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भागलपुर रेलवे जंक्शन पर 'टॉयलेट एक प्रेम कथा' जैसी घटना! प्लेटफॉर्म पर शौचालय न होने से चलती ट्रेन से कूदी महिला

Published: Sun, 20 Sep 2026 10:29 PM (IST)Updated: Mon, 21 Sep 2026 08:23 AM (IST)

Bhagalpur Railway Station Platform 2 3 Toilet Issue: भागलपुर जंक्शन के प्लेटफॉर्म 2 और 3 पर शौचालय न होने के ...और पढ़ें

Bhagalpur Railway Station Platform 2 3 Toilet Issue: भागलपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या 2-3 पर शौचालय की सुविधा न होने से परेशान महिला यात्री (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Bhagalpur Railway Station Platform 2 3 Toilet Issue: भागलपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या 2-3 पर शौचालय की सुविधा न होने से परेशान महिला यात्री (प्रतीकात्मक तस्वीर)

HighLights

  1. भागलपुर प्लेटफॉर्म 2-3 पर शौचालय न होने से महिला कूदी।

  2. चलती ट्रेन से कूदने पर महिला बाल-बाल बची, बड़ा हादसा टला।

  3. रेलवे प्रशासन की बुनियादी सुविधाओं की गंभीर उपेक्षा उजागर हुई।

जागरण संवाददाता, भागलपुर। Bhagalpur Railway Station Platform 2 3 Toilet Issue: अभिनेता अक्षय कुमार और भूमि पेडनेकर की चर्चित बॉलीवुड फिल्म 'टॉयलेट : एक प्रेम कथा' का वह दृश्य अधिकांश लोगों को याद होगा, जिसमें नायिका को शौचालय जाने के लिए रेलवे स्टेशन पर खड़ी ट्रेन में चढ़ना पड़ता है और अचानक ट्रेन खुल जाती है।

बुधवार दोपहर करीब दो बजे मालदा रेल मंडल के प्रमुख स्टेशनों में शुमार अंग प्रदेश के भागलपुर जंक्शन पर रील लाइफ की यह पटकथा हकीकत के धरातल पर उतर आई। फर्क सिर्फ इतना था कि वह एक फिल्मी कहानी थी और यह भागलपुर जंक्शन का कड़वा सच।

भागलपुर जंक्शन के प्लेटफॉर्म संख्या दो और तीन पर शौचालय की कोई सुविधा नहीं है। बुधवार दोपहर मुजफ्फरपुर जाने वाली जनसेवा एक्सप्रेस उक्त प्लेटफॉर्म पर खड़ी थी। इसी दौरान दो महिला यात्री आपात स्थिति में ट्रेन के टॉयलेट का उपयोग करने के लिए बोगी में चढ़ गईं। अभी वे अंदर ही थीं कि ट्रेन को सिग्नल मिल गया और पहिए घूमने लगे।

हड़बड़ी में एक महिला तो फौरन नीचे उतर गई, लेकिन दूसरी महिला जब तक गेट तक पहुंची, ट्रेन रफ्तार पकड़ने लगी थी। घबराहट में महिला चलती ट्रेन से ही प्लेटफॉर्म पर कूद पड़ी। प्लेटफॉर्म पर गिरते ही वह बुरी तरह लड़खड़ाई, लेकिन मौके पर मौजूद यात्रियों और कुलियों ने तत्परता दिखाते हुए उसे संभाल लिया। गनीमत यह रही कि वह पटरी की ओर नहीं गिरी और एक भयानक रेल हादसा टल गया।

मालदा डिवीजन का सर्वाधिक राजस्व, फिर भी बुनियादी सुविधा गायब

भागलपुर जंक्शन मालदा रेल मंडल को सर्वाधिक राजस्व देने वाले अग्रणी स्टेशनों में शुमार है। इसके बावजूद प्लेटफॉर्म दो-तीन पर शौचालय की व्यवस्था न होना रेल प्रशासन की गंभीर उपेक्षा को उजागर करता है। यहां उतरने या गाड़ी का इंतजार करने वाली महिलाओं और बुजुर्ग यात्रियों को शौच के लिए फुटओवर ब्रिज (एफओबी) चढ़कर प्लेटफॉर्म नंबर एक पर जाना पड़ता है।

  • भागलपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म 2-3 पर शौचालय न होने से महिला व बुजुर्ग यात्रियों की बढ़ी फजीहत; 'टॉयलेट: एक प्रेम कथा' फिल्म जैसा घटा वाकया

  • बुधवार को खड़ी जनसेवा एक्सप्रेस में शौचालय के लिए चढ़ी महिला; गाड़ी खुलते ही चलती बोगी से प्लेटफार्म पर कूदी, बाल-बाल बची जान

  • सर्कुलेटिंग एरिया के महिला शौचालय में भी अक्सर लटकता है ताला; लिफ्ट व सीढ़ियों का काम जारी, पर बुनियादी जरूरत अब भी नदारद

  • पूर्व रेलवे के सीपीआरओ शिबराम माझी ने घटना को बताया गंभीर; बोले- महिला व बुजुर्ग यात्रियों के लिए जल्द बनेगी वैकल्पिक व्यवस्था

Bhagalpur Station Toilet Issue Woman Jumps From Moving Train

शारीरिक रूप से अशक्त यात्री मजबूरी में प्लेटफॉर्म पर खड़ी ट्रेनों के बायो-टॉयलेट का सहारा लेते हैं। विडंबना यह है कि अमृत भारत और विकास कार्यों के तहत स्टेशन पर सीढ़ियों को चौड़ा करने और लिफ्ट लगाने का काम तो तेज गति से चल रहा है, लेकिन यात्रियों की इस बुनियादी प्राकृतिक जरूरत पर रेल अफसरों का ध्यान नहीं जा रहा।

सर्कुलेटिंग एरिया में भी ताला, पे एंड यूज का सहारा

स्टेशन के सर्कुलेटिंग एरिया में बने महिला शौचालय की स्थिति भी बदतर है। यात्रियों के अनुसार वहां अक्सर ताला लटका रहता है, जिसके कारण यात्रियों को मजबूरन पैसे देकर पे एंड यूज सेवा लेनी पड़ती है। महिला यात्रियों ने बताया कि पूर्व में जब महिला सीनियर डीसीएम तैनात थीं, तब भी यह समस्या प्रमुखता से उठाई गई थी। अब पूर्व रेलवे की महाप्रबंधक (जीएम) भी महिला हैं, ऐसे में उनके आगामी भागलपुर दौरे पर इस मुद्दे को जोरदार ढंग से उठाने की तैयारी है।

शौचालय सिर्फ सुविधा नहीं, महिलाओं की गरिमा का सवाल

घटना के प्रत्यक्षदर्शी सामाजिक कार्यकर्ता संतोष चौधरी ने व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि पुरुषों के लिए सार्वजनिक जगहों पर प्राकृतिक जरूरत पूरी करना अपेक्षाकृत आसान होता है, वे किसी भी दीवार की ओट में खड़े हो जाते हैं। लेकिन महिलाओं को ऐसी स्थिति में भारी संकोच, लज्जा और सुरक्षा की चिंता से जूझना पड़ता है।

कई महिलाएं तो शहर या बाजार निकलने से पहले ही पानी पीना कम कर देती हैं या घर से ही निपट कर निकलती हैं ताकि बाहर शर्मिंदा न होना पड़े। ऐसे व्यस्त प्लेटफॉर्म पर शौचालय का न होना महिलाओं के लिए किसी अभिशाप जैसा है।

लोहिया ने संसद में उठाया था सवाल, आज भी स्थिति जस की तस

तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) के हिंदी विभाग के सेवानिवृत्त प्रोफेसर और एसएसवी कॉलेज कहलगांव के पूर्व प्राचार्य डॉ. पवन कुमार सिंह ने कहा कि महिलाओं के इस दर्द को दशकों पहले प्रखर समाजवादी चिंतक डॉ. राम मनोहर लोहिया ने शिद्दत से महसूस किया था।

तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के मुखर विरोधी होने के बावजूद डॉ. लोहिया ने संसद में कहा था—'मैं आपका प्रशंसक हो जाऊंगा अगर आप देश भर में महिलाओं के लिए शौचालय बना दें, ताकि उन्हें सड़कों के किनारे या सार्वजनिक स्थलों पर शर्मसार न होना पड़े।' डॉ. सिंह ने कहा कि स्वच्छता अभियानों के बाद भी आज भागलपुर जंक्शन की यह घटना बताती है कि सार्वजनिक स्थलों पर महिलाओं की गरिमा और बुनियादी सुविधाओं का सवाल आज भी अधूरा है।

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"यह वाकई गंभीर घटना है। इस समस्या को हल करने के लिए तत्काल प्रभाव से तकनीकी समीक्षा कर कोई ठोस वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जाएगी, ताकि महिला और बुजुर्ग यात्रियों को किसी प्रकार की दिक्कत का सामना न करना पड़े।"

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— शिबराम माझी, सीपीआरओ, पूर्व रेलवे