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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 04, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Bihar Teachers: चली जाएगी इन शिक्षकों की नौकरी? बिहार में सामने आया बड़ा फर्जीवाड़ा, अब इन 22 जिलों में जांच का आदेश

    By Jagran News Edited By: Mukul Kumar
    Updated: Mon, 04 Mar 2024 12:45 PM (GMT+05:30)

    Bihar Education एक सीटेट नंबर पर भागलपुर सहित पांच जिलों में अलग-अलग शिक्षक नौकरी कर रहे हैं। यह बातें तब सामने आई जब नालंदा में सक्षमता परीक्षा के लि ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. सीटेट नंबर पर भागलपुर सहित पांच जिलों में अलग-अलग शिक्षकों के नौकरी करने की मिली जानकारी
    2. नालंदा में सक्षमता परीक्षा के कागजातों की जांच करने के दौरान मामला हुआ उजागर
    3. शिक्षा विभाग ने भागलपुर, बांका व जमुई समेत 22 जिलों को अपने यहां जांच करने का दिया निर्देश

    जागरण संवाददाता, भागलपुर। बिहार में फर्जी तरीके से शिक्षकों की बहाली का सनसनीखेज मामला सामने आया है। एक ही सीटेट नंबर पर पांच जिलों में अलग-अलग शिक्षकों के नौकरी करने की बातें सामने आई है।

    भागलपुर में अरुण राय, कटिहार में जमा नाज, सीतामढ़ी में कुमारी अनुराधा, बेगूसराय में सदानंद और नालंदा के मोसिमपुर चंडी में शिक्षक परमानंद कुमार सिंह सीटेट नंबर 230309272 पर वर्षों से नौकरी करते आ रहे हैं।

    यह बातें तब सामने आई जब नालंदा में सक्षमता परीक्षा के लिए प्रवेश पत्र जारी करने के दौरान शिक्षकों के कागजातों की जांच की जा रही थी। जिसके बाद माध्यमिक शिक्षा निदेशक द्वारा भागलपुर अररिया, मुंगेर, कटिहार, बांका व जमुई समेत 22 जिलों में जांच करने का निर्देश दिया है।

    भागलपुर समेत पांच जिलों में अलग अलग शिक्षक कार्यरत

    नालंदा में सक्षमता परीक्षा के लिए कागजातों की जांच के दौरान 71 शिक्षक ऐसे पाए गए, जिनके सीटेट प्रमाणपत्र को लेकर संदेह व्यक्त किया गया। जब इसकी जांच हुई तो जानकारी मिली कि एक समान सीटेट नंबर पर भागलपुर समेत पांच जिलों में अलग अलग शिक्षक कार्यरत हैं।

    हालांकि, मिली जानकारी के मुताबिक इन शिक्षकों को सक्षमता परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड जारी नहीं किया गया है। इधर, डीपीओ स्थापना देवनारायण पंडित ने बताया कि विभागीय निर्देश पर जिस शिक्षक के बारे में जानकारी आई थी, उनके अलावा अन्य शिक्षकों के कागजात की भी जांच की जा रही है, ताकि यह पता चल सके कि इसके अलावे भी अन्य शिक्षक फर्जी दस्तावेज पर कार्यरत तो नहीं हैं।

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