भागलपुर में स्ट्रीट लाइट संकट : तीन आयुक्त बदले, फिर भी नहीं हुई लाइट खरीद, शहर अंधेरे में डूबा
भागलपुर में स्ट्रीट लाइट की कमी और एस्सल कंपनी का करार समाप्त होने से शहर अंधेरे में डूब गया है। पिछले आठ महीनों से स्ट्रीट लाइट खरीद की निविदा प्रक्र ...और पढ़ें

एस्सल का करार खत्म, नई लाइट नहीं खरीदी, शहर की सड़कों पर अंधेरा
जागरण संवाददाता, भागलपुर। शहर में स्ट्रीट लाइट की कमी से रोशनी व्यवस्था चरमरा गई है। 31 दिसंबर को एस्सल कंपनी के साथ नगर निगम का करार समाप्त होने के बाद स्थिति और खराब हो गई है। कंपनी द्वारा लगाए गए लाइट अब धीरे-धीरे खराब हो रहे हैं, जिससे गली-मोहल्लों और मुख्य मार्गों पर अंधेरा छाने लगा है। इससे आम लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
8 माह से अटकी निविदा प्रक्रिया
निगम को स्ट्रीट लाइट खरीदारी का आदेश विभाग से मिल चुका है, लेकिन पिछले आठ महीनों से निविदा प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। इस दौरान कई बार निविदा की शर्तों में बदलाव किया गया। सात महीनों में तीन नगर आयुक्तों का तबादला होने से हर बार नई कार्ययोजना के साथ टेंडर ड्राफ्ट में संशोधन होता रहा, जिससे प्रक्रिया लगातार टलती गई।
सर्वे में सामने आए 8500 पोल
तत्कालीन नगर आयुक्त डॉ. प्रीति के निर्देश पर वार्डों में नए और खाली पोल का सर्वे कराया गया, जिसमें करीब 8500 पोल की पहचान की गई। इसके बाद 5000 स्ट्रीट लाइट की खरीदारी प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन उनके तबादले के बाद योजना आगे नहीं बढ़ सकी।
सेंसर योजना से बढ़ी लागत
इसके बाद आए नगर आयुक्त शुभम कुमार ने योजना को और बेहतर बनाने की पहल की। इसमें ऑटोमैटिक सिस्टम और सेंसर आधारित स्ट्रीट लाइट लगाने पर विचार किया गया। स्मार्ट सिटी के अभियंताओं ने प्रस्ताव तैयार किया, जिसमें पहले पांच करोड़ की लागत वाली योजना सेंसर और कंट्रोल कमांड सेंटर से जोड़ने पर करीब 13 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। बजट अधिक होने के कारण इस योजना को फिलहाल स्थगित कर दिया गया।
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अब फाइनल हुआ टेंडर
वर्तमान में 51 वार्डों को पहले 10-10 के समूह में और फिर 29 व 28 वार्डों के दो वर्गों में बांटा गया। कई बदलावों के बाद अब जाकर निविदा का फाइनल ड्राफ्ट तैयार हुआ है और निगम जल्द टेंडर जारी करने की तैयारी में है।
पार्षद ने उठाए सवाल
इधर, पार्षद संजय सिन्हा ने निगम प्रशासन पर जनहित की अनदेखी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पिछले तीन वर्षों से स्ट्रीट लाइट खरीदारी हर बैठक में चर्चा का विषय बनती है, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं होती।
उन्होंने कहा कि कार्यालय के लिए कुर्सी, अलमारी या अन्य सामग्री की खरीद में तेजी दिखाई जाती है, जबकि शहर की सड़कों और गलियों में अंधेरा छाया हुआ है। इस दिशा में नगर आयुक्त को जल्द ठोस पहल करनी चाहिए।