विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

इंडस्ट्रियल कॉरिडोर : जहां आज सैलाब का तांडव, वहां कल दौड़ेंगी गाड़ियां! बिहार में गंगा किनारे बनेगा तटबंध व फोरलेन

Published: Mon, 07 Sep 2026 01:08 PM (IST)

Bihar Ganga River Embankment Four Lane Road: बिहार सरकार गंगा नदी के दोनों किनारों पर विशाल तटबंध और फोरलेन सड़क ...और पढ़ें

Bihar Ganga River Embankment Four Lane Road: गंगा के दोनों किनारों पर बनेंगे तटबंध और फोरलेन सड़क, गाद से विकसित होगा नया औद्योगिक कॉरिडोर

Bihar Ganga River Embankment Four Lane Road: गंगा के दोनों किनारों पर बनेंगे तटबंध और फोरलेन सड़क, गाद से विकसित होगा नया औद्योगिक कॉरिडोर

HighLights

  1. गंगा के दोनों किनारों पर बनेंगे विशाल तटबंध।

  2. तटबंधों के ऊपर बनेगी हाई-स्पीड फोरलेन सड़क।

  3. ड्रेजिंग से निकली गाद से बनेंगे औद्योगिक क्षेत्र।

जागरण संवाददाता, भागलपुर। Bihar Ganga River Embankment Four Lane Road: हर वर्ष गंगा के रौद्र रूप में जलमग्न होने वाले भागलपुर सहित समूचे बिहार के सैकड़ों गांवों, बदलती जलधारा और भीषण कटाव से उजड़ती बस्तियों के दिन अब हमेशा के लिए बहुरने वाले हैं।

प्रतिवर्ष बाढ़ के बाद केवल राहत बांटने और कटाव के बाद तात्कालिक बचाव तक सीमित रहने की पारंपरिक व्यवस्था को बदलते हुए बिहार सरकार अब एक युगांतरकारी व स्थायी समाधान पर काम कर रही है। गंगा की मुख्य धारा को एक दायरे में व्यवस्थित करने और उसके दोनों छोर को सुरक्षित करते हुए सड़क, उद्योग व रोजगार का नया आर्थिक गलियारा (इकोनॉमिक कॉरिडोर) बनाने की महत्वाकांक्षी परिकल्पना को धरातल पर उतारने की रूपरेखा तैयार कर ली गई है।

योजना के तहत बिहार की सीमा में गंगा के दोनों किनारों पर विशाल तटबंध विकसित किए जाएंगे, नदी का तल गहरा करने के लिए वृहद स्तर पर ड्रेजिंग कराई जाएगी और निर्मित तटबंधों के शीर्ष पर हाई-स्पीड फोरलेन सड़क बनाई जाएगी। यदि यह मेगा प्रोजेक्ट आकार लेता है, तो गंगा किनारे का विस्तृत क्षेत्र सिर्फ जल प्रलय से सुरक्षित ही नहीं होगा, बल्कि उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच व्यापार, उद्योग और तेज परिवहन की नई जीवनरेखा बन जाएगा।

गाद से भरे जाएंगे गड्ढे, स्थापित होंगे औद्योगिक क्षेत्र

गंगा के अनियंत्रित फैलाव और हर साल आने वाली विभीषिका की सबसे प्रमुख वजह नदी के तल में तेजी से जमती गाद (सिल्ट) है। कोसी, बागमती, कमला और गंडक जैसी सहायक नदियां हिमालयी क्षेत्रों से भारी मात्रा में गाद लाकर गंगा में गिराती हैं, जिससे बिहार में गंगा का तल अत्यंत उथला हो चुका है। बिहार सरकार लंबे समय से राष्ट्रीय गाद प्रबंधन नीति की मांग करती रही है और 2025 की पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में भी इस पर आम सहमति बन चुकी है।

  • बिहार में गंगा के दोनों किनारों पर मजबूत तटबंध और उसके ऊपर फोरलेन सड़क निर्माण की दीर्घकालिक योजना पर काम शुरू

  • गंगा के बेतरतीब फैलाव को रोकने व गहराई बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर होगी ड्रेजिंग, केंद्र को भेजा जाएगा विस्तृत प्रस्ताव

  • ड्रेजिंग से निकलने वाली भारी गाद (सिल्ट) से निचले इलाकों को भरकर ऊंचा किया जाएगा, स्थापित होंगे नए औद्योगिक क्षेत्र

  • जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव चंद्रशेखर सिंह बोले— मुख्यमंत्री के विजन पर तैयार हो रहा है नदी प्रबंधन व विकास का मेगा प्लान

प्रस्तावित कार्ययोजना में इस गाद को ही विकास का हथियार बनाया जाएगा। ड्रेजिंग से निकलने वाली लाखों टन गाद को तटबंध के बाहरी निचले व जलजमाव वाले हिस्सों में डालकर जमीन को कई फीट ऊंचा किया जाएगा। इससे एक साथ दो महत्वपूर्ण लक्ष्य पूरे होंगे— नदी की मुख्य धारा गहरी होकर जलधारण क्षमता कई गुना बढ़ा लेगी और दूसरी तरफ किनारे की अनुपयोगी निचली जमीन समतल होकर नए औद्योगिक क्षेत्रों (इंडस्ट्रियल हब्स) की स्थापना के लिए उपलब्ध हो जाएगी।

तटबंध पर फर्राटा भरेंगी गाड़ियां, भागलपुर को बड़ा फायदा

इस पूरी योजना का सबसे क्रांतिकारी पहलू तटबंध के ऊपर प्रस्तावित फोरलेन सड़क है। यह सड़क केवल तटबंध की सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि गंगा के समानांतर एक निर्बाध बाईपास कॉरिडोर का काम करेगी। व्यवस्थित नदी, मजबूत तटबंध और ऊपर दौड़ती गाड़ियां पूरे इलाके के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल देंगी।

भागलपुर जिले के संदर्भ में इस परियोजना की अहमियत सर्वाधिक है। जिले में कहलगांव, पीरपैंती, सबौर, नाथनगर और नवगछिया के इलाके हर साल बाढ़ व भीषण कटाव से तबाह होते हैं। इस योजना के क्रियान्वयन से भागलपुर को कटाव और बाढ़ से स्थायी मुक्ति मिलेगी और जिले में उद्योगों के लिए जमीन का नया रकबा भी तैयार हो सकेगा।

विस्तृत सर्वेक्षण और व्यवहार्यता अध्ययन जल्द

जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव चंद्रशेखर सिंह के अनुसार, इस विशालकाय प्रोजेक्ट की व्यवहार्यता जांचने के लिए जल्द ही व्यापक सर्वे शुरू किया जाएगा। परियोजना का दायरा अत्यधिक विशाल होने के कारण इसके हाइड्रोलॉजिकल अध्ययन, नदी की प्राकृतिक गति, पर्यावरणीय प्रभाव (ईआईए) और भूमि उपलब्धता का तकनीकी स्तर पर सूक्ष्म परीक्षण होगा। इसके उपरांत केंद्र सरकार से तकनीकी व वित्तीय सहायता के लिए आधिकारिक डीपीआर भेजी जाएगी।

"मुख्यमंत्री के दूरदर्शी विजन के अनुरूप गंगा को केवल बाढ़ और तबाही की समस्या मानकर नहीं, बल्कि नदी प्रबंधन, सुरक्षित परिवहन और औद्योगिक विकास के एक ऐतिहासिक अवसर के रूप में बदलने की दिशा में ठोस कार्य शुरू हो चुका है।"

-

चंद्रशेखर सिंह, प्रधान सचिव, जल संसाधन विभाग, बिहार