Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    बिहार के JLNMCH में पहली बार केटामिन थेरेपी से मानसिक रोगी का सफल इलाज, घंटे भर में बदल गया आत्महत्या के विचार

    Updated: Wed, 01 Jul 2026 12:41 AM (GMT+05:30)

    भागलपुर के JLNMCH में मानसिक रोगियों के लिए बिहार में पहली बार सरकारी स्तर पर केटामिन थेरेपी शुरू हुई है। इस आधुनिक उपचार से गंभीर अवसाद और आत्महत्या ...और पढ़ें

    भागलपुर में सरकारी स्तर पर पहली बार हुआ केटामिन थेरेपी का सफल प्रयोग, डिप्रेशन की मरीज के आत्मघाती विचार हुए दूर

    भागलपुर में सरकारी स्तर पर पहली बार हुआ केटामिन थेरेपी का सफल प्रयोग, डिप्रेशन की मरीज के आत्मघाती विचार हुए दूर

    HighLights

    1. JLNMCH भागलपुर में मानसिक रोगियों के लिए केटामिन थेरेपी शुरू।

    2. बिहार में सरकारी स्तर पर केटामिन थेरेपी का पहला सफल प्रयोग।

    3. युवती के आत्मघाती विचारों में एक घंटे में उल्लेखनीय कमी।

    जागरण संवाददाता, भागलपुर। भागलपुर के मायागंज स्थित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (JLNMCH) में मानसिक रोगियों के लिए एक आधुनिक थेरेपी सेवा की शुरुआत हुई है। अस्पताल के मानसिक रोग विभाग ने गंभीर अवसाद (डिप्रेशन) और आत्महत्या के तीव्र विचारों से जूझ रहे मरीजों के इलाज में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। बिहार में सरकारी स्तर पर पहली बार यहां 'केटामिन थेरेपी' का सफल प्रयोग किया गया है।

    मात्र एक घंटे के भीतर युवती की स्थिति में हुआ सुधार

    इस अत्याधुनिक उपचार के बाद एक पीड़ित युवती के आत्मघाती विचारों में महज एक घंटे के भीतर उल्लेखनीय कमी देखी गई। चिकित्सकों का मानना है कि यह सूबे की मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगी। हालांकि, डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि यह विशेष उपचार केवल चुनिंदा मरीजों के लिए और पूरी तरह से वरिष्ठ विशेषज्ञों की कड़ी निगरानी में ही किया जाता है।

    पूर्णिया की रहने वाली गंभीर मरीज को किया गया था भर्ती

    मानसिक रोग विभाग के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. गौरव ने बताया कि पूर्णिया की एक युवती लंबे समय से गंभीर अवसाद से पीड़ित थी और लगातार आत्महत्या के विचारों से जूझ रही थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उसे मायागंज अस्पताल में भर्ती कराया गया। परिजनों को उपचार की पूरी प्रक्रिया, संभावित लाभ और जोखिमों के बारे में विस्तार से समझाने और उनकी लिखित सहमति मिलने के बाद यह थेरेपी शुरू की गई।

    विशेषज्ञों की देखरेख में रात को दी गई दवा

    अस्पताल में रात करीब साढ़े सात बजे विशेषज्ञों की टीम की निगरानी में मरीज को दवा दी गई। चिकित्सकों के अनुसार, करीब एक घंटे बाद ही मरीज की मानसिक स्थिति में आश्चर्यजनक रूप से सकारात्मक बदलाव दिखने लगा। उसके मन से आत्महत्या के तीव्र विचार पूरी तरह कम होने लगे और वह अपने भविष्य तथा सामान्य जीवन जीने के बारे में बातें करने लगी।

    खबरें और भी

    एनेस्थीसिया की दवा अवसाद दूर करने में आई काम

    डॉ. गौरव ने बताया कि केटामिन मूल रूप से एनेस्थीसिया में इस्तेमाल होने वाली दवा है, लेकिन हालिया शोधों से पता चला है कि गंभीर अवसाद में यह बेहद तेजी से असर दिखाती है। जहां सामान्य डिप्रेशन की दवाओं का असर आने में कई हफ्ते लग जाते हैं, वहीं केटामिन कुछ ही घंटों के भीतर राहत पहुंचा सकती है। हालांकि इसका प्रभाव बनाए रखने के लिए आगे का नियमित फॉलो-अप जरूरी होता है।

    अब इलाज के लिए नहीं जाना पड़ेगा बेंगलुरु या मुंबई

    मायागंज अस्पताल में इस थेरेपी की शुरुआत से अब गंभीर मानसिक रोगियों को इलाज के लिए बेंगलुरु, मुंबई या दिल्ली जैसे अन्य बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। चिकित्सकों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति में गहरी निराशा या स्वयं को नुकसान पहुंचाने की प्रवृत्ति दिखाई दे, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत मानसिक रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।