

सामान समेट सकते हैं, घर नहीं; मंदिर में मन्नतें मांग रहीं महिलाएं

गांव की वीणा देवी, अर्चना कुमारी और विद्या देवी अपने आंसुओं को पल्लू से पोंछते हुए कहती हैं कि पलायन के इस दौर में वे केवल बर्तन, अनाज और बिस्तर समेट सकती हैं, ईंट-गारे से सींचा आशियाना तो साथ नहीं ले जाया जा सकता। विवश होकर महिलाएं गांव के दुर्गा मंदिर में पिंडी के समक्ष शीश नवाकर प्रार्थना कर रही हैं— "मैया, अपनी बहन गंगा के प्रकोप से हमारे घरों को बचा लो। अगर गांव डूबने से बच गया, तो लौटकर तुम्हें चुनरी चढ़ाएंगे।"

Bhagalpur Flood Threat Raghopur Village Faces Ganga Erosion (6)

उधर, ग्रामीण हीरालाल, बबलू मंडल और उमेश मंडल बताते हैं कि गंगा का रुख देखकर राघोपुर से लेकर तेतरी तक के इलाके पर भारी तबाही का साया मंडरा रहा है। कभी अगलगी तो कभी बाढ़ की विभीषिका झेलने वाले इन ग्रामीणों के लिए इस बार गंगा का कटाव जिंदगी की सबसे दर्दनाक परीक्षा ले रहा है।