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2 साल तक YouTube पर देखी सर्जरी, फिर जर्मनी से भारत पहुंचे डॉ. वुल्फ; ब‍िहार में सीख रहे जटिल इलाज के गुर

Published: Fri, 21 Aug 2026 12:49 PM (IST)

जर्मनी के डॉ. जान वुल्फ ब‍िहार के भागलपुर में डॉ. इम्तेयज़ुर रहमान से जटिल सर्जरी की तकनीक सीखने आए हैं। ...और पढ़ें

म्यूनिख यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल के ऑर्थोपेडिक सर्जन क्लिनिकल ऑब्जर्वेशन के लिए 15 दिनों के दौरे पर भागलपुर पहुंचे

म्यूनिख यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल के ऑर्थोपेडिक सर्जन क्लिनिकल ऑब्जर्वेशन के लिए 15 दिनों के दौरे पर भागलपुर पहुंचे

जागरण संवाददाता, भागलपुर। भारतीय डॉक्टरों की प्रतिभा और चिकित्सा कौशल का डंका अब वैश्विक स्तर पर बज रहा है। यूट्यूब और डिजिटल मीडिया के जरिए लगातार दो वर्षों तक भागलपुर के चिकित्सक की जटिल सर्जरी और मरीजों के त्वरित सुधार को देखने के बाद जर्मनी के एक प्रसिद्ध सर्जन सीधे भागलपुर पहुंच गए हैं। वे यहां 15 दिनों तक रहकर सर्जरी की बारीकियों और कम संसाधनों में सटीक इलाज के तौर-तरीकों का अध्ययन कर रहे हैं।

यह अनोखा अनुभव साझा किया है जर्मनी के एलएमयू यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल (म्यूनिख मस्कुलोस्केलेटल यूनिवर्सिटी सेंटर) के डिपार्टमेंट ऑफ ट्रॉमा सर्जरी एंड ऑर्थोपेडिक्स में रेजिडेंट फिजिशियन के रूप में कार्यरत डॉ. जान वुल्फ़ (Dr. Jan Wolff) ने।

15 दिनों के क्लिनिकल ऑब्जर्वेशन पर पहुंचे हैं भागलपुर

डॉ. जान 15 अगस्त को 15 दिवसीय क्लिनिकल ऑब्जर्वेशन प्रोग्राम के तहत तातारपुर स्थित डॉ. इम्तेयाजुर रहमान के 'एडवांस ट्रॉमा एंड माइक्रोसर्जिकल सेंटर' पहुंचे। वे प्रतिदिन ऑपरेशन थिएटर (OT) में मौजूद रहकर सर्जरी की पूरी प्रक्रिया को समझ रहे हैं।

German Doctor Learns Surgery from Bhagalpur Dr Rahman (1)

डॉ. इम्तेयाजुर रहमान ने बताया कि डॉ. जान यहां अस्पताल में मरीजों की भारी संख्या (पेशेंट फ्लो) और डॉक्टरों की कार्यशैली को देखकर बेहद प्रभावित हैं। जर्मनी में मरीजों की ऐसी आमद देखने को नहीं मिलती। डॉ. जान यहां मरीजों के डायग्नोसिस, ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल, सर्जरी के तात्कालिक निर्णय और ऑपरेशन के व्यावहारिक तरीकों की ट्रेनिंग ले रहे हैं।

'यूट्यूब पर 2 साल देखा, खुद को आने से रोक नहीं सका'

डॉ. जान वुल्फ़ ने बताया, "मैं यहां यह देखने आया हूं कि कैसे सीमित संसाधनों के बावजूद डॉक्टर इतनी कुशलता से जटिल से जटिल सर्जरी कर देते हैं और मरीज कुछ ही दिनों में सामान्य जिंदगी जीने लगता है। मैंने लगातार दो साल तक डॉ. रहमान के यूट्यूब चैनल पर उनके ऑपरेशनों को देखा। उनके काम से प्रभावित होकर मैं खुद को भागलपुर आने से नहीं रोक सका।"

डॉ. जान ने यह भी कहा कि यहां मरीजों के लिए इस्तेमाल होने वाले कस्टमाइज्ड इंप्लांट्स को डॉ. रहमान स्वयं अपने अस्पताल में तैयार करते हैं, जो आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के लिहाज से बेहद अनूठा और हैरान करने वाला प्रयोग है।

भागलपुर की विधा से जर्मनी के मरीजों का होगा इलाज

भागलपुर जिले के चिकित्सा इतिहास में संभवतः यह पहला मौका है जब यूरोप का कोई सर्जन यहां से मेडिकल तकनीक सीखने आया है। डॉ. जान ने कहा कि वे यहां सीखी गई सर्जरी की बारीकियों और देसी नवाचारों को जर्मनी ले जाकर अपने मरीजों के इलाज में उपयोग करेंगे।

डॉ. रहमान ने कहा कि उनके केंद्र में पहले भी विदेशी मरीज इलाज कराने आते रहे हैं, लेकिन किसी विदेशी सर्जन का यहां आकर काम सीखना न केवल भागलपुर बल्कि पूरे देश के चिकित्सा जगत के लिए गौरव का विषय है।