चिताओं के बीच जिंदगी जोड़ रहा बेली ब्रिज
भागलपुर के बरारी श्मशान घाट पर वैराग्य की जगह अब लौटती रफ्तार और खुलते रास्तों की चर्चा। ...और पढ़ें

HighLights
विक्रमशिला सेतु पर बेली ब्रिज का निर्माण जारी।
3 मई को पुल का एक हिस्सा ध्वस्त हुआ था।
बीआरओ मरम्मत कर जनजीवन सामान्य कर रहा।
शंकर दयाल मिश्रा, भागलपुर। बरारी घाट पर शाम उतर रही है। पुल घाट से महज 100 मीटर पूर्व श्मशान घाट से उठता धुआं और जलती चिताएं जीवन की अंतिम सच्चाई का अहसास कराती हैं। इसी ओर से नवगछिया से आ रहीं यात्रियों से भरी दिन की आखिरी नावें तेजी से पुल घाट की ओर बढ़ रही हैं। शवदाह के लिए आने वाले अक्सर मौत का सामना करते हुए वैराग्य भाव से बातें किया करते हैं, लेकिन अभी श्मशान घाट पर चर्चाओं का केंद्र जीवन की क्षणभंगुरता नहीं, बल्कि जिंदगी की वापसी है। हवा के साथ शव के जलने की गंध मन में वैराग्य भरती तो है, पर नावों के इंजन की आवाज बरबस ध्यान गंगा की ओर खींच लेती है। ...और फिर नावों के साथ घूमती नजरें विक्रमशिला सेतु के टूटे हिस्से पर टिक जाती हैं, जहां बेली ब्रिज आकार ले चुका है। दूर पुल पर छोटी आकृतियों सी दिख रहीं मशीनें और बीआरओ की टीम हजारों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को पटरी पर लौटाने में जुटी हैं।
बरारी घाट पर एक साथ तीन दृश्य दिखाई देते हैं—गंगा की शांत धारा में हलचल मचाती यात्रियों से भरी नावें, श्मशान घाट की जलती चिताएं और टूटे सेतु को जोड़ चुका बेली ब्रिज। मुंदीचक के अर्जुन तांती की मौत गुरुवार तड़के हार्ट अटैक के कारण हो गई थी। उनके शवदाह में आए लोगों में बुजुर्ग सुरेश से बात होती है। कहते हैं- पहले भी कई शवदाह में यहां आ चुका हूं, पर अभी का माहौल अलग है। उन्होंने कहा कि आप जो तीन दृश्य देख रहे हैं, उसमें से पहला समय के प्रवाह का प्रतीक है, दूसरा जीवन की अंतिम सच्चाई का और तीसरा उम्मीद का। शायद यही वजह है कि अभी घाट पर मृत्यु और वैराग्य से ज्यादा चर्चा जीवन की संभावनाओं पर हो रही है। मौत की आग के ठीक बगल में एक पुल फिर से लोगों की राहें जोड़ने की तैयारी जो कर रहा है।
-1779587514824.jpg)
वाकई...! बीते तीन मई को विक्रमशिला सेतु का एक हिस्सा ध्वस्त होने के बाद भागलपुर और नवगछिया के बीच का जनजीवन मानो ठहर सा गया था। रोज यात्रा करने वाले निराशा के भंवर में चले गए। हालांकि, तत्काल पुल घाट जीवंत हो उठा और गंगा में नावों व जहाजों से परिचालन शुरू हुआ। इधर, सरकार ने मरम्मत की जिम्मेदारी बीआरओ को सौंपी। तत्काल बीआरओ ने आकर कमान संभाली और सात जून तक परिचालन शुरू कर देने का भरोसा दिया। यह भरोसा अब घाट से सच होता नजर आ रहा है।
शवदाह में आए, सेतु भी देख लिया
झारखंड के गोड्डा जिले के पथरगामा से गायत्री देवी के शव के साथ पहुंचे अनमोल कुमार ने कहा कि उन्होंने विक्रमशिला सेतु के ध्वस्त होने की बात सुन रखी थी। चित्रों और वायरल वीडियो में इसे देखा था, पर सामने से देखने की इच्छा थी। अभी शवदाह में आना जरूरी था, इसी बहाने पुल का हाल भी देख लिया।
खबरें और भी
-1779588041445.jpg)
लोगों की बातचीत बदल गई, पर सेल्फी लेने की चाहत नहीं
पुल घाट पर मौजूद नाविक विनोद, चंदन आदि ने कहा कि पुल टूटने के बाद यहां आने वाले लोगों की बातचीत भी बदल गई है, पर सेल्फी लेने की चाहत नहीं बदली। शुरुआती दिनों में लोग हादसे और नाव से होने वाली परेशानी की चर्चा करते थे। घाट से और यात्री नाव पर सवार होने के बाद अपने मोबाइल से ध्वस्त पुल के साथ सेल्फी जरूर लेते थे। अब अधिकतर लोग यह जानना चाहते हैं कि काम कितना पूरा हुआ, पुल कब चालू होगा और सामान्य दिनचर्या कब लौटेगी। कई लोग नाव से उतरने से पहले कुछ क्षण रुककर बेली ब्रिज को निहारते हैं और फिर अपने गंतव्य की ओर बढ़ जाते हैं। इस बीच वे सेल्फी भी लेते हैं। इसपर यहां दर्शक के तौर पर आए मितेश कुमार झा ने कहा- पुल के टूटे हिस्से के साथ ली जाने वाली तस्वीरें अब केवल हादसे की याद नहीं, बल्कि लौटती उम्मीद की तस्वीर भी बन रही हैं।