कौन हैं सेंसर बोर्ड में शामिल विनोद अनुपम? बिहार में जन्मे लाल का अब तक ऐसा रहा सिनेमाई सफर
Vinod Anupam CBFC Board Member Profile: केंद्र सरकार ने खगड़िया के मूल निवासी और राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता विनोद अनुपम ...और पढ़ें

Vinod Anupam CBFC Board Member Profile: बिहार के राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता विनोद अनुपम बने सेंसर बोर्ड के सदस्य; जानें उनका सफर, किताबें और उपलब्धियां
HighLights
विनोद अनुपम केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के सदस्य नियुक्त।
खगड़िया के मूल निवासी, राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता समीक्षक।
अब फिल्मों के प्रमाणन प्रक्रिया में निभाएंगे अहम भूमिका।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। Vinod Anupam CBFC Board Member Profile: बिहार की सांस्कृतिक और साहित्यिक मेधा को राष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर ऐतिहासिक पहचान मिली है। खगड़िया की माटी के लाल और सिनेमाई विमर्श में देश के शीर्ष नामों में शुमार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता प्रख्यात फिल्म समीक्षक विनोद अनुपम अब देश भर की फिल्मों और वृत्तचित्रों के वैधानिक प्रमाणन की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाएंगे।
केंद्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी/सेंसर बोर्ड) का पुनर्गठन करते हुए उन्हें आगामी तीन वर्षों के लिए बोर्ड का सदस्य मनोनीत किया है।
इस पुनर्गठित बोर्ड में सिनेमा, कला, साहित्य और मनोरंजन जगत की चुनिंदा राष्ट्रीय हस्तियों को शामिल किया गया है। अब सिनेमाघरों में फिल्मों के सार्वजनिक प्रदर्शन से पूर्व प्रमाणन की कसौटी तय करने में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी।
-1789714109492.webp)
विनोद अनुपम को यह राष्ट्रीय जिम्मेदारी मिलने पर भागलपुर जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन समेत बिहार के कला, साहित्य और सिनेमा जगत के लोगों ने उन्हें बधाई दी है और इसे राज्य के लिए गौरव का क्षण बताया है।
मुंगेर में जन्म, खगड़िया पैतृक घर और FTII से सिनेमाई तालीम
अपनी पृष्ठभूमि साझा करते हुए विनोद अनुपम ने बताया कि उनका जन्म मुंगेर के जमालपुर में हुआ था। उस समय उनके पिता स्वर्गीय सुरेश चंद्र राय जमालपुर में बिहार सरकार की प्रशासनिक सेवा में पदस्थापित थे।
उनका मूल संबंध खगड़िया जिले के परबत्ता प्रखंड अंतर्गत कबेला गांव से है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक स्कूली शिक्षा मुंगेर के आरबी हाई स्कूल से पूरी की। इसके उपरांत जेआरएस कॉलेज, जमालपुर से इंटरमीडिएट और स्नातक की उपाधि ली।
-1789714186041.webp)
वर्ष 1984 में उन्होंने तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर (एमए) की डिग्री हासिल की। सिनेमाई बारीकियों और दृश्य विधा के सैद्धांतिक पक्ष को गहराई से समझने के लिए उन्होंने वर्ष 2000 में फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एफटीआईआई), पुणे से फिल्म एप्रिसिएशन का विशेष पाठ्यक्रम पूरा किया।
2002 में जीता राष्ट्रीय पुरस्कार, दूरदर्शन के लिए लिखीं पटकथाएं
विनोद अनुपम भारतीय सिनेमा के गंभीर विश्लेषण और निष्पक्ष समीक्षा के लिए जाने जाते हैं। सिनेमाई लेखन और आलोचना में उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2002 में 49वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में देश के सर्वश्रेष्ठ फिल्म समीक्षक (स्वर्ण कमल) के सर्वोच्च सम्मान से नवाजा गया था।
-1789714273451.webp)
इससे पूर्व 1988 में उन्हें राज्य स्तर पर सर्वश्रेष्ठ युवा लेखक का पुरस्कार भी मिल चुका है। वे 65वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार की मुख्य जूरी के सदस्य और नेशनल म्यूजियम ऑफ इंडियन सिनेमा की इनोवेशन कमेटी के सदस्य भी रह चुके हैं।
इसके अलावा, वे बिहार संगीत नाटक अकादमी, पटना के पूर्व सचिव व सदस्य तथा पूर्वी क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (ईजेडसीसी), कोलकाता के सदस्य रह चुके हैं।
अगस्त 2024 में बिहार सरकार ने उन्हें बिहार राज्य फिल्म विकास एवं वित्त निगम का मुख्य परामर्शी नियुक्त किया था, जहां वे राज्य की फिल्म नीति के निर्माण में सक्रिय योगदान दे रहे हैं।
दूरदर्शन के लिए उन्होंने मिथिला की संस्कृति पर आधारित लोकप्रिय धारावाहिकों और बिहार सरकार के लिए राज्य की समृद्ध विरासत व इतिहास पर कई वृत्तचित्रों (डॉक्यूमेंट्रीज) की पटकथा भी लिखी है।
-1789714327102.webp)
'बिहार के 100 रत्न' के लेखक, प्रमुख पत्रिकाओं में संपादन कार्य
विनोद अनुपम ने संस्कृति और कला पर कई कालजयी कृतियों की रचना की है। उनकी प्रमुख कॉफी टेबल पुस्तकों में 'बिहार विहार' (बिहार की संस्कृति पर आधारित) और 'बिहार के 100 रत्न' (राज्य की महान सांस्कृतिक विभूतियों पर केंद्रित) अत्यंत लोकप्रिय रही हैं।
संपादन के क्षेत्र में भी उनका योगदान विशिष्ट रहा है। वे कला एवं संस्कृति विभाग की मासिक पत्रिका 'पटना कलम' (अक्टूबर 2009 से निरंतर), बिहार राजभवन की पत्रिका 'राजभवन संवाद' (अगस्त 2018 से), पर्यावरण एवं वन विभाग की पत्रिका 'गोरैया' और जनसंपर्क विभाग की 'बिहार समाचार' जैसी प्रतिष्ठित पत्रिकाओं के संपादक रहे हैं।
सिनेमा समीक्षा के क्षेत्र में वे दैनिक जागरण, प्रभात खबर, हिंदुस्तान और आज जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में दशकों तक साप्ताहिक समीक्षा कॉलम लिखते रहे हैं।
साथ ही इंडिया टुडे, कथादेश, पाखी और सारिका जैसी अग्रणी पत्रिकाओं में उनके शोधपरक आलेख निरंतर प्रकाशित होते रहे हैं।
ओटीटी के दौर में सीबीएफसी की जवाबदेही बढ़ी: विनोद अनुपम
सीबीएफसी सदस्य मनोनीत होने के बाद विनोद अनुपम ने कहा कि सिनेमा की कसौटी पर अब नई और संवेदनशील भूमिका निभाने की जिम्मेदारी मिली है।
वर्तमान दौर में सिनेमाघरों के साथ-साथ ओटीटी और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर जिस तरह से नए कार्यक्रम आ रहे हैं, उससे सेंसर बोर्ड की सामाजिक और सांस्कृतिक जवाबदेही पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।
उनका निरंतर प्रयास रहेगा कि सिनेमैटोग्राफ अधिनियम के तहत तय मानकों का अनुपालन करते हुए स्वस्थ, सुरुचिपूर्ण और गुणवत्तापूर्ण फिल्में दर्शकों तक पहुंचें।
यह भी पढ़ें- बिहार के 4 फिल्मी सितारों का राष्ट्रीय मंच पर जलवा, संजय मिश्रा समेत इन नामों को मिलेगा 72nd National Film Awards
