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    भागलपुर में नल का पानी जहर बन चुका, 12 वार्डों का जल दूषित; आम जनता परेशान

    Updated: Tue, 06 Jan 2026 05:54 AM (IST)

    भागलपुर में नल का पानी अब चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि 12 वार्डों में दूषित जल की आपूर्ति हो रही है। पुराने, जर्जर पाइप और लीकेज के कारण पानी में ...और पढ़ें

    मनिक सरकार घाट पर गंगा में बदला नाले का गंदा पानी। फोटो जागरण

    मनिक सरकार घाट पर गंगा में बदला नाले का गंदा पानी। फोटो जागरण

    HighLights

    1. भागलपुर के 12 वार्डों में दूषित नल का पानी।

    2. जर्जर पाइपलाइन से आर्सेनिक, फ्लोराइड और आयरन का मिश्रण।

    3. दूषित जल से पेट व अन्य गंभीर बीमारियाँ बढ़ रही हैं।

    जागरण संवाददाता, भागलपुर। भागलपुर शहर में नल से पानी आना अब राहत नहीं, बल्कि चिंता का संकेत बन चुका है। सुबह और शाम जैसे ही जलापूर्ति शुरू होती है, तिलकामांझी, आदमपुर, खंजरपुर, बरारी, इशाकचक, नाथनगर और आसपास के इलाकों में लोग सबसे पहले पानी को सूंघते हैं, फिर उसका रंग देखते हैं और उसके बाद तय करते हैं कि इसका इस्तेमाल किया जाए या नहीं। कई घरों में पानी नल से निकलते ही बहा दिया जाता है, क्योंकि भरोसा नहीं बनता। शहर में पानी की सप्लाई मौजूद है, लेकिन सुरक्षित और भरोसेमंद पानी का अभाव साफ दिखाई देता है।

    नगर निगम के वाटर वर्क्स से शहर के 12 वार्डों में पानी की सप्लाई की जा रही है। तकनीकी रूप से पानी सभी इलाकों तक पहुंच रहा है, लेकिन यह सप्लाई दशकों पुराने और जर्जर पाइप नेटवर्क के भरोसे चल रही है।

    कई पाइपलाइनें जंग खा चुकी हैं, जगह-जगह लीकेज है और कई स्थानों पर पाइप सीवेज लाइनों के बेहद करीब से गुजर रही हैं। वाटर वर्क्स से ट्रीटमेंट के बाद निकला पानी जब इन पाइपों से होकर गुजरता है, तो रास्ते में ही उसके दूषित होने की आशंका बनी रहती है। यही कारण है कि सप्लाई वाटर होने के बावजूद लोग उसे पीने योग्य नहीं मान रहे हैं।

    इन 12 वार्डों में सप्लाई भले ही कागजों में नियमित दिखाई देती हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि कई मोहल्लों में पानी का दबाव बेहद कम रहता है। ऊपरी मंजिलों तक पानी नहीं पहुंच पाता और टंकी भरने में घंटों लग जाते हैं। मजबूरी में लोग निजी बोरिंग और डीप बोरिंग का सहारा ले रहे हैं। कई जगहों पर पड़ोस के बोरिंग से पाइप जोड़कर पानी लिया जा रहा है। इससे एक ओर भूजल का अत्यधिक दोहन हो रहा है, तो दूसरी ओर पहले से दूषित ग्राउंड वाटर का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है।

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    Pani

    (वाटर्स वर्क्स में पहुंचाने को बनाया गया अस्थायी पेंपिंग स्टेशन फोटो जागरण) 

    बरारी वाटर वर्क्स से होने वाली सप्लाई हाल के दिनों में और भी चुनौतीपूर्ण रही। गंगा के जलस्तर में कमी आने से इंटेकवेल तक पानी नहीं पहुंच पा रहा था, जिससे चार दिनों तक शहर के कई हिस्सों में जलापूर्ति प्रभावित रही। इंटेकवेल से गंगा की मुख्य धारा करीब 300 फीट दूर खिसक गई, जिसके बाद नगर निगम को चैनल बनाकर पानी पहुंचाने की व्यवस्था करनी पड़ी।

    नदी के बीच अस्थायी पंपिंग स्टेशन बनाया गया है, जहां 20-20 एचपी क्षमता के तीन मोटर पंप लगाए गए हैं। इस व्यवस्था से फिलहाल सप्लाई बहाल की गई है, लेकिन शहरवासियों का कहना है कि यह स्थायी समाधान नहीं है।

    इसी कमजोर सप्लाई सिस्टम के बीच भागलपुर इस समय भूजल दूषण के सबसे गंभीर संकट से गुजर रहा है। ग्राउंड वाटर में एक साथ आर्सेनिक, फ्लोराइड, आयरन और नाइट्रेट की मौजूदगी दर्ज की गई है। इसका असर लोगों की सेहत पर साफ दिख रहा है। जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कालेज अस्पताल, सदर अस्पताल और निजी क्लीनिकों में पेट दर्द, उल्टी, दस्त और कमजोरी की शिकायत लेकर आने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

    तिलकामांझी निवासी राजेश कुमार बताते हैं कि कई बार नल का पानी पीला पड़ जाता है। पहले बच्चों को यही पानी पिलाते थे, लेकिन अब डर लगता है। बरारी की गृहिणी अनीता देवी कहती हैं कि पानी उबालने के बाद भी भरोसा नहीं होता, इसलिए पीने के लिए जार का पानी मंगाना पड़ता है। ग्राउंड रिपोर्ट के जरिये पता चला कि शहर के अधिकांश घरों में नगर निगम का पानी अब केवल नहाने और कपड़े धोने तक सीमित रह गया है।

    हर घर नल-जल योजना के तहत पाइपलाइन का विस्तार जरूर हुआ है, लेकिन जर्जर नेटवर्क, लीकेज और कमजोर दबाव ने इस योजना के उद्देश्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोग अब यह सवाल पूछ रहे हैं कि पानी पहुंचना ज्यादा जरूरी है या सुरक्षित पानी पहुंचना।

    1. पैकेज बाक्स: 12 वार्डों में सप्लाई, लेकिन जर्जर पाइप पर निर्भरता

    • वाटर वर्क्स से 12 वार्डों में जलापूर्ति
    • दशकों पुराने, जंग लगे पाइप से सप्लाई
    • लीकेज और सीवेज लाइन के पास से गुजरती पाइपलाइन
    • दबाव कम, ऊपरी मंजिलों तक पानी नहीं
    • निजी व डीप बोरिंग पर बढ़ती निर्भरता

    2. पैकेज बॉक्स आंकड़े जो डराते हैं

    • फ्लोराइड मानक : 1.0 एमजी/ली., कई इलाकों में 3–7 एमजी/ली.
    • आर्सेनिक मानक : 0.01 एमजी/ली, कई प्रखंडों में 8–40 एमजी/ली
    • आयरन मानक : 1.0 एमजी/ली, कई क्षेत्रों में 2–3 एमजी/ली
    • 900 बोरिंग में ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का दावा

    3. पैकेज बाक्स : फोटो दूषित पानी से बढ़ती बीमारियां

    जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कालेज अस्पताल के मेडिकल आफिसर डा. अमित आनंद कहते है दूषित जल के कारण कई तरह की बीमारी हो सकती है। दूषित जल पीने से पेट दर्द, उल्टी, दस्त, हैजा, टाइफाइड,हेपेटाइटिस ए व ई और बच्चों में रोटावायरस, नोरोवायरस जैसे रोग लग सकते है। लंबे समय तक सेवन से हड्डी, त्वचा और नसों की बीमारी भी हो सकती है।