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    फरवरी–मार्च 2026 में कब हैं विवाह, व्रत और सिद्ध योग? महाशिवरात्रि से होली तक प्रत्‍येक द‍िन के बारे में जानें

    Updated: Sat, 07 Feb 2026 02:45 AM (IST)

    भागलपुर के नवगछिया स्थित अतिप्राचीन सिद्धपीठ मणिद्वीप श्री दुर्गा मंदिर भ्रमरपुर में फरवरी-मार्च 2026 के लिए विशेष धार्मिक आयोजनों की घोषणा की गई है। ...और पढ़ें

    भागलपुर के नवगछ‍िया क्षेत्र अंतर्गत ब‍िहपुर के भ्रमरपुर न‍िवासी भजन सम्राट डॉ. ह‍िमांशु मोहन म‍िश्र दीपक जी ने कहा सर्व भवन्‍तु सुख‍िन:।

    भागलपुर के नवगछ‍िया क्षेत्र अंतर्गत ब‍िहपुर के भ्रमरपुर न‍िवासी भजन सम्राट डॉ. ह‍िमांशु मोहन म‍िश्र दीपक जी ने कहा सर्व भवन्‍तु सुख‍िन:।

    HighLights

    1. भ्रमरपुर दुर्गा मंदिर में फरवरी-मार्च 2026 के धार्मिक अनुष्ठान।

    2. महाशिवरात्रि, होली, एकादशी सहित कई व्रत-उत्सव मनाए जाएंगे।

    3. विवाह, मुंडन, उपनयन के लिए शुभ तिथियों की विस्तृत सूची।

    ड‍िज‍िटल डेस्‍क, भागलपुर। भागलपुर के नवगछ‍िया क्षेत्र अंतर्गत ब‍िहपुर में एक प्रस‍िद्ध धार्म‍िक केंद्र है। अतिप्राचीन सिद्धपीठ मणिद्वीप श्री दुर्गा मंदिर भ्रमरपुर श्रद्धा, साधना और सनातन परंपरा का जीवंत केंद्र है। फाल्गुन मास में यहां विशेष धार्मिक वातावरण बनता है, जब प्रातः 8 बजे और संध्या 5:45 बजे माता की आरती में भक्तों की भीड़ उमड़ती है।


    इस पावन अवधि में विवाह, मुंडन, उपनयन, एकादशी, महाशिवरात्रि, अमावस्या, होली सहित अनेक व्रत-उत्सव और सिद्ध योग पड़ रहे हैं, जो मंदिर की आध्यात्मिक महत्ता को और बढ़ाते हैं। निर्धारित तिथियों पर होने वाले अनुष्ठान, पूजा एवं आयोजनों में भाग लेकर भक्त पुण्यलाभ अर्जित करते हैं। भदवा 16 फरवरी (सोमवार) रात 8:52 से 21 फरवरी (शनिवार) रात 7:58 तक है। इस दौरान श्री दुर्गा मंदिर में तीन दिवसीय अनुच्छान होगा। 12 से 16 मार्च तक श्रीराम कथा भी यहां आयोज‍ित की जाएगी।

    दीपक जी ने सभी व्रत‍-त्‍योहार को भ्रमरपुर के मां दुर्गा मंद‍िर में ल‍िप‍िबद्ध क‍िया है

    • 2.2.26 (सोमवार) - कृष्ण पक्ष प्रतिपदा, शिववास, अग्निनाम
    • 5.2.26 (गुरुवार) - विवाह (रात 1:32 के बाद)
    • 6.2.26 (शुक्रवार) - मुण्डन, विवाह, शिववास, अग्निवास
    • 8.2.26 (रविवार) - विवाह, सिद्ध योग, अग्निवास
    • 13.2.26 (शुक्रवार) - विजया एकादशी व्रत, कृष्ण संक्रान्ति
    • 14.2.26 (शनिवार) - गौ के दही से पारण, प्रदोष व्रत, शिववास, अग्‍न‍िवास, मातृ-प‍ितृ पूजन द‍िवस
    • 15.2.26 (रविवार) - महाशिवरात्रि व्रत, वैद्यनाथ देवघर प्रत‍िष्‍ठा द‍िवस
    • 16.2.26 (सोमवार) - सोमवती अमावस्या, अप. 4:55 के बाद
    • 17.2.26 (मंगलवार) - अमावस्या
    • 18.2.26 (बुधवार) - प्रतिपदा शुक्ल, रामकृष्ण परमहंस जयंती, जनकपुर की पर‍िक्रमा
    • 19.2.26 (गुरुवार) - विवाह, द्विरागमन, अमृत योग, शिववास
    • 20.2.26 (शुक्रवार) - विवाह, द्विरागमन, देवादि‍ प्रतिष्ठा, मुंडन
    • 22.2.26 (रविवार) - विवाह, उपनयन, देवादि‍ प्रतिष्ठा, द्विरागमन
    • 25.2.26 (बुधवार) - विवाह, द्विरागमन, गृहप्रवेश
    • 26.2.26 (गुरुवार) - विवाह, मुण्डन, उपनयन, गृहप्रवेश, देवादि‍ प्रतिष्ठा
    • 27.2.26 (शुक्रवार) - आमलकी एकादशी व्रत, शुक्ल व्रतोद्यापन, मुंडन
    • 28.2.26 (शनिवार) - गौ-दही से पारण, गृहारंभ, गृहप्रवेश, श‍िववास
    • 01.3.26 (रविवार) - प्रदोष व्रत, देवादि‍ प्रतिष्ठा, अग्‍न‍िवास, शिववास, सिद्धि‍ योग
    • 02.3.26 (सोमवार) - भ्रमरपुर में धुरखेल, होल‍िका दहन रात्र‍ि में
    • 03.3.26 (मंगलवार) - पूर्णिमा, होली (भ्रमणपुर), चैतन्य महाप्रभु की जयंती

    अतिप्राचीन है सिद्धपीठ मणिद्वीप श्री दुर्गा मंदिर 

    भ्रमरपुर के न‍िवासी और भजन सम्राट डॉ. ह‍िमांशु मोहन मिश्र 'दीपक जी' अतिप्राचीन सिद्धपीठ मणिद्वीप श्री दुर्गा मंदिर में संपूर्ण व्यवस्था को श्रद्धा और समर्पण के साथ संभालते हैं। उनके अथक प्रयासों से मंदिर की ख्याति और भी बढ़ गई है और यह क्षेत्र के भक्तों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया है। दीपक जी के प्रयासों से न केवल मंदिर का धार्मिक महत्व बढ़ा है, बल्कि भक्तों में भी आध्यात्मिक अनुशासन और आस्था की भावना और प्रगाढ़ हुई है।

    मां की है अद्भुत कृपा

    दीपक जी कहते हैं कि “हम मां को क्या दे सकते हैं, उनकी कृपा से ही हमारी यात्रा सफल है। मां की गोद में खेलना और उनकी सेवा करना जीवन का सर्वोच्च आशीर्वाद है। इस मंदिर की पहचान पूजा, कथा श्रवण और सेवा है। मां अपने भक्तों पर हमेशा कृपा करती हैं और उनके आंगन में प्रवेश मात्र से ही कल्याण की अनुभूति होती है।” दीपक जी ने कहा के यहां अक्‍सर इस क्षेत्र के ख्‍यात‍िप्राप्‍त स‍िद्ध संत जगद्गुरु रामानुजाचार्य श्री रामचंद्राचार्य परमहंस स्‍वामी आगमानंद जी माहराज का आगमन होता है। वे यहां की व्‍यवस्‍था को भी देखते हैं। साथ ही घंटों मां दुर्गा के सान‍िघ्‍य में रहकर ध्‍यान, साधना, जप-तप, हवन व पूजन करते हैं। 

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