संकट के बीच गंगा विहार का अहसास, भागलपुर पुल घाट बना चलता-फिरता पर्यटन स्थल
विक्रमशिला सेतु बंद होने के बाद भागलपुर का बरारी पुल घाट एक जीवंत पर्यटन स्थल में बदल गया है। नावों की आवाजाही, प्रशासनिक व्यवस्था और स्थानीय स्टॉलों ...और पढ़ें

बरारी घाट से जहाज पर खड़े होकर सफर करते लोग। जागरण

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ललन तिवारी, भागलपुर। विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होकर बंद होने के बाद जहां एक ओर लोगों की दिनचर्या अस्त-व्यस्त हो गई है, वहीं दूसरी ओर भागलपुर का बरारी पुल घाट इन दिनों एक अलग ही रंग में नजर आने लगा है।
गंगा किनारे का पूरा इलाका अब किसी गंगा विहार या छोटे पर्यटन स्थल जैसा प्रतीत हो रहा है। नावों की लंबी कतार, जहाजों की आवाजाही, रंग-बिरंगे टेंट, यात्रियों की चहल-पहल और प्रशासनिक सक्रियता ने घाट के दृश्य को पूरी तरह बदल दिया है।
संकट में भी उभर आया भागलपुर का जीवंत चेहरा
विक्रमशिला सेतु बंद होने से लोगों की परेशानी कम नहीं हुई है, लेकिन इस जलमार्ग ने भागलपुर के गंगा घाट को नया सामाजिक और सांस्कृतिक रंग जरूर दे दिया है। संकट के बीच भी गंगा किनारे जीवन अपनी लय में बहता दिख रहा है।
नावों की आवाजाही, लोगों की चहल-पहल और प्रशासनिक सक्रियता ने बरारी पुल घाट को इन दिनों एक विहंगम, जीवंत और यादगार दृश्य में बदल दिया है।
गंगा की लहरों पर तैरता जीवंत दृश्य
सुबह होते ही गंगा घाट पर हलचल शुरू हो जाती है। एक ओर नाविक यात्रियों को आवाज लगाते नजर आते हैं। आइए, इधर आइए, नाव खुल रही है। तो दूसरी ओर गंगा की लहरों पर एक साथ चलती नावों की कतार बीच में जहाज अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करती है। दूर से देखने पर ऐसा लगता है मानो किसी पर्यटन नगरी में गंगा विहार का आयोजन हो रहा हो।
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गंगा की धारा के बीच धीरे-धीरे सरकती नावें, यात्रियों की भीड़ और किनारे पर पसरी चहल-पहल घाट को जीवंत बना रही है। बरारी पुल घाट का यह नजारा अब लोगों को ठहरकर देखने के लिए मजबूर कर रहा है।
रंग-बिरंगे टेंट ने बढ़ाई रौनक
उस पार बनाए गए प्रशासनिक सूचना केंद्र, सहायता शिविर, स्वास्थ शिविर और रंग-बिरंगे टेंट पूरे क्षेत्र को किसी मेले जैसा स्वरूप दे रहे हैं। यात्रियों को दिशा-निर्देश देने के लिए लगाए गए बोर्ड, पुलिस की तैनाती और आपदा मित्रों, एसडीआरएफ की टीम, गोताखोर की व्यवस्था की सक्रियता दृश्य को आकर्षित कर रही है।
जहाज लगते ही प्रशासनिक कर्मी तत्पर हो जाते हैं। कोई भीड़ नियंत्रित करता दिखता है तो कोई महिलाओं और बुजुर्गों को सुरक्षित उतारने में मदद करता नजर आता है। यह समन्वय पूरे दृश्य को और व्यवस्थित बना देता है।
जीविका दीदी के स्टॉल पर उमड़ रही भीड़
घाट किनारे जीविका दीदियों द्वारा लगाए गए खानपान के स्टॉल यात्रियों के लिए राहत केंद्र बन गए हैं। यहां चाय, नाश्ता और भोजन उचित कीमत पर उपलब्ध कराया जा रहा है। सुबह से शाम तक इन स्टॉल पर लोगों की भीड़ लगी रहती है।
कई यात्री जहाज के इंतजार में चाय की चुस्की लेते दिखते हैं तो कोई गर्म पूड़ी-सब्जी खाकर आगे की यात्रा पर निकल पड़ता है। स्थानीय स्वाद और सहज व्यवस्था यात्रियों को थोड़ी राहत दे रही है।
घाट पर टोटो, स्वास्थ्य और सुरक्षा की मुकम्मल व्यवस्था
नाव या जहाज से उतरते ही यात्रियों को शहर के विभिन्न इलाकों तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त संख्या में टोटो खड़े रहते हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम, एंबुलेंस और सुरक्षा बलों की मौजूदगी ने घाट की व्यवस्था में चार चांद लगा दिए हैं।
महिलाओं, बुजुर्गों और बीमार यात्रियों के लिए विशेष सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है। यही कारण है कि संकट के इस दौर में भी लोग व्यवस्था की तारीफ करते नजर आ रहे हैं।
डीएम से लेकर अधिकारी तक कर रहे लगातार निगरानी
दिनभर जिला प्रशासन के अधिकारी घाट का निरीक्षण करते रहते हैं। स्वयं जिला पदाधिकारी समय-समय पर पहुंचकर व्यवस्था का जायजा ले रहे हैं। अधिकारियों की लगातार मौजूदगी से कर्मियों में भी सतर्कता बनी हुई है।