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    डॉक्‍टरी सलाह : पेशाब पर कंट्रोल नहीं? यह हो सकता है किडनी संक्रमण की शुरुआत, संभल‍िए

    Updated: Sun, 25 Jan 2026 02:05 AM (IST)

    भागलपुर में आईएमए के वार्षिक चिकित्सा सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण स्वास्थ्य विषयों पर चर्चा हुई। डॉ. पीके सिन्हा ने मूत्र असंयम को किडनी संक्रमण का संके ...और पढ़ें

    भागलपुर आईएमए सभागार में शनिवार को वार्षिक चिकित्सा सम्मेलन।

    भागलपुर आईएमए सभागार में शनिवार को वार्षिक चिकित्सा सम्मेलन।

    HighLights

    1. मूत्र असंयम किडनी संक्रमण का प्रारंभिक संकेत हो सकता है।

    2. क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस शराब सेवन से बढ़ता है, जानलेवा है।

    3. सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए टीकाकरण अत्यंत आवश्यक।

    जागरण संवाददाता, भागलपुर। आईएमए ने आईएमए सभागार में शनिवार को वार्षिक चिकित्सा सम्मेलन का आयोजन किया। जिसमें संगठन के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. सहजानंद प्रसाद सिंह ने कहा भागलपुर में संगठन बेहतरीन कार्य कर रहा है। जनसेवा का लाभ हर किसी को मिल रहा है। लेकिन इस सेवा को विस्तार देने की जरूरत है। संगठन शहर के गलियों से निकलकर गांव तक जाए जिससे समाज के आखिरी पायदान पर रह रहे लोगों को उनके घर तक इलाज की सुविधा मिले। संगठन ना केवल हेल्थ जागरूकता शिविर लगाए बल्कि जागरूकता कार्यक्रम भी करे।

    आईएमए सम्मेलन: मूत्र असंयम, पैंक्रियाटाइटिस और सर्वाइकल कैंसर पर विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण सलाह

    IMA organized its annual medical conference in Bhagalpur2

    भागलपुर में आईएमए के सेमिनार में बोले चिकित्सक

    वहीं डा. डीपी सिंह ने कहा कि आईएमए भागलपुर द्वारा किए जाने वाले सेमिनार का विषय ऐसा हो जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग जागरूक हो। आईएमए बिहार के अध्यक्ष डा. अशोक कुमार यादव ने कहा कि आप जो सेमिनार करते है उसका लाभ सभी डाक्टर को हो। जिससे सामान्य चिकित्सक भी नई जानकारी ले सके। ऐसा होने पर इसका लाभ सीधे समाज पर होगा।

    आईएमए के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डा. धन्वंतरि तिवारी ने कहा आप लोग ऐसा काम करे जिसकी गूंज राष्ट्रीय आईएमए तक जाए वहीं इसके पहले डा. सहजानंद सिंह समेत सभी अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर उद्घाटन किया। सभी का स्वागत आईएमए भागलपुर की अध्यक्ष डा. रेखा झा ने किया। जबकि धन्यवाद ज्ञापन डा. रोली भारती व डा. संगीता मेहता ने किया। मंच का संचालन डा. आरपी जायसवाल ने किया।

    • पेशाब रोक न पाना हो सकता है गंभीर बीमारी का संकेत: डा. पीके सिन्हा
    • यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस को न करें नजरअंदाज, किडनी तक पहुंच सकता है संक्रमण
    • बार-बार पेशाब लीक होना खतरे की घंटी, समय पर इलाज जरूरी
    • यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस: कारण, लक्षण और इलाज पर डा. पीके सिन्हा का व्याख्यान
    • 70 साल से अधिक उम्र के लोगों में बढ़ रही मूत्र असंयम की समस्या
    • प्रोस्टेट बढ़ने से हो सकती है मूत्र थैली की गंभीर समस्या: विशेषज्ञ
    • झिझक नहीं, इलाज जरूरी: यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस पर विशेषज्ञ की सलाह

    मूत्र रोग है तो हो जाए सचेत, किडनी में कर देगा सूजन

    अगर कोई व्यक्ति मूत्र को नियंत्रित नहीं कर पा रहा है और कुछ देर भी पेशाब रोकने में असमर्थ है, तो यह प्रोस्टेट या मूत्र थैली से जुड़ी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। पेशाब का बार-बार लीक होना यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस का प्रमुख लक्षण है। समय पर इलाज नहीं कराने पर यह समस्या किडनी संक्रमण का कारण भी बन सकती है। यह बातें शनिवार को पटना से आए डा. पीके सिन्हा ने कहीं।

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    डा. पीके सिन्हा यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस यानी मूत्र का अनियंत्रित होना विषय पर व्याख्यान दे रहे थे। डा. सिन्हा ने बताया कि यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें मुख्य रूप से मधुमेह, प्रोस्टेट ग्रंथि का बढ़ना, महिलाओं में बच्चादानी की सर्जरी और अन्य चिकित्सकीय कारण शामिल हैं। यह रोग विशेष रूप से 70 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में अधिक देखने को मिलता है।

    डा. पीके सिन्हा ने कहा कि इस समस्या के पीछे एक बड़ा कारण मूत्र थैली का पूरी तरह खाली न हो पाना है। यह प्रोस्टेड के बढ़ने से होता है। इससे संक्रमण की आशंका बढ़ जाती है। अगर लंबे समय तक लापरवाही बरती जाए तो संक्रमण किडनी तक पहुंच सकता है, जिससे किडनी में सूजन आ जाती है। अब इस बीमारी के इलाज के लिए नई और प्रभावी दवाएं उपलब्ध हैं, जिनके नियमित उपयोग से रोग को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर झिझक न करें और तुरंत डाक्टर से सलाह ले। जिससे रोग गंभीर नहीं हो।

    • क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस जानलेवा हो सकता है, समय पर इलाज जरूरी: डा. पंकज सोनार
    • अग्न्याशय में लगातार सूजन बन सकती है मौत का कारण, डॉक्टर की चेतावनी
    • पैंक्रियास की बीमारी को न करें नजरअंदाज, बिगड़ सकती है शुगर और पाचन क्रिया
    • क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस क्या है? लक्षण, कारण और इलाज की जानकारी
    • लंबे समय तक शराब सेवन से बढ़ता है क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस का खतरा
    • पैंक्रियास को नुकसान पहुंचाने वाली गंभीर बीमारी पर विशेषज्ञ की राय
    • पेट के ऊपरी हिस्से में लगातार दर्द? हो सकती है क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस
    • तेजी से वजन घटना और तैलीय मल हैं खतरे के संकेत
    • क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस से मधुमेह का खतरा, डॉक्टर ने दी सावधानी की सलाह
    • शराब और सिगरेट छोड़ना ही बचाव का सबसे बड़ा उपाय: डा. सोनार

    IMA organized its annual medical conference in Bhagalpur3

    शराब सेवन से क्रोनिक पेंक्रियाटाइटिस रोग

    गेस्ट्रोइंटस्टाइनल सर्जन डा. पंकज कुमार सोनार ने क्रोनिक पेंक्रियाटाइटिस बीमारी के बारे में जानकारी साझा किया। इन्होंने कहा कि क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस लंबे समय तक चलने वाला रोग है। इसमें अग्न्याशय यानी पैंक्रियास में लगातार सूजन रहता है। अगर समय पर इलाज नहीं हो तो इससे जान भी जा सकता है। इसमें पैंक्रियास धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होने लगता है, पाचन क्रिया और शुगर नियंत्रण से बाहर होने लगता है।

    इस रोग का सबसे बड़ा कारण लंबे समय तक शराब सेवन है। इसमें पेट के ऊपरी हिस्से में लगातार दर्द, भोजन के बाद दर्द बढ़ना, वजन तेजी से घटना, उल्टी, दस्त और तैलीय मल होता है। यह रोग अगर बढ़ता है तो रोगी को मधुमेह भी हो सकता है। यह रोग पूरी तरह से ठीक नहीं होता है लेकिन समय पर इलाज कर इसे ठीक किया जा सकता है। इस रोग से बचने के लिए शराब, सिगरेट से दूरी जरूरी है। कम वसा वाला हल्का और संतुलित भोजन करना चाहिए। परहेज और दवा सेवन से इस रोग को काबू में किया जा सकता है। वहीं कैंसर रोग विशेषज्ञ डा. अमित कुमार ने सर्वाइकल कैंसर के इलाज को लेकर अपनी बातों को रखा।

    • सर्वाइकल कैंसर को रोका जा सकता है, वैक्सीनेशन जरूरी: डा. अमित कुमार
    • 9 से 14 साल की बच्चियों के लिए सर्वाइकल कैंसर वैक्सीन बेहद अहम
    • दो डोज में सुरक्षा, सर्वाइकल कैंसर से बचाव संभव
    • सर्वाइकल कैंसर पर बड़ी राहत, सरकार ने शुरू किया वैक्सीनेशन
    • वैक्सीन लगने से सर्वाइकल कैंसर का खतरा बेहद कम
    • बेटियों के लिए जरूरी टीका, सर्वाइकल कैंसर से बचाव का उपाय
    • शराब बना देगा क्रोनिक पेंक्रियाटाइटिस का रोगी

    सर्वाइकल कैंसर को रोका जा सकता है। इसके लिए सरकार ने वैक्सीनेशन करना आरंभ किया है। नौ से 14 साल तक को दो डोज जीरो और छह माह पर दिया जाता है। इसको लगाने के बाद इस रोग के होने की संभावना बेहद कम हो जाता है। ऐसे में इस उम्र के सभी बच्चियों को यह वैक्सीन लेना ही चाहिए।

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    डा. अमित कुमार, कैंसर रोग विशेषज्ञ