मंजूषा से मधुबनी तक : बिहार की कला का राष्ट्रपति भवन में जलवा, नलिनी और मनोज को मिला निमंत्रण
भागलपुर की पारंपरिक मंजूषा कला को राष्ट्रपति भवन में पहचान मिलेगी। कलाकार मनोज पंडित का चयन 'आर्टिस्ट-इन-रेजिडेंसी' कार्यक्रम के लिए हुआ है। बिहार से ...और पढ़ें

राष्ट्रपति भवन में बिहार की पारंपरिक कला का प्रदर्शन, दो कलाकार चयनित
HighLights
मंजूषा कला राष्ट्रपति भवन के 'आर्टिस्ट-इन-रेजिडेंसी' कार्यक्रम में।
भागलपुर के मनोज पंडित और नलिनी साह का चयन।
बिहार की पारंपरिक कलाओं को राष्ट्रीय मंच पर पहचान।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। अंग क्षेत्र की पारंपरिक मंजूषा कला अब देश के सर्वोच्च संवैधानिक परिसर राष्ट्रपति भवन तक पहुंचने जा रही है। राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से आयोजित विशेष ‘आर्टिस्ट-इन-रेजिडेंसी’ कार्यक्रम में भागलपुर के कलाकार मनोज पंडित का चयन हुआ है।
इस खबर से कला जगत, खासकर मंजूषा कला से जुड़े कलाकारों में उत्साह का माहौल है। यह पहली बार है जब इस लोक कला को इतने प्रतिष्ठित मंच पर प्रदर्शित करने का अवसर मिल रहा है।
ईमेल के जरिए मिला आमंत्रण
राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से मनोज पंडित को ईमेल के माध्यम से औपचारिक आमंत्रण भेजा गया है। इसमें कार्यक्रम से जुड़ी सभी आवश्यक जानकारी साझा की गई है।
आमंत्रण पत्र राष्ट्रपति सचिवालय में कार्यरत अधिकारी सर्वेश कुमार की ओर से भेजा गया है। इसमें कलाकार से कार्यक्रम में भागीदारी की पुष्टि करने को कहा गया था, जिसे मनोज पंडित ने स्वीकार कर लिया है।
बिहार से दो कलाकारों का चयन
इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम के लिए बिहार से दो कलाकारों का चयन किया गया है। इसमें मंजूषा कला के लिए मनोज पंडित और मधुबनी पेंटिंग के लिए नलिनी साह को आमंत्रित किया गया है।
दोनों कलाकार अपनी-अपनी पारंपरिक कला की झलक राष्ट्रपति भवन में प्रस्तुत करेंगे। इससे बिहार की समृद्ध लोक कलाओं को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
15 से 20 अप्रैल तक होगा आयोजन
राष्ट्रपति भवन में यह आर्टिस्ट-इन-रेजिडेंसी कार्यक्रम 15 अप्रैल से 20 अप्रैल 2026 तक आयोजित किया जाएगा। इस दौरान चयनित कलाकार वहीं रहकर अपनी कला का प्रदर्शन और संवाद करेंगे। कार्यक्रम के दौरान कलाकारों के ठहरने और आने-जाने की पूरी व्यवस्था राष्ट्रपति भवन की ओर से की जाएगी। साथ ही उन्हें मानदेय भी प्रदान किया जाएगा।
14 अप्रैल को दिल्ली रवाना होंगे कलाकार
मनोज पंडित 14 अप्रैल को देवघर हवाई अड्डा से दिल्ली के लिए रवाना होंगे। उन्हें अपने साथ कला से जुड़े आवश्यक उपकरण भी ले जाने के निर्देश दिए गए हैं। कार्यक्रम के दौरान वे अपनी कला का लाइव प्रदर्शन करेंगे और अपने अनुभव साझा करेंगे।
कला को मिलेगा राष्ट्रीय मंच
इस पहल के माध्यम से कलाकारों को देश के सबसे प्रतिष्ठित मंच पर अपनी कला दिखाने का अवसर मिलेगा। इससे न केवल कलाकारों का हौसला बढ़ेगा, बल्कि मंजूषा और मधुबनी जैसी पारंपरिक कलाओं को भी नई पहचान मिलेगी। कला प्रेमियों और स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि इस कार्यक्रम के बाद अंग क्षेत्र की मंजूषा कला को देशभर में और अधिक प्रसिद्धि मिलेगी।