विक्रमशिला सेतु बेली ब्रिज अपडेट; 7.8 मीटर पीछे क्षतिग्रस्त हिस्से के दोनों सिरों से होगा निर्माण, नक्शा देखें
विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्से पर सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा 15 दिनों में 50 मीटर लंबा बेली ब्रिज बनाया जाएगा, जिससे छोटे वाहनों की आवाजाही ब ...और पढ़ें

विक्रमशिला सेतु पर बनेगा बेली ब्रिज, छोटे वाहनों की आवाजाही जल्द बहाल
HighLights
क्षतिग्रस्त विक्रमशिला सेतु पर बनेगा बेली ब्रिज।
15 दिनों में छोटे वाहनों की आवाजाही होगी शुरू।
BRO करेगा निर्माण, 3 करोड़ रुपये का अनुमानित खर्च।
जागरण संवादाता, भागलपुर। विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्से पर सीमा सड़क संगठन (BRO) अस्थायी लेकिन मजबूत बेली ब्रिज का निर्माण करेगा। यह पुल टूटे स्लैब के दोनों सिरों को जोड़कर बनाया जाएगा। लगभग 50 मीटर लंबा इस पुल पर 10 टन तक क्षमता वाले छोटे चारपहिया वाहन चल सकेंगे।
सेतु के समानांतर दो लेन का ट्रस ब्रिज भी तैयार किया जाएगा। यह स्टील के जालीदार ढांचे पर आधारित वैकल्पिक मार्ग होगा, जिसमें पैदल यात्रियों के लिए अलग सुरक्षित रास्ता भी होगा। दोनों पुलों का उद्देश्य क्षतिग्रस्त हिस्से के बावजूद सुरक्षित और नियंत्रित आवागमन जल्दी बहाल करना है।
ट्रस ब्रिज क्या है?
- ट्रस ब्रिज स्टील, लोहे या लकड़ी के त्रिकोणीय ढांचे से बना होता है।
- इसकी मुख्य संरचना “ट्रस” कहलाती है, जो कई त्रिकोणों को जोड़कर तैयार की जाती है।
- त्रिकोणीय डिजाइन भार को समान रूप से बांटता है, जिससे पुल ज्यादा स्थिर रहता है।
- कम सामग्री में भी ज्यादा भार उठाने की क्षमता रखता है।
- लंबी दूरी तक भारी दबाव सहने में सक्षम होता है।
- रेलवे पुल, सैन्य पुल और बड़े सड़क पुलों में इसका व्यापक उपयोग होता है।
- विक्रमशिला सेतु पर बनने वाला ट्रस ब्रिज दो लेन का होगा, जिसमें पैदल यात्रियों के लिए अलग सुरक्षित मार्ग की व्यवस्था होगी।
बेली ब्रिज: सीमा सड़क संगठन का प्रोजेक्ट
- बेली ब्रिज 7.8 मीटर पीछे क्षतिग्रस्त हिस्से के दोनों सिरों से बनाया जाएगा, ताकि कंपन न हो।
- पुल के टूटे हिस्से की लंबाई 34 मीटर है।
- निर्माण के बाद पुल की कुल लंबाई 50 मीटर होगी।
- इसे छोटे वाहन और बाइक के लिए तैयार किया जाएगा, 10 टन भार क्षमता होगी।
- अनुमानित खर्च: 3 करोड़ रुपये।
- निर्माण समय: 15 दिनों में पूरा।
बेली ब्रिज क्या होता है?
बेली ब्रिज स्टील के जालीदार ट्रस से बना अस्थायी पुल है। इसे आपदा, युद्ध और क्षतिग्रस्त पुलों पर कम समय में तैयार किया जा सकता है।
- द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इसे ब्रिटिश सिविल इंजीनियर सर डोनाल्ड बेली ने विकसित किया था।
- इसका उद्देश्य सेना के लिए ऐसा पुल बनाना था, जिसे तेजी से स्थापित किया जा सके।
- भारी मशीनों की आवश्यकता नहीं होती।
विक्रमशिला सेतु पर बेली ब्रिज का कार्य
- टूटे स्लैब के दोनों सिरों को स्टील ट्रस से जोड़ा जाएगा।
- पुल का ढांचा मजबूत बॉक्स बीम पर बनेगा।
- टूटे हिस्से के ऊपर अस्थायी सड़क मार्ग तैयार होगा।
कौन से वाहन चल सकेंगे?
- कार
- एंबुलेंस
- बाइक
- छोटे चारपहिया वाहन
किन वाहनों पर रहेगी रोक?
- भारी ट्रक
- ओवरलोडेड वाहन
- बड़े मालवाहक वाहन
बेली ब्रिज कैसे बनता है?
- सर्वे और डिजाइन: इंजीनियर टूटे हिस्से और भार क्षमता की जांच करते हैं।
- स्टील पैनल असेंबली: फैक्ट्री में बने स्टील पैनल साइट पर जोड़े जाते हैं।
- लांचिंग प्रक्रिया: रोलर की मदद से स्टील ढांचे को आगे बढ़ाया जाता है।
- डेck तैयार: ऊपर सड़क जैसी सतह और रेलिंग लगाई जाती है।
- लोड टेस्ट: वाहनों के परिचालन से पहले क्षमता जांची जाती है।
बेली ब्रिज की खासियत
- बहुत कम समय में तैयार
- टूटे पुल पर तुरंत वैकल्पिक मार्ग
- कम लागत में आवागमन बहाल
- जरूरत पड़ने पर दूसरी जगह भी इस्तेमाल किया जा सकता है
- आपदा और युद्ध जैसी परिस्थितियों में बेहद उपयोगी
क्यों जरूरी है यह पुल?
विक्रमशिला सेतु पर यातायात बंद होने के कारण भागलपुर और नवगछिया के बीच आवागमन प्रभावित है। बेली ब्रिज बनने के बाद छोटे वाहनों की आवाजाही जल्द बहाल हो सकेगी और स्थानीय लोगों को राहत मिलेगी।