भागलपुर में 11 माह से अटकी ₹301 करोड़ की अंडरग्राउंड बिजली योजना, पटना को मिली मंजूरी,यहां अभी भी सिर्फ आश्वासन
भागलपुर में 301.58 करोड़ रुपये की भूमिगत बिजली योजना 11 महीने से सरकारी मंजूरी का इंतजार कर रही है, जबकि पटना को हरी झंडी मिल चुकी है। यह योजना शहर को ...और पढ़ें

फाइलों में दबी भागलपुर की 'स्मार्ट बिजली' योजना : 11 महीने से अटकी 355 KM अंडरग्राउंड केबल की मंजूरी, पटना को मिला ग्रीन सिग्नल
HighLights
₹301.58 करोड़ की भूमिगत बिजली योजना 11 माह से लंबित।
पटना को मिली मंजूरी, भागलपुर को अभी भी इंतजार।
शहर को जर्जर तारों, पावर कट से मिलेगी मुक्ति।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। भागलपुर शहरी क्षेत्र को जर्जर ओवरहेड तारों के जाल से मुक्ति दिलाने और बिजली नेटवर्क को पूरी तरह अंडरग्राउंड करने की 301.58 करोड़ रुपये की महात्वाकांक्षी योजना पिछले 11 महीनों से सरकारी फाइलों में कैद है।
11 माह से सिर्फ सरकारी मंजूरी का इंतजार
भागलपुर शहर में 11 केवी, 33 हजार वोल्ट और एलटी (लो टेंशन) लाइनों को पूरी तरह जमीन के नीचे बिछाने का यह महत्वपूर्ण प्रस्ताव राज्य सरकार की अंतिम स्वीकृति का इंतजार कर रहा है।
सूबे के चार बड़े प्रमंडलीय शहरों से मांगा गया था प्राक्कलन
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, सरकार ने पिछले साल अगस्त में भागलपुर के साथ-साथ पटना, मुजफ्फरपुर और गयाजी जैसे प्रमुख प्रमंडलीय शहरों से अंडरग्राउंड केबलिंग का प्राक्कलन मांगा था।
भागलपुर की मुख्य सड़कों से गली-गली तक बिछनी है केबल
बिजली विभाग ने भागलपुर शहर की मुख्य सड़कों से लेकर अंदरूनी गलियों तक कुल 355 किलोमीटर दूरी में तारों को भूमिगत करने के लिए 301.58 करोड़ रुपये का विस्तृत बजट भेजा था।
विधानसभा चुनाव के बाद पटना को मिली मंजूरी, भागलपुर उपेक्षित
विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद राजधानी पटना के लिए तो इस योजना को तुरंत मंजूरी दे दी गई, लेकिन सिल्क सिटी भागलपुर के प्रस्ताव को अब तक हरी झंडी नहीं मिल सकी है।
वर्ष 2027 तक इस पूरी परियोजना को समेटने का था लक्ष्य
बिजली विभाग इस वित्तीय वर्ष में मंजूरी की आस लगाए बैठा था, ताकि साल 2027 तक इस बेहद जरूरी प्रोजेक्ट को पूरा करने के लक्ष्य पर तेजी से काम किया जा सके।
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सड़कों से हट जाएंगे खंभे, सुगम होगा शहरी यातायात
इस परियोजना के धरातल पर उतरने से भागलपुर की सड़कों के किनारे खड़े खतरनाक खंभे पूरी तरह हट जाएंगे, जिससे सड़कों की चौड़ाई बढ़ेगी और ट्रैफिक जाम से मुक्ति मिलेगी।
आंधी और बारिश में नहीं रहेगी पावर कट की समस्या
अंडरग्राउंड केबलिंग होने के बाद मानसून या आंधी-तूफान के समय तार टूटने की समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी, जिससे उपभोक्ताओं को 24 घंटे निर्बाध बिजली मिलेगी।
हालिया आंधी में 36 घंटे तक गुल रही थी बत्ती
बता दें कि मई और जून की आंधी में पेड़ गिरने से कई जगहों पर पोल और तार टूट गए थे, जिसके कारण शहर के कई इलाकों में 24 से 36 घंटे तक ब्लैकआउट रहा था।
बिजली संकट को लेकर बरारी में लोगों ने किया था चक्काजाम
लंबे पावर कट से गुस्साए बरारी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के निवासियों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया था, वहीं खंजरपुर में पेड़ गिरने से एक व्यक्ति की जान भी चली गई थी।
कुल 355 किलोमीटर के दायरे का तकनीकी गणित समझें
इस योजना के तहत शहर में 178 किलोमीटर लंबाई में 33 हजार वोल्ट के तार और 177 किलोमीटर के दायरे में 11 हजार वोल्ट के हाई-टेंशन तारों को भूमिगत किया जाना है।
नेशनल हाईवे और रेलवे क्रॉसिंग का भी बदलेगा स्वरूप
इसमें 16 किमी रेलवे क्रॉसिंग (33KV), 17 किमी रेलवे क्रॉसिंग (11KV) के साथ-साथ 30 किमी नेशनल हाईवे (33KV) और 31 किमी हाईवे (11KV) के तारों को अंडरग्राउंड करना शामिल है।
अटकी योजना: भागलपुर में 355 किमी अंडरग्राउंड बिजली तार बिछाने की 301.58 करोड़ की योजना 11 महीने से लंबित है, जबकि पटना को मंजूरी मिल चुकी है।
बड़ा फायदा: इस प्रोजेक्ट से शहर के 750 खंभे और 4500 ट्रांसफार्मर सड़कों से हट जाएंगे, जिससे सड़कें चौड़ी होंगी और आंधी-बारिश में 36 घंटे वाले पावर कट से परमानेंट मुक्ति मिलेगी।
डेडलाइन: विभाग का लक्ष्य साल 2027 तक इसे पूरा करने का था; अधिकारियों के मुताबिक दूसरे फेज में भागलपुर को मंजूरी मिलते ही 18 महीने में काम पूरा कर लिया जाएगा।
पहले हाई-टेंशन और फिर एलटी तारों को किया जाएगा शिफ्ट
बिजली अधिकारियों के अनुसार, डीपीआर (DPR) मुख्यालय भेजी जा चुकी है; पहले फेज में 33 और 11 हजार वोल्ट के तारों को जमीन के नीचे डालने के बाद एलटी तारों पर काम शुरू होगा।
सड़कों से हटेंगे 750 खंभे और 4500 ट्रांसफार्मर
वर्तमान में शहर के किनारे करीब 750 बिजली के खंभे खड़े हैं और उन पर 4500 ट्रांसफार्मर लटके हैं, जिन्हें हटाकर जमीन पर सीमेंटेड फाउंडेशन बनाकर सुरक्षित शिफ्ट किया जाएगा।
फेज वाइज मिल रही मंजूरी, दूसरे चरण में भागलपुर की उम्मीद
साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (भागलपुर) के अधीक्षण अभियंता संजय कुमार बोरियो ने बताया कि योजना को फेज वाइज मंजूरी मिल रही है और पटना का काम स्वीकृत हो चुका है।
हरी झंडी मिलने के डेढ़ साल के भीतर पूरा होगा काम
अधीक्षण अभियंता के मुताबिक, दूसरे फेज में भागलपुर के डीपीआर को मंजूरी मिलने की पूरी उम्मीद है, मुख्यालय से आदेश आते ही काम शुरू होगा जिसे डेढ़ साल में पूरा कर लिया जाएगा।