Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    सरस्वती पूजा 2026 : 23 जनवरी को दिन भर है शुभ मुहूर्त, लेकिन पूर्वा. 11:40 से अप. 12:28 बजे तक पूजा करना विशेष फलदायी

    Updated: Tue, 20 Jan 2026 05:59 AM (IST)

    भारतीय सनातन परंपरा में बसंत पंचमी का विशेष महत्व है, जो ज्ञान, विद्या और कला की देवी मां सरस्वती को समर्पित है। 23 जनवरी 2026 को मनाई जाने वाली सरस्व ...और पढ़ें

    सरस्वती पूजा 2026 : वेद विद्यापीठ गुरुधाम बौंसी के आचार्य संपूर्णानंद।

    सरस्वती पूजा 2026 : वेद विद्यापीठ गुरुधाम बौंसी के आचार्य संपूर्णानंद।

    HighLights

    1. 23 जनवरी 2026 को बसंत पंचमी मनाई जाएगी।

    2. अभिजीत मुहूर्त 11:40 से 12:28 बजे तक विशेष शुभ।

    3. मां सरस्वती का प्राकट्य दिवस, विद्यारंभ के लिए उत्तम।

    डिजिटल डेस्क, भागलपुर। सरस्वती पूजा 2026 : भारतीय सनातन परंपरा में बसंत पंचमी का विशेष स्थान है। यह एक तिथि विशेष का उत्सव नहीं, बल्कि ज्ञान, विद्या, वाणी, संगीत, कला तथा प्रकृति के नवजीवन का प्रतीक है। इसी दिन मां सरस्वती, जो ब्रह्मा की शक्ति और समस्त विद्याओं की अधिष्ठात्री देवी है, उनकी विशेष पूजा की जाती है। इसे बसंत पंचमी भी करते हैं।

    कब मनाई जाती है बसंत पंचमी

    वेद विद्यापीठ गुरुधाम बौंसी के आचार्य संपूर्णानंद ने कहा कि बसंत पंचमी अर्थात सरस्वती पूजा हर वर्ष माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है। वाराह पुराण में स्पष्ट उल्लेख है। पंचम्यां कुन्दकुसुमैः पूजां कुर्यात् समृद्धये। अर्थात- पंचमी में वाग्देवी सरस्वती की पुस्तक की या मृन्मय प्रतिमा की पूजा करनी चाहिए। इसी कारण इस तिथि को सरस्वती पूजा के लिए सर्वोत्तम माना गया है।

    माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी ही क्यों?

    सरस्वती पूजा के इस तिथि के पीछे तीन प्रमुख शास्त्रीय कारण माने गए है। देवी सरस्वती का प्राकट्य दिवस इसी दिन माना जाता है। स्कंद पुराण में उल्लेख है कि माघशुक्लपंचम्यां तु प्रादुर्भूता सरस्वती। अर्थात् माघ शुक्ल पंचमी के दिन ही देवी सरस्वती का प्राकट्य हुआ।

    ब्रह्मा द्वारा सृष्टि में वाणी का संचार

    • ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार : इसी दिन ब्रह्मा ने सृष्टि को वाणी और ज्ञान प्रदान करने हेतु सरस्वती को प्रकट किया। इससे पहले सृष्टि मौन थी। वेद विद्यापीठ गुरुधाम बौंसी के आचार्य संपूर्णानंद ने यह जानकारी दी। 
    • वसंत ऋतु और सत्त्व गुण की प्रधानता : वसंत ऋतु को शास्त्रों में सत्त्वगुण प्रधान ऋतु कहा गया है। सत्त्वगुण का संबंध ज्ञान, शुद्धता और प्रकाश से है, जो सरस्वती के मूल तत्व हैं।
    • विद्यारंभ का है विशेष दिन : सरस्वती पूजा के दिन छोटे बच्चों को पहली बार अक्षर लेखन कराया जाता है, जिसे विद्यारंभ कहा जाता है। इस दिन आरंभ किया गया अध्ययन शीघ्र फलदायी होता है।

    सरस्वती पूजा की विधि 

    वेद विद्यापीठ गुरुधाम बौंसी के आचार्य संपूर्णानंद ने कहा कि प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। मां सरस्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। श्वेत या पीले पुष्प अर्पित करें। पुस्तकें, वाद्य यंत्र, लेखनी आदि पूजा में रखें। मां सरस्वती के मंत्र का जप करें। भजन व आरती से मां सरस्वती की आराधना करें। सरस्वती मंत्र : कुन्देन्दु तुषारहार धवला या शुभ्रवस्त्रावृता मंत्र पाठ कर ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः मंत्र जप करें।

    खबरें और भी

    सरस्वती पूजा मुहूर्त

    वेद विद्यापीठ गुरुधाम बौंसी के आचार्य संपूर्णानंद ने बताया 23 जनवरी 2026 को वैसे तो पूरा दिन भर पंचमी है। इस कारण कभी भी पूजन कर सकते है। परंतु इसी दिन पूर्वा. 11:40 से अप. 12:28 अभिजीत मुहूर्त है। इस दौरान सरस्वती पूजा करना विशेष शुभ और फलदाई है। हालांकि स्थान परिवर्तन होने पर यह समय कुछ आगे-पीछे हो सकता है।

    बसंत पंचमी : ज्ञान, विद्या और ऋतु परिवर्तन का पावन पर्व

    बसंत पंचमी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि चेतना का उत्सव है। यह दिन हमें स्मरण कराता है कि जहां ज्ञान है, वहीं प्रकाश है। माघ शुक्ल पंचमी को मां सरस्वती की उपासना करके मनुष्य न केवल विद्या, बल्कि विवेक और विनय भी प्राप्त करता है।