कांवड़ में विराजमान हैं मां दुर्गा, राधा-कृष्ण व गणेश-लक्ष्मी; 25 वर्षों से लगातार पटना के श्रद्धालु जा रहे बाबाधाम
श्रावणी मेले में पटना सिटी से आए लगभग 200 कांवड़ियों का एक जत्था 54 फीट लंबा कलात्मक कांवड़ लेकर अजगैवीनाथ धाम पहुंचा। यह जत्था उत्तरवाहिनी गंगा से जल ...और पढ़ें

अजगैवीनाथ धाम: चांदी की प्रतिमाओं से सजा 54 फीट लंबा कांवड़; पटना सिटी के 200 श्रद्धालु बाबाधाम के लिए रवाना
HighLights
पटना से 200 कांवड़ियों का जत्था 54 फीट कांवड़ लेकर पहुंचा।
कांवड़ में चांदी की प्रतिमाएं और देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं।
यह 25 वर्षों से चली आ रही परंपरा है, 4 दिन में पूरी होगी यात्रा।
संवाद सूत्र, अजगैवीनाथ धाम (भागलपुर)। विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला का शुभारंभ होते ही बाबा अजगैवीनाथ की पावन नगरी पूरी तरह से शिवभक्ति के रंगों में सराबोर हो चुकी है। हर तरफ 'बोल-बम' और 'हर-हर महादेव' के गगनभेदी जयकारे गूंज रहे हैं। देश-दुनिया के कोने-कोने से आने वाले शिवभक्त अपने-अपने अनोखे, भव्य और आकर्षक कांवड़ के साथ बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करने के लिए बाबानगरी देवघर की ओर रवाना हो रहे हैं।
इसी क्रम में बुधवार को पटना सिटी से आए करीब 200 कांवड़ियों का एक विशाल जत्था आकर्षण का मुख्य केंद्र बन गया। यह जत्था अपने साथ 54 फीट लंबा भव्य और कलात्मक कांवड़ लेकर अजगैवीनाथ धाम के ऐतिहासिक मंदिर घाट पहुंचा। यहां पहुंचकर श्रद्धालुओं ने सबसे पहले पवित्र उत्तरवाहिनी गंगा नदी में आस्था की डुबकी लगाई। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार और गंगा मैया के जयकारों के बीच उत्तरवाहिनी गंगाजल का संकल्प लिया तथा बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए अपनी पैदल यात्रा शुरू की।
25 वर्षों से जारी है परंपरा, 4 दिनों में पूरी होगी पैदल यात्रा
पटना सिटी से कांवड़ लेकर पहुंचे मुख्य कांवड़िया महेश कुमार ने बताया कि उनके जत्थे द्वारा 54 फीट लंबा कांवड़ लाने की यह धार्मिक परंपरा पिछले 25 वर्षों से अनवरत चली आ रही है। हर साल श्रावणी मेले में वे लोग एकजुट होकर पटना सिटी से अजगैवीनाथ धाम (सुल्तानगंज) पहुंचते हैं।
उन्होंने बताया कि मंदिर घाट पर उत्तरवाहिनी गंगा से जल संकल्पित करने के बाद श्रद्धालुओं का यह जत्था लगभग 105 किलोमीटर लंबी कठिन पैदल यात्रा की शुरुआत करता है। बोल-बम के नारों के साथ चार दिनों की इस भक्तिमय यात्रा को पूरा कर श्रद्धालु बाबानगरी पहुंचते हैं, जहां कामना ज्योतिर्लिंग बाबा बैद्यनाथ पर जल अर्पित कर सुख, समृद्धि और विश्व कल्याण की मनोकामना करते हैं।
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चांदी की प्रतिमाओं और देवी-देवताओं से सजा है 54 फीट का कांवड़
मेला क्षेत्र से गुजर रहा यह 54 फीट लंबा कांवड़ अन्य श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच भारी कौतूहल और आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस कांवड़ की बनावट और सजावट बेहद अलौकिक है:
विराजमान देवी-देवता: 54 फीट लंबे इस विशाल कांवड़ पर मां काली, मां दुर्गा, भगवान राधा-कृष्ण, प्रथम पूज्य गणेश जी, माता लक्ष्मी, नाग देवता और मुख्य स्थान पर पवित्र शिवलिंग को स्थापित किया गया है।
शुद्ध चांदी की प्रतिमाएं: इस कांवड़ की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें विराजित कई मुख्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं शुद्ध चांदी से निर्मित हैं, जो धूप में चमकती हुई बेहद मनमोहक दृश्य प्रस्तुत करती हैं।
अनोखी भक्ति के कई रंग आ रहे नजर
श्रावणी मेले के दौरान अजगैवीनाथ धाम से लेकर बाबानगरी के पैदल मार्ग पर शिवभक्तों की आस्था के कई अनोखे और भावुक कर देने वाले रंग देखने को मिल रहे हैं। कोई श्रद्धालु अपनी महज डेढ़ साल की मासूम बेटी को कांवड़ के एक पलड़े में बिठाकर यात्रा कर रहा है, तो कोई भक्त आधुनिक युग में 'श्रवण कुमार' का रूप धारण कर अपने वृद्ध और लाचार माता-पिता को कांवड़ में बैठाकर बाबाधाम की कठिन डगर पर निस्वार्थ भाव से आगे बढ़ता नजर आ रहा है।