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    शक्ति साधना का महापर्व: 15 जुलाई से गुप्त नवरात्रि, मनोकामना पूर्ति के लिए ऐसे करें मां भगवती की आराधना

    Updated: Tue, 07 Jul 2026 08:53 PM (IST)

    आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई से 23 जुलाई तक मनाई जाएगी, जिसमें देवी उपासना और शक्ति साधना का विशेष महत्व है। भागलपुर के मंदिरों में कलश स्थापना के सा ...और पढ़ें

    15 जुलाई से गुप्त नवरात्रि (AI Generated Image)

    15 जुलाई से गुप्त नवरात्रि (AI Generated Image)

    HighLights

    1. 15 जुलाई से 23 जुलाई तक आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का पर्व।

    2. कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 15 जुलाई को प्रातः 5:33 से।

    3. दशमहाविद्याओं की आराधना से मिलती है आध्यात्मिक ऊर्जा और कृपा।

    जागरण संवाददाता, भागलपुर। सनातन परंपरा में गुप्त नवरात्रि को देवी उपासना, शक्ति साधना और आत्मशुद्धि का विशेष पर्व माना जाता है। वर्ष में पड़ने वाली चार नवरात्रियों में चैत्र और शारदीय नवरात्रि जहां जनसामान्य के लिए प्रमुख होती हैं, वहीं माघ और आषाढ़ की गुप्त नवरात्रि साधकों, उपासकों और तांत्रिक साधना करने वालों के लिए अत्यंत फलदाई मानी जाती है।

    इस वर्ष आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई से प्रारंभ होकर 23 जुलाई को नवमी तिथि के साथ संपन्न होगी। इसे लेकर भागलपुर के बूढ़ानाथ मंदिर, तिलकामांझी दुर्गास्थान, जीच्छो दुर्गा मंदिर सहित विभिन्न दुर्गामंदिरों में तैयारियां तेज हो गई हैं।

    तिलकामांझी महावीर मंदिर के पंडित आनंद झा ने बताया कि आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा तिथि का आरंभ 14 जुलाई को दोपहर 3:14 बजे होगा, जो 15 जुलाई को पूर्वाह्न 11:52 बजे तक रहेगी।

    कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 15 जुलाई को प्रातः 5:33 बजे से 10:09 बजे तक रहेगा। इस अवधि में विधि-विधान से कलश स्थापित कर मां भगवती का आह्वान करना अत्यंत शुभ माना गया है।

    उन्होंने बताया कि गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा के गुप्त स्वरूपों के साथ दशमहाविद्याओं की आराधना की जाती है। मां काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला महाविद्याओं की साधना से साधक को आध्यात्मिक ऊर्जा, आत्मबल और दिव्य कृपा प्राप्त होती है।

    धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा, संयम और पूर्ण निष्ठा से की गई उपासना से धन, समृद्धि, सौभाग्य, ऐश्वर्य, यश, शत्रुओं पर विजय, मनोकामना सिद्धि तथा देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

    गुप्त नवरात्रि केवल अनुष्ठानों का पर्व नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, इंद्रिय संयम और अंतर्मन के जागरण का भी अवसर है। इन नौ दिनों में साधक सात्विक जीवन, जप, तप, ध्यान और देवी आराधना के माध्यम से अपने भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।

    मां भगवती की उपासना से नकारात्मक शक्तियों का क्षय होता है और जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।

    जीच्छो दुर्गा मंदिर में नौ दिनों तक होगा दुर्गा सप्तशती का संपुट पाठ

    जीच्छो दुर्गा मंदिर के पुजारी पंडित शरत चंद्र झा ने बताया कि चारों नवरात्रि श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जाती हैं। गुप्त नवरात्रि के प्रथम दिन 15 जुलाई को सुबह आठ बजे कलश स्थापना के साथ मां भगवती का आह्वान किया जाएगा।

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    इसके बाद लगातार नौ दिनों तक दुर्गा सप्तशती का संपुट पाठ, विशेष पूजन, आरती और देवी स्तुति का आयोजन होगा।

    मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया जा रहा है, ताकि श्रद्धालु भक्ति और साधना के दिव्य वातावरण में मां भगवती की आराधना कर सकें।