श्रावणी मेला में दुकानदारों पर मंदी की मार, कांवड़ियों की संख्या में कमी से हो रहा नुकसान
श्रावणी मेले में इस बार कांवरियों की कम संख्या के कारण दुकानदारों को भारी नुकसान हो रहा है। सामानों की कीमतों में वृद्धि और श्रद्धालुओं की कम भीड़ से ...और पढ़ें

श्रावणी मेला के कारोबारी। फोटो जागरण
HighLights
कांवरियों की कम संख्या से मेले में कारोबार प्रभावित।
सामानों की बढ़ी कीमतों से श्रद्धालु खर्च करने में हिचके।
दुकानदारों को पूंजी निकालना भी मुश्किल हो रहा है।
आनंद राज, अजगैवीनाथ धाम। विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले की शुरुआत के साथ शिवभक्तों की आस्था और भक्ति चरम पर है, लेकिन मेले में कारोबार करने पहुंचे दुकानदारों के चेहरे पर इस बार मायूसी साफ दिखाई दे रही है। अजगैवीनाथ धाम से लेकर देवघर तक कांवरिया पथ पर हजारों दुकानें सजी हैं, लेकिन श्रद्धालुओं के अपेक्षाकृत कम आने से बाजार में रौनक नहीं आ सकी है।
इस वर्ष सावन में चार सोमवारी होने से दुकानदारों ने बड़ी उम्मीदों के साथ मोटी रकम में जमीन भाड़े पर लेकर दुकान सजाए। लाखों की पूंजी लगाकर सामानों की खरीदारी कर स्टॉक किया।
इतनी तैयारी के बाद कांवरियों की राह तक रहे हैं। दुकानदार दुकान सजा के बैठे हैं, लेकिन आलम यह है कि गिने-चुने कांवरिया ही दुकानों का रुख कर रहे हैं।
लिहाजा दुकानदारों के लिए पूंजी निकालना भी अब मुश्किल लग रहा है। इधर, बंगाल से आए कांवरिया राहुल भारद्वाज ने बताया कि सभी प्रकार के सामान के दामों में वृद्धि होने के कारण खर्च करने में दो बार सोचना पड़ता है।
कांवरिया ने बताया कि कांवर के दामों के साथ-साथ जल पात्र के दामों में भी काफी वृद्धि देखी जा रही है। 10 का पानी बोतल 20 रुपऐ में मिल रहा है तो, 5 रुपये की चाय 10 में मिल रही है।
पहले जैसे नहीं है कांवरियों की भीड़
जलपात्र दुकानदार परमजीत यादव ने बताया कि आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या पहले जैसी नहीं है। आज सावन का छठा दिन है। फिर भी बहुत कम संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
जो भी श्रद्धालु पहुंच रहे हैं उसमें कुछ कांवरिया ही कावर की खरीदारी कर रहे हैं। अगर कांवरियों की संख्या में वृद्धि नहीं हुई तो पूंजी निकालना भी मुश्किल होगा।
इस वर्ष सावन में चार सोमवारी होने के कारण अच्छी बिक्री की उम्मीद थी। इसी भरोसे ऊंचे किराये पर जमीन लेकर दुकानें लगाईं और लाखों रुपये की पूंजी से पूजन सामग्री, वस्त्र, खाद्य सामग्री व अन्य सामान का स्टाक किया। अभी तक उम्मीद के अनुरूप ग्राहक नहीं पहुंचने से कारोबार प्रभावित हो रहा है। - अरुण साह, कांवर दुकानदार
दिनभर इंतजार के बाद भी गिने-चुने कांवरिये ही खरीदारी कर रहे हैं। इससे रोजमर्रा का खर्च निकालना भी मुश्किल हो रहा है। यदि आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या नहीं बढ़ी तो अधिकांश दुकानदारों के लिए निवेश की भरपाई करना भी चुनौती बन जाएगा। - विनय कुमार, दुकानदार