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    Bhagalpur News: किराए के मकान को कमर्शियल मानकर टैक्स लगाने पर आपत्ति, विभाग ने मांगी रिपोर्ट

    Updated: Fri, 20 Mar 2026 03:09 PM (GMT+05:30)

    भागलपुर नगर निगम द्वारा किराए पर दी गई आवासीय संपत्तियों को वाणिज्यिक घोषित कर होल्डिंग टैक्स लगाने के मामले में शिकायत पर संज्ञान लिया गया है। नगर वि ...और पढ़ें

    किराए के मकान को कमर्शियल मानकर टैक्स लगाने पर आपत्ति, विभाग ने मांगी रिपोर्ट (AI Generated Image)

    किराए के मकान को कमर्शियल मानकर टैक्स लगाने पर आपत्ति, विभाग ने मांगी रिपोर्ट (AI Generated Image)

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    जागरण संवाददाता, भागलपुर। नगर निगम द्वारा किराए पर दी गई आवासीय संपत्तियों को वाणिज्यिक घोषित कर होल्डिंग टैक्स लगाने के मामले की शिकायत पर विभाग ने संज्ञान लिया है। इस संबंध में नगर विकास एवं आवास विभाग ने नगर आयुक्त से एक सप्ताह के भीतर जांच कर रिपोर्ट मांगी है।

    संयुक्त सचिव संजय कुमार ने पत्र जारी कर नगर आयुक्त को निर्देश दिया है कि शिकायतकर्ता प्रतीक झुनझुनवाला द्वारा उठाए गए सभी बिंदुओं की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए और उसकी बिंदुवार रिपोर्ट आवेदक व विभाग को भेजी जाए।

    वहीं, राज्य निर्वाचन आयोग ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला पदाधिकारी को पत्र भेजा था। आयोग को प्राप्त आवेदन में ‘वाणिज्यिक होल्डिंग टैक्स’ से जुड़े मामले पर पक्ष रखने को कहा है।

    क्या है पूरा मामला?

    देवयोगी कंसल्टेंट्स के प्रतिनिधि प्रतीक झुनझुनवाला ने एक मार्च को नगर आयुक्त को पत्र देकर आपत्ति जताई थी। उनका कहना है कि केवल किराए पर देने के आधार पर आवासीय संपत्तियों को वाणिज्यिक घोषित करना पूरी तरह अवैध और मनमाना है। सं

    पत्ति का वर्गीकरण उसके वास्तविक उपयोग पर निर्भर करता है, न कि उससे होने वाली आय पर। यदि किरायेदार उस मकान का उपयोग रहने के लिए कर रहा है, तो वह संपत्ति आवासीय ही मानी जाएगी। सिर्फ किराया मिलने से किसी संपत्ति का स्वरूप वाणिज्यिक नहीं हो जाता।

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    टैक्स कानून और जीएसटी का भी दिया हवाला

    शिकायतकर्ता ने अपने पक्ष में कई न्यायिक निर्णयों का उल्लेख किया है। आयकर कानून और जीएसटी व्यवस्था दोनों ही साधारण आवासीय किरायेदारी को व्यवसायिक गतिविधि नहीं मानते।

    आयकर अधिनियम के तहत किराया ‘हाउस प्रापर्टी’ की आय है। जीएसटी में भी आवासीय उपयोग के लिए किराए पर दी गई संपत्ति सामान्यतः करमुक्त रहती है।

    राजस्व बढ़ाने के लिए मनमाना वर्गीकरण का आरोप

    आरोप लगाया है कि नगर निगम राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से आवासीय संपत्तियों को वाणिज्यिक घोषित कर रहा है, जो वैधानिक रूप से गलत है।

    प्रतीक ने कहा कि पूरे भवन को एक साथ वाणिज्यिक घोषित करना अवैध है। यदि किसी हिस्से का उपयोग व्यवसाय के लिए हो रहा है, तो केवल उसी हिस्से पर नियम लागू होना चाहिए।