रविवार, एकादशी, अमावस्या और पितृ पक्ष में तुलसी पूजन व प्रयोग वर्जित, आप यह भी जान लें कि राम व श्याम तुलसी में क्या अंतर है
श्री शिव शक्ति महायज्ञ में महंत राधेश्याम व्यास ने ने राम और श्याम तुलसी के प्रकार, वृंदा की पौराणिक कथा और शालिग्राम से संबंध पर प्रकाश डाला। रविवार, ...और पढ़ें

तुलसी के पौराणिक महत्व पर चर्चा
संवाद सूत्र, कहलगांव (भागलपुर)। कहलगांव प्रखंड के रसलपुर दुर्गा मंदिर परिसर में आयोजित श्री शिव शक्ति महायज्ञ के तहत चल रही महा शिव महापुराण कथा में कथावाचक उत्तर प्रदेश के धामपुर स्थित श्री राममंदिर आश्रम के पीठाधीश्वर महंत राधेश्याम व्यास महाराज ने तुलसी की महिमा का विस्तार से वर्णन किया।
तुलसी के दो प्रकार
महंत राधेश्याम व्यास ने बताया कि तुलसी दो प्रकार की होती है। पहला हरे पत्तों वाली जिसे ‘राम तुलसी’ कहा जाता है और दूसरा श्याम वर्ण की पत्तियों वाली, जिसे ‘श्याम तुलसी’ कहते हैं। राम तुलसी में एक-एक पत्ता होता है, जबकि श्याम तुलसी गुच्छेदार रूप में पाई जाती है, जिसे तुलसी दल भी कहा जाता है।
तुलसी का पौराणिक महत्व
कथा वाचक ने बताया कि सतयुग में तुलसी का अवतरण वृंदा के रूप में हुआ था। वृंदा राक्षस जालंधर की पतिव्रता पत्नी थीं। भगवान विष्णु द्वारा उनके पतिव्रत धर्म के भंग होने पर वृंदा ने विष्णु को पत्थर बनने का श्राप दिया। इसके परिणामस्वरूप भगवान विष्णु शालिग्राम रूप में प्रकट हुए और वृंदा तुलसी के रूप में पृथ्वी पर प्रतिष्ठित हुईं।
द्वापर युग में तुलसी
महंत ने द्वापर युग के शंखचूड़ और उनकी पत्नी के प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि उनके श्राप के कारण भी भगवान शालिग्राम रूप में पूजित हुए। इन पौराणिक घटनाओं के कारण ही भगवान सूर्य और भगवान शिव को तुलसी पत्र अर्पित नहीं किया जाता है।
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तुलसी पूजा और दिशा नियम
कथा वाचक ने यह भी बताया कि रविवार, एकादशी, अमावस्या और पितृ पक्ष में तुलसी पूजन निषिद्ध है। तुलसी का पौधा पूर्व दिशा, सूर्य दिशा और ईशान कोण (शिव दिशा) में नहीं लगाना चाहिए।
काफी संख्या में श्रद्धालु वहां मौजूद थे
इस प्रकार महंत राधेश्याम व्यास ने उपस्थित श्रद्धालुओं को तुलसी की धार्मिक, पौराणिक और सामाजिक महत्ता के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान उनसे कथा श्रवण करने काफी संख्या में श्रद्धालु वहां पहुंचे थे। भंडारा का भी आयोजन किया गया था। लोगों ने महाप्रसाद ग्रहण किया।