घटोरा वेटलैंड में पक्षियों का ब्यूटीफुल संगम : कुछ आए, कुछ गए… जैसे पंछी बनूं उड़ती फिरूं मस्त गगन में
ग्रीष्म ऋतु के आगमन के साथ बिहपुर के घटोरा वेटलैंड से प्रवासी पक्षी अपने प्रजनन स्थलों को लौट रहे हैं। बिहार जलपक्षी गणना के अनुसार इस वर्ष यहाँ सर्वा ...और पढ़ें
संवाद सूत्र, बिहपुर (भागलपुर)। ग्रीष्म ऋतु का आगमन होते ही भागलपुर के नवगछिया क्षेत्र अंतर्गत बिहपुर के गंगा दियारा स्थित सोनवर्षा के घटोरा वेटलैंड क्षेत्र में प्रवासी पक्षी वापस लौटने लगे हैं। ठंडे प्रदेशों जैसे सेंट्रल एशिया और साइबेरियाई क्षेत्र से आने वाले जलपक्षी अब अपने प्रजनन स्थलों की ओर रवाना हो रहे हैं।
बिहार जलपक्षी गणना के अनुसार इस वर्ष घटोरा वेटलैंड में सबसे अधिक जलपक्षियों की उपस्थिति दर्ज की गई। बीते माह वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा संचालित जलपक्षी गणना का तृतीय चरण संपन्न हुआ।

प्रवासी पक्षियों की संख्या और प्रकार
इस शरद ऋतु में घटोरा वेटलैंड में करीब 12 हजार प्रवासी/विदेशी पक्षी पहुंचे थे। ये पक्षी सर्दियों में यहां अनुकूल जलवायु और भोजन की उपलब्धता के कारण आते हैं, लेकिन तापमान बढ़ने पर अपने प्रजनन स्थलों की ओर लौट जाते हैं।

पक्षीविद दीपक कुमार 'झुन्नू' के अनुसार मुख्य प्रवासी पक्षियों में शामिल हैं:
- राजहंस
- लालसर
- तिदारी बत्तख
- चैता
- सिंक पर
- कामन टील
- कुशिया चाहा गडबाल
- ग्रेलेग गूज
कुछ पक्षियों का रिटर्न माइग्रेशन थोड़ी देर से होता है, जैसे ब्लैक-टेल्ड गाडविट, स्पॉटेड रेडशैंक और ग्रीनशैंक। ये पक्षी पानी के किनारे कुछ समय रुकते हैं क्योंकि दलदली क्षेत्रों में उन्हें पर्याप्त भोजन मिलता है।

घटोरा का बदलता पक्षी संसार
पक्षीविद झुन्नू के साथ सोनवर्षा की मुखिया नीनारानी और अजय उर्फ लाली कुंवर बताते हैं कि जैसे-जैसे शीतकालीन अतिथि पक्षी लौटते हैं, वैसे-वैसे स्थानीय ग्रीष्मकालीन पक्षियों का आगमन भी शुरू हो जाता है।

इस समय क्षेत्र में पाए जाने वाले स्थानीय पक्षियों में शामिल हैं:
- कोयल
- पपीहा
- व्हाइट-टेल्ड स्टोन चैट
- वेडर समूह की पक्षियां
- विभिन्न मत्स्य भक्षी और कीटभक्षी पक्षी
इनकी चहचहाहट और कलरव से घटोरा क्षेत्र गूंज उठता है।

पर्यावरण और पर्यटन दृष्टि
दीपक कुमार 'झुन्नू' का कहना है कि घटोरा हर ऋतु में एक नया आकर्षण प्रस्तुत करता है। यहां का पक्षी संसार मौसम के अनुसार लगातार बदलता रहता है। शीतकालीन अतिथियों के लौटने और ग्रीष्मकालीन पक्षियों के आगमन से यह क्षेत्र पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ पक्षी प्रेमियों और प्रकृति पर्यटन के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनता है।
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स्थानीय लोग और पर्यावरणविद इस क्षेत्र की सुरक्षा और संरक्षण पर जोर दे रहे हैं ताकि प्रवासी और स्थानीय पक्षियों का निवास सुरक्षित रहे।

पर्यावरण और पक्षी जीवन की विविधता
ग्रीष्म ऋतु के आगमन के साथ-साथ घटोरा वेटलैंड में पर्यावरण और पक्षी जीवन की विविधता देखने को मिल रही है। शीतकालीन जलपक्षियों का लौटना और ग्रीष्मकालीन पक्षियों का आगमन, दोनों ही इस क्षेत्र की जैव विविधता को उजागर करते हैं।
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