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    भागलपुर में विक्रमशिला केंद्रीय विश्वविद्यालय की राह साफ, अंतीचक स्कूल की जमीन के लिए मिला ग्रीन सिग्नल

    Updated: Thu, 16 Jul 2026 11:32 AM (IST)

    भागलपुर के कहलगांव में प्राचीन विक्रमशिला केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना की राह में एक बड़ी प्रशासनिक बाधा दूर हो गई है। शिक्षा विभाग की अंतीचक स्थ ...और पढ़ें

    विक्रमशिला केंद्रीय विश्वविद्यालय निर्माण में बड़ी प्रगति

    विक्रमशिला केंद्रीय विश्वविद्यालय निर्माण में बड़ी प्रगति

    संवाद सूत्र, कहलगांव (भागलपुर)। प्राचीन विक्रमशिला के गौरव को पुनर्जीवित करने और कहलगांव में भव्य केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना की राह में एक और बड़ी प्रशासनिक बाधा दूर हो गई है। इस महा-परियोजना के लिए चिन्हित की गई शिक्षा विभाग की जमीन को यूनिवर्सिटी कैंपस में शामिल करने की कवायद अब बेहद तेज और मुस्तैद गति से शुरू कर दी गई है। कहलगांव अंचल कार्यालय ने विद्यालय की इस कीमती जमीन को केंद्रीय विश्वविद्यालय परियोजना को जल्द से जल्द सौंपने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) की प्रक्रिया शुरू की है।

    डीसीएलआर को भेजा गया प्रस्ताव

    कहलगांव के अंचल अधिकारी (CO) ने भूमि सुधार उप समाहर्ता (DCLR) को आधिकारिक पत्र भेजकर इस संबंध में आवश्यक एनओसी जारी करने का विशेष अनुरोध किया है। पत्र के मुताबिक, अंतीचक मौजा में स्थित शिक्षा विभाग की यह सरकारी भूमि केंद्रीय विश्वविद्यालय के मुख्य परिसर के लिए नक्शे में बेहद जरूरी क्षेत्र में पड़ती है। अंचल कार्यालय ने सक्षम प्राधिकार से त्वरित अनापत्ति प्राप्त करने के लिए जमीन का पूरा डिजिटल और भौतिक रिकॉर्ड तथा विस्तृत विवरण उच्चाधिकारियों को उपलब्ध करा दिया है।

    मध्य विद्यालय के नाम दर्ज

    सरकारी अभिलेखों के अनुसार, थाना संख्या-63 के तहत विभिन्न खाता और खेसरा नंबरों में दर्ज यह पूरी जमीन वर्तमान में पूरी तरह शिक्षा विभाग के अधीन है। ऑनलाइन एवं ऑफलाइन जमाबंदी के रिकॉर्ड के मुताबिक, यह भूमि अंतीचक स्थित ऐतिहासिक विक्रमशिला मध्य विद्यालय के नाम से खतियान में दर्ज बताई गई है। प्रशासन ने त्वरित एनओसी के लिए खतियान की प्रतिलिपि के साथ पत्र की कॉपियां डीएम भागलपुर, अपर समाहर्ता, एसडीओ और जिला शिक्षा पदाधिकारी को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी हैं।

    इलाके के विकास को रफ्तार

    राज्य सरकार और जिला प्रशासन द्वारा विभिन्न विभागों की जमीनों को एक साथ जोड़कर यूनिवर्सिटी को सौंपने की इस बड़ी पहल को स्थानीय लोग मील का पत्थर मान रहे हैं। अंतीचक और कहलगांव के प्रबुद्ध नागरिकों का मानना है कि इस एनओसी के मिलते ही विश्वविद्यालय के भव्य भवन निर्माण की अंतिम रुकावट भी पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना से इस पूरे अंग प्रदेश में अंतरराष्ट्रीय स्तर की उच्च शिक्षा, आधुनिक शोध, नए रोजगार और बुनियादी विकास को एक नया आसमान मिलेगा।

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